हमारा परिचय

विभाग

उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग
कॉर्पोरेट कार्यनीति और बजट विभाग
बैंकिंग विनियमन विभाग
बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग
संचार विभाग
सहकारी बैंक विनियमन विभाग
सहकारी बैंक पर्यवेक्षण विभाग
कॉर्पोरेट सेवा विभाग
मुद्रा प्रबंध विभाग
आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग
बाह्य निवेश और परिचालन विभाग
सरकारी और बैंक लेखा विभाग
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
गैर-बैंकिंग विनियमन विभाग
गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग
भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग
सांख्यिकी और सूचना प्रबंध विभाग
प्रवर्तन विभाग
वित्तीय समावेशन और विकास विभाग
वित्तीय बाजार परिचालन विभाग
वित्तीय बाजार विनियमन विभाग
वित्तीय स्थिरता ईकाई
विदेशी मुद्रा विभाग
मानव संसाधन प्रबंध विभाग
निरीक्षण विभाग
आंतरिक ऋण प्रबंध विभाग
अंतरराष्ट्रीय विभाग
विधि विभाग
मौद्रिक नीति विभाग
परिसर विभाग
राजभाषा विभाग
जोखिम निगरानी विभाग
सचिव विभाग
केंद्रीय सतर्कता कक्ष

कार्यपालकों की सूची

गवर्नर टेलीफोन फैक्स नं.
श्री शक्तिकान्त दास
गवर्नर
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
18वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22661872 22661784

उप गवर्नर टेलीफोन फैक्स नं.
श्री एन.एस. विश्वनाथन
उप गवर्नर
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
19वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22621382 22679095
डॉ. विरल वी. आचार्य
उप गवर्नर
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
19वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22610990 22675831
श्री बी. पी. कानुनगो
उप गवर्नर
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
19वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22624090 22675094
श्री एम.के. जैन
उप गवर्नर
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
19वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22611097 22675277

कार्यपालक निदेशक टेलीफोन फैक्स नं.
डॉ. दीपक मोहंती
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
17वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22633146 22633145
डॉ. एम.डी. पात्र
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22610405 22651685
श्री एम.राजेश्वर राव
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
16वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22704222 22704221
श्रीमती सुरेखा मरांडी
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
17वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22611083 22632052
श्रीमती मालविका सिन्हा
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
17वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22611080 22660797
श्री एस. गणेश कुमार
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
17वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22611089 22675794
श्रीमती उमा शंकर
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
17वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22700932 22700933
श्रीमती रोज़मेरी सेबास्टियन
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22630699 22659610
श्रीमती पार्वती सुंदरम
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22676743  
श्री ई.ई.कर्थक
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
   
श्रीमती लिलि वडेरा
कार्यपालक निदेशक,
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
   
श्रीमती सुधा बालकृष्णन
मुख्य वित्तीय अधिकारी
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन
17वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22611952  

