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Date: 30/03/2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि दावणगेरे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक पर मौद्रिक दंड लगाया

30 मार्च 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि दावणगेरे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 24 मार्च 2026 के आदेश द्वारा, दि दावणगेरे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 56 के साथ पठित धारा 19 के प्रावधानों के उल्लंघन तथा आरबीआई द्वारा जारी ‘अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 1.50 लाख (एक लाख पचास हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बीआर अधिनियम की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। सांविधिक प्रावधानों के उल्लंघन/ आरबीआई निदेशों के अननुपालन और तत्संबंधी पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त प्रावधानों एवं निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

बैंक ने:

i. बीआर अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अन्य सहकारी समितियों में शेयर रखे थे;

ii. प्रत्येक ग्राहक को एक विशिष्ट ग्राहक पहचान कोड (यूसीआईसी) देने के बजाय, कुछ ग्राहकों को एकाधिक ग्राहक पहचान कोड आवंटित किए थे; और

iii. ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को निर्धारित समय-सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) पर अपलोड करने में विफलता दिखाई थी।

यह कार्रवाई, सांविधिक एवं विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(ब्रिज राज)  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2357

 
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