23 अप्रैल 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर नगरी सहकारी बैंक लिमिटेड, औरंगाबाद
पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 17 अप्रैल 2026 के आदेश द्वारा, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर नगरी सहकारी बैंक लिमिटेड, औरंगाबाद (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘एक्सपोजर मानदंड एवं सांविधिक/अन्य प्रतिबंध - यूसीबी’ संबंधी कतिपय निदेशों और ‘पर्यवेक्षी कार्रवाई ढांचा (एसएएफ़)’ के अंतर्गत जारी परिचालनगत अनुदेशों के अननुपालन के लिए ₹80,000 (अस्सी हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन और तत्संबंधी पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर, इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
-
बैंक, कुछ अग्रिमों पर निर्धारित विनियामकीय सीमा का पालन करने में विफल रहा; और
-
बैंक ने, पर्यवेक्षी कार्रवाई ढांचे (एसएएफ) के अंतर्गत जारी निदेशों का पालन नहीं करते हुए, कतिपय जमाराशियों पर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों से अधिक ब्याज दरें दीं।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/132 |