विभाग टेलीफोन फैक्स नं.
श्री डम्बरुधर सेठी
मुख्य महाप्रबंधक
उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
पहली मंजिल, अमर भवन
सर पी.एम. रोड,
मुंबई-400 001
22630483 22630482
श्रीमती साधना वर्मा
मुख्य महाप्रबंधक
कॉर्पोरेट कार्यनीति और बजट विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
मुख्य भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610468 22610535
श्री सौरव सिन्हा
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
बैंकिंग विनियमन विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
12वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22701223 22705691
श्री आर. सुब्रमणियन
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्र I, विश्व व्यापार केंद्र,
मुंबई-400 005
22182528 22180157
श्री योगेश दयाल
मुख्य महाप्रबंधक
संचार विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
12वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई-400 001
22660502  
श्री नीरज निगम
मुख्य महाप्रबंधक
सहकारी बैंक विनियमन विभाग
केंद्रीय कार्यालय
सी-7, पहली और दूसरी मंजिल
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई – 400 051
26571112 26571117
श्री आर. एल. शर्मा
मुख्य महाप्रबंधक
सहकारी बैंक पर्यवेक्षण विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक,
केंद्रीय कार्यालय, सी-9, पहली मंजिल,
बांद्रा-कुर्ला काम्प्लेक्स, बांद्रा (पूर्व)
मुंबई – 400 051
26578300 26570114
श्री पी.विजय कुमार
मुख्य महाप्रबंधक
कॉर्पोरेट सेवा विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
21 मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610473 22694485
श्री अजय मिच्यारी
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
मुद्रा प्रबंध विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
चौथी मंजिल, अमर भवन
सर पी. एम. रोड,
मुंबई-400 001
22610900 22670570
डॉ. राजीव रंजन
परामर्शदाता और प्रभारी अधिकारी
आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
7वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610761 22630061
श्रीमती उषा जानकीरामन
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
बाह्य विवेश और परिचालन विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
22वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22631045 22664667
श्री निर्मल चंद
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
सरकारी और बैंक लेखा विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के सामने
मुंबई 400 008
23016214 23008764
श्री दीपक कुमार
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
14वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत,
मुंबई-400 001.
22624856 22691557
श्री मनोरंजन मिश्रा
मुख्य महाप्रबंधक
गैर-बैंकिंग विनियमन विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्र I, विश्व व्यापार केंद्र,
मुंबई-400 005
22161940 22150540
श्री अशोक नारायण
मुख्य महाप्रबंधक
गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग
केंद्रीय कार्यालय,
केंद्र I, विश्व व्यापार केंद्र,
मुंबई-400 005
22153350 22162768
श्री पी.वासुदेवन
मुख्य महाप्रबंधक
भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
14वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22644995 22691557,
22659566

सांख्यिकी और सूचना प्रबंध विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
सी-8/9, बान्द्रा-कुर्ला कांप्लेक्स,
बान्द्रा,
मुंबई-400 051
26571253 26572319
श्री अनिल कुमार शर्मा
मुख्य महाप्रबंधक
प्रवर्तन विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
मेजेनाइन तल, मुख्य भवन,
फोर्ट, मुंबई
22650213 22660697
श्री गौतम प्रसाद बोरा
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
वित्तीय समावेशन और विकास विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
10वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610261 22610943
आर. एस. राठो
मुख्य महाप्रबंधक
वित्तीय बाजार परिचालन विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय
पहली मंजि़ल, मुख्य भवन शहीद भगत सिंह मार्ग
फोर्ट, मुंबई -400 001
22610642 22630981
श्री टी. रबि शंकर
मुख्य महाप्रबंधक
वित्तीय बाजार विनियमन विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
पहिली मंजिल, मुख्य भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22611765 22702290
श्री आर. गुरुमूर्ति
मुख्य महाप्रबंधक
वित्तीय स्थिरता ईकाई
भारतीय रिज़र्व बैंक
दूसरी और तीसरी मंजिल, अमर भवन,
सर पी.एम. रोड,
मुंबई-400 001
22612214 22612853
श्री अजय कुमार मिश्र
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
विदेशी मुद्रा विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
11वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001.
22610628 22610623
श्री ए. के. षडंगी
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
मानव संसाधन प्रबंध विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
20वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22611954 22658934
श्रीमती नंदा एस.दवे
मुख्य महाप्रबंधक
निरीक्षण विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
सी-7, बान्द्रा-कुर्ला कांप्लेक्स
बान्द्रा
मुंबई-400 051
26572308 26570399
श्री टि. के. राजन
मुख्य महाप्रबंधक
आंतरिक ऋण प्रबंध विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
23वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610671 22644158
डॉ. मृदुल सागर
परामर्शदाता
अंतरराष्ट्रीय विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
7वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610824 22702989
सुश्री मोना आनन्द
प्रधान विधि परामर्शदाता
विधि विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
5वीं मंजिल, केंद्र I, विश्व व्यापार केंद्र,
मुंबई-400 005
22153447 22153470
डॉ. जनक राज
प्रधान परामर्शदाता
मौद्रिक नीति विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
24वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22610285 22700849,
22610430
श्री एम. एम. माझी
प्रभारी मुख्य महाप्रबन्धक
परिसर विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
5वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001.
22703072 22626698,
22660807
श्री काज़ी मुहम्मद ईसा
महाप्रबंधक
राजभाषा विभाग,
भारतीय रिज़र्व बैंक
सी-9, आठवीं मंज़िल
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स
मुंबई-400 051.
26572801 26572812
डॉ. रबि एन. मिश्र
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक
जोखिम निगरानी विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
भू-तल, गारमेंट हाउस
वरली, मुंबई - 400 018
22618411 22618413
श्री सुशोभन सिन्‍हा
मुख्य महाप्रबंधक और सचिव
सचिव विभाग
भारतीय रिज़र्व बैंक
16वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन,
शहीद भगत सिंह मार्ग,
मुंबई-400 001
22704191 22612289
श्री ए. के. षडंगी
मुख्‍य सतर्कता अधिकारी
केंद्रीय सतर्कता कक्ष
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन, 20वीं मंजिल
शहीद भगत सिंह मार्ग
मुंबई 400001
22611954 22658934

उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग

नवंबर 2014 में ग्राहक सेवा विभाग का नाम उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग (उशिसंवि) कर दिया गया। यह विभाग भारतीय रिज़र्व बैंक और रिज़र्व बैंक द्वारा नियामित संस्थाओं से दी जानेवाली सेवाओं की कमियों पर प्राप्त सभी बाहरी शिकायतों का निवारण हेतु ‘एकल नोडल बिंदु’ के रूप में कार्य करता है। शिकायत निवारण के अलावा रिज़र्व बैंक के नियामक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत वित्तीय सेवा प्रदाताओं पर नैतिक व्यवहार को लागू करने के लिए नोडल विभाग के रूप में भी उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग कार्यरत है। यह विभाग बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के बारे में उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करने तथा जनता को शिक्षित करने का कार्य भी करेगा।

मुख्य कार्य:

  1. बैंकों तथा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ग्राहक सेवा और शिकायत निवारण संबंधी अनुदेशों/ सूचना का प्रसार करना।

  2. रिज़र्व बैंक के विभिन्‍न कार्यालयों/ विभागों द्वारा दी गई सेवाओं से संबंधित शिकायत निवारण प्रणाली पर निगरानी रखना।

  3. बैकिंग लोकपाल योजना (बीओएस) का प्रशासन करना।

  4. भारतीय बैकिंग कोड़ एवं मानक बोर्ड (बीसीएसबीआई) के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करना।

  5. बैंकों में ग्राहक सेवा से संबंधित कमियों के बारे में सीधे रूप से और भारत सरकार के सीपीग्रामस- CPGRAMS पोर्टल- द्वारा प्राप्त शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करना।

  6. ग्राहक सेवा तथा शिकायत निवारण से संबद्ध मामलों के बारे में बैंकों, भारतीय बैंक संघ, बीसीएसबीआई, बैंकिंग लोकपाल तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के नियामक विभागों के बीच संपर्क बनाए रखना और इस संबंध में रिज़र्व बैंक के विनियामक विभागों, आईबीए और बीसीएसबीआई को नीतिगत सहयोग देना।

बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 का वार्षिक रिपोर्ट को संकलित करना और प्रकशित करना।

कार्पोरेट कार्यनीति और बजट विभाग (सीएसबीडी)

कार्य:

  • बैंक का बजट बनाना और उसकी निगरानी, व्यय नियम

  • कॉर्पोरेट कार्यनीति - कार्यान्वयन की निगरानी

  • कारोबार निरंतरता नीति बनाना और बैंक में बीसीएम कार्यान्वित करना

  • अधिवर्षिता निधियों का प्रबंध, देयताओं का वार्षिक आधार पर वास्तविक मूल्यांकन

  • (i) कार्यालय और विभाग खोलने से संबंधित कार्य और
    (ii) बैंक द्वारा वित्तपोषित संस्थाओं से संबंधित कार्य

बैंकिंग विनियमन विभाग

बैंकिंग विनियमन विभाग बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1975 और अन्य संबंधित संविधियों में निहित प्रावधानों के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों (एलएबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के संबंध में विनियामक शक्तियों का प्रयोग करता है।

