27 मई 2024
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि ग्रेटर बॉम्बे को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 22 मई 2024 के आदेश द्वारा दि ग्रेटर बॉम्बे को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई (बैंक) पर 'भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 'जमा खातों का रखरखाव - प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों' संबंधी निदेशों के अननुपालन के लिए ₹25.00 लाख (रुपये पच्चीस लाख मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धाराओं 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1) (सी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2022 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक का पर्यवेक्षी मूल्यांकन हेतु सांविधिक निरीक्षण किया गया। भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और इससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने अन्य बातों के साथ-साथ पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाना आवश्यक है। बैंक ने न्यूनतम शेष राशि न बनाए रखने के लिए बैंक बचत जमा खातों से, खाता खोलने के समय तय की गई न्यूनतम शेष राशि और वास्तविक शेष राशि के बीच के अंतर की सीमा के सीधे अनुपात में प्रभार के बजाय एकसमान दर पर प्रभार लगाया और वसूल किया।
यह कार्रवाई विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(पुनीत पंचोली)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2024-2025/382 |