10 जुलाई 2012
भारतीय रिज़र्व बैंक ने नए बैंकों को लाइसेंस देने के लिए
प्रारूप दिशानिर्देशों पर अभिमतों का सारांश जारी किया
भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाईट पर निजी क्षेत्र में नए बैंकों को लाइसेंस देने के लिए 29 अगस्त 2011 को अपनी वेबसाईट पर जारी प्रारूप दिशानिर्देशों पर प्राप्त अभिमतों और सुझावों का सारांश जारी किया। अभिमत और सुझाव सामान्य जनता, परामर्शदाताओं, विश्लेषणकर्ताओं, उद्योग/व्यवसाय गृहों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों आदि से प्राप्त हुए। प्राप्त अभिमतों में काफी विभिन्नताएं है और निजी क्षेत्र में नए बैंकों को लाइसेंस देने से संबंधित कई विषयों पर है।
आपको यह याद होगा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने वर्ष 2010-11 के लिए अपने बज़ट भाषण में यह घोषणा की थी कि रिज़र्व बैंक निजी क्षेत्र के सहभागियों को कुछ अतिरिक्त बैंकिंग लाइसेंस देने पर विचार कर रहा है। इसके अनुसरण में 11 अगस्त 2010 को निजी क्षेत्र में नए बैंकों के प्रवेश पर एक चर्चा पेपर रिज़र्व बैंक की वेबसाईट पर जारी किया गया था। उसके बाद चर्चा पेपर पर प्राप्त अभिमतों और सुझावों की जॉंच की गई और सरकार के परामर्श से 31 अक्टूबर 2011 तक बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं, औद्योगिक गृहों, अन्य संस्थाओं और आम जनता से अपने विचार और अभिमतों को आमंत्रित करते हुए 29 अगस्त 2011 तक रिज़र्व बैंक की वेबसाईट पर नए बैंकों को लाइसेंस देने पर प्रारूप दिशानिर्देशों को जारी किया गया था।
नए बैंकों को लाइसेंस देने के लिए प्रारूप दिशानिर्देशों में निम्नलिखित पहलुओं से संबंधित प्रावधानों को शामिल किया गया था:
- पात्र प्रवर्तक (प्रमोटर्स)
- कंपनी संरचना
- न्यूनतम पूँजी अपेक्षा और एचओएचसी द्वारा धारिता
- बैंक में विदेशी शेयर धारिता
- कंपनी अभिशासन
- कारोबार मॉडल
- अन्य शर्तें
- गैर-वित्तीय कारोबार से 40 प्रतिशत या उससे अधिक की आस्ति/आय वाले प्रवर्तक (प्रमोटर्स) समूहों के संबंध में अतिरिक्त छूट
भारतीय रिज़र्व बैंक दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देते समय इन सुझावों/अभिमतों पर अवश्य विचार करेगा।
जे.डी.देसाई
सहायक प्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी : 2012-2013/47
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