  • खास तौर पर, इसके कार्यों में शामिल है-

  • लाइसेंसिंग, शाखा विस्तार और सांविधिक आरक्षित निधियों का रखरखाव, बैंकिंग कंपनियों के परिचालन, समामेलन, पुनर्निर्माण और परिसमापन के तरीके और प्रबंधन।

  • एक्जिम बैंक, भारतीय औद्योगिक निवेश बैंक (आईआईबीआई), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) जैसी खास अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं की विनियामक निगरानी तथा प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी अधिनियम, 2005 का संचालन तथा साख सूचना कंपनियों का विनियमन।

  • वाणिज्यिक बैंकों द्वारा सहायक कंपनियों की स्थापना तथा नई गतिविधियों की शुरुआत हेतु अनुमोदन, साथ ही वित्तीय संस्थाओं (एफआई) संबंधी विनियमाक कार्य,

  • वाणिज्यिक बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के विवेकपूर्ण विनियमन मानकों के निर्धारण द्वारा एक सुदृढ़, बहुआयामी और प्रतिस्पर्धी वित्तीय तंत्र का विकास और इसको कार्यरूप देना।

  • नए उत्पादों के विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना।

  • अपने आप को देशी और वैश्विक गतिविधियों के प्रति अवगत रखते हुए नीतिगत प्रतिसाद तैयार करना जिसमें विद्यमान विधियों में संशोधन हेतु सुझाव/नए विधान, विनियमनों आदि को लागू करना शामिल है।

  • वाणिज्यिक बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के लिए विनियमाक मानकों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के समकक्ष लाने के लिए प्रयासरत रहना।

सहकारी बैंक पर्यवेक्षण विभाग (डीसीबीएस)

सहकारी बैंक पर्यवेक्षण विभाग को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 और भारतीय रिज़़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों तथा रिज़र्व बैंक के निर्धारित दिशानिर्देशों के अंतर्गत शहरी सहकारी बैंकों का पर्यवेक्षण किए जाने का कार्य सौंपा गया है। दिनांक 1 मार्च 1966 से शहरी सहकारी बैंकों को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के अंतर्गत लाया गया क्‍योंकि वित्‍तीय प्रणाली में सहकारिता की बढ़ती मौजूदगी के कारण बेहतर निगरानी की आवश्‍यकता महसूस की गई। चूंकि सहकारिता राज्‍य सरकार का अधिदेश है, सहकारी सोसाइटियों के केंद्रीय रजिस्‍ट्रार (सीआरसीएस) / सहकारी सोसाइटियों के रजिस्‍ट्रार (आरसीएस) भी शहरी सहकारी बैंक को विनियमित करते हैं। शहरी सहकारी बैंकों से संबं‍धित पंजीकरण, प्रबंधन, प्रशासन, वसूली, लेखापरीक्षा, निदेशक मंडल का अधिग्रहण और परिसमापन जैसे कार्य राज्‍य / केंद्र सरकार के क्रमश: आरसीएस/सीआरसीएस के द्वारा किया जाता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक पूंजी पर्याप्‍तता, आय निर्धारण, परिसंपत्ति वर्गीकरण और प्रावधानीकरण, ऋण तथा अग्रिम, निवेश और चलनिधि अपेक्षाओं के लिए विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित करता है। साथ ही, शहरी सहकारी बैंकों को एकल/समूह एक्‍सपोज़र और क्षेत्रीय एक्‍सपोज़र के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। शहरी सहकारी बैंकों को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथालागू) के प्रावधानों के अंतर्गत इन बैंकों को उक्‍त निदेशों का अनुपालन करना होगा।

