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भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय स्टेट बैंक पर मौद्रिक दंड लगाया

26 नवंबर 2021

भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय स्टेट बैंक पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने, दिनांक 16 नवंबर 2021 के आदेश द्वारा भारतीय स्टेट बैंक (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (अधिनियम) की धारा 19 की उप-धारा (2) के उल्लंघन के लिए 1.00 करोड़ (एक करोड़ रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड अधिनियम की धारा 46 (4) (i) और धारा 51 (1) के साथ पठित धारा 47 ए (1) (सी) के प्रावधानों के तहत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल करना नहीं है।

पृष्ठभूमि

31 मार्च 2018 और 31 मार्च 2019 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक के पर्यवेक्षी मूल्यांकन (आईएसई) के लिए किए गए सांविधिक निरीक्षण और जोखिम मूल्यांकन रिपोर्टों तथा उक्त से संबंधित सभी पत्राचार की जांच से, अन्य बातों के साथ-साथ यह पता चला कि अधिनियम की धारा 19 की उप-धारा (2) का उल्लंघन उस सीमा तक किया गया है, जिस हद तक बैंक के पास उधारकर्ता कंपनियों की चुकता शेयर पूंजी के तीस प्रतिशत से अधिक की राशि के शेयर गिरवीदार के रूप में थे। उक्त के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें उनसे यह पूछा गया कि वे कारण बताएं कि अधिनियम के उपर्युक्त प्रावधानों, जैसा की उसमें उल्लिखित है, के उल्लंघन के लिए उन पर दंड क्यों न लगाया जाए।

नोटिस पर बैंक के उत्तर, व्यक्तिगत सुनवाई में किए गए मौखिक प्रस्तुतियों और बैंक द्वारा किए गए अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि अधिनियम के उपर्युक्त प्रावधानों के उल्लंघन आरोप सिद्ध हुए हैं और अधिनियम के उपर्युक्त प्रावधानों के उल्लंघन की सीमा तक बैंक पर मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

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