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बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – अप्रैल 2026

29 मई 2026

बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – अप्रैल 2026

वर्ष 2026 के अप्रैल माह के लिए 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से जुटाए गए बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन संबंधी आंकड़े, जो सभी एससीबी1 के कुल खाद्येतर ऋण का लगभग 95 प्रतिशत होता है, विवरण I और II में दिए गए हैं।

वर्ष-दर-वर्ष (व-द-व) आधार पर, खाद्येतर बैंक ऋण2 30 अप्रैल 2026 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार 15.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि यह पिछले वर्ष (अर्थात, 02 मई 2025) के इसी पखवाड़े में 9.8 प्रतिशत था।

30 अप्रैल 2026 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • कृषि और संबद्ध कार्यकलापों हेतु प्रदत्त ऋण में 13.7 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 9.2 प्रतिशत थी।

  • उद्योग क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में 15.1 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 7.0 प्रतिशत थी)। जहां ‘सूक्ष्म और लघु’ तथा ‘वृहत’ उद्योगों को प्रदत्त ऋण में तेजी से वृद्धि हुई, वहीं ‘मध्यम’ उद्योगों ने वर्ष-दर-वर्ष आधार पर स्थिर वृद्धि रही। प्रमुख उद्योगों में, ‘आधारभूत संरचना’, 'मूल धातु और धातु उत्पाद', ‘सभी अभियांत्रिकी’, ‘पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन’ तथा ‘रसायन और रासायनिक उत्‍पाद’ को बकाया ऋण में उच्च वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि पाई गई। तथापि, ‘निर्माण’, ‘कपड़ा’ और ‘रबड़, प्लास्टिक एवं उनके उत्पाद’ क्षेत्रों में ऋण वृद्धि थोड़ी धीमी रही।

  • सेवा क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 18.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 10.1 प्रतिशत थी) जिसे ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (एनबीएफसी), ‘वाणिज्यिक स्थावर संपदा’, ‘व्यापार’ और ‘पेशेवर सेवाओं’ जैसे क्षेत्रों में हुई मजबूत वृद्धि का समर्थन मिला।

  • वैयक्तिक ऋण क्षेत्र हेतु प्रदत्त ऋण में 16.0 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह एक वर्ष पहले 11.9 प्रतिशत थी। जहां ‘वाहन ऋण’ और ‘आवास’ जैसे क्षेत्रों में ऋण वृद्धि मजबूत बनी रही, वहीं ‘क्रेडिट कार्ड बकाया’ क्षेत्र में थोड़ी नर्मी आई।

अजीत प्रसाद    
उप महाप्रबंधक (संचार)

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/348


1 आंकड़े महीने के अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े से संबंधित हैं, जो क्षेत्रवार और उद्योग-वार बैंक ऋण (एसआईबीसी) रिटर्न पर आधारित हैं। 31 दिसंबर 2025 से, बैंकिंग विधि (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा को बदलकर महीने का अंतिम दिन कर दिया गया है। तदनुसार, दिसंबर 2025 से वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दरें चालू वर्ष के लिए महीने के अंत के आंकड़ों और पिछले वर्ष के इसी महीने के लिए अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े (पुरानी परिभाषा के अनुसार) के आंकड़ों पर आधारित हैं।

2 खाद्येतर ऋण संबंधी आंकड़े धारा-42 रिटर्न पर आधारित हैं, जिसमें सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी) शामिल हैं।


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