क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्‍यम से ऑन-साइट और ऑफ-साइट पर्यवेक्षण का कार्य मोटे तौर पर सहकारी बैंक पर्यवेक्षण विभाग (डीसीबीएस) को सौंपा गया है। शहरी सहकारी बैंकों को रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों / निदेशों का अनुपालन किया जाना है, जिसकी निगरानी डीसीबीएस विभाग द्वारा की जाती है। बैंककारी विनियमन अधि‍नियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथालागू) की धारा 35 के अंतर्गत निरीक्षण के माध्‍यम से ऑन-साइट पर्यवेक्षण का कार्य किया जाता है। निरीक्षण किए गए प्रत्‍येक बैंकों की एक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जाती है और रिपोर्ट के निष्‍कर्ष के आधार पर बैंकों से अनुपालन मांगा जाता है ताकि उल्‍लंघन/अनियमितता पाई जाने की स्थिति में उसे ठीक किया जा सके। निरीक्षणों के निष्‍कर्षों को विभन्‍न समितियां / बोर्ड जैसे केंद्र स्‍तर पर वित्‍तीय पर्यवेक्षण बोर्ड(बीएफएस) और स्‍थानीय स्‍तर पर शहरी सहकारी बैंकों का फेडरेशन (एनएएफसीयूबी) के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाता है।

शहरी सहकारी बैंक, ऑफ साइट सर्वेलाइन्‍स प्रणाली नामक एक विशिष्‍ट साफ्टवेर पैकेज के माध्‍यम से भारतीय रिज़र्व बैंक को कतिपय विवरणियां भेजते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक, इन विवरणियों की सहायता से बैंकों की वित्तीय स्थिति की परोक्ष रूप से निगरानी करता है।

शहरी सहकारी बैंकों की वित्‍तीय स्थिति के वर्तमान मूल्‍यांकन के आधार पर विभाग द्वारा पर्यवेक्षी कार्रवाई की जाती है और आवश्‍यकता पड़ने पर व्‍यक्तिश: शहरी सहकारी बैंक को पर्यवेक्षी कार्रवाई ढा़ंचे के अंतर्गत प्रस्‍तावित विशिष्‍ट कार्रवाई की जाने की सूचना दी जाती है और वित्‍तीय स्थिति को सुधाराने हेतु आवश्‍यक कदम लेने के लिए सूचित किया जाता है।

शहरी सहकारी बैंकों के कार्यसंचालन को सही दिशा प्रदान करने और जमाकर्ताओं के हित के संरक्षण करने की दृष्टि से जहां भी आवश्‍यक है भारतीय रिज़र्व बैंक इन बैंकों को निदेश और परिचालनात्‍मक अनुदेश जारी करते हैं। बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 47 के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को इन बैंकों पर दंड लगाने की शक्तियां प्रदान की गई हैं।

पर्यवेक्षी कार्रवाई के अलावा इस विभाग द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के अन्‍य विभागों के साथ समन्‍वयन करके विभिन्‍न सुविधाएं जैसे रिज़र्व बैंक से एडी वर्ग । लाइसेंस प्राप्‍त करके विदेशी विनिमय कारोबार करना, मोबाइल बैंकिंग सुविधा, इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा, मुद्रा तिजोरी खोलना आदि प्रदान करने की मांग करते हुए प्राप्‍त आवेदनों पर कार्रवाई / विचार किया जाता है।

व्‍य‍वहार्य शहरी सहकारी बैंकों की पहचान कर समय बद्ध कार्य योजना तैयार करने और अव्‍यवहार्य शहरी सहकारी बैंकों के निर्बाध रूप से निकासन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्‍य से प्रत्‍येक राज्‍य / संघ क्षेत्र में शहरी सहकारी बैंकों के लिए कार्यबल (टाफकब) की स्‍थापना करने के लिए रिज़र्व बैंक ने राज्‍य सरकार, संघ शासित क्षेत्र और केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन भी किया है।

रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय सहकारी बैंकों के स्‍टाफ सदस्‍यों के कौशल वद्धि की निगरानी के लिए केंद्र बिंदु के रूप में कार्य करते हैं और उनके प्रशिक्षण कार्यकम को बेहतरीन बनाते हैं और देश की बैंकिंग-प्रणाली में इन बैंकों को संबद्ध और एकीकृत करने में सहायता प्रदान करते हैं।

संचार विभाग

संचार विभाग की उत्पत्ति काफी समय पहले साठ के दशक में तत्कालीन अर्थशास्त्र विभाग में प्रकाशन और प्रेस संपर्क प्रभाग में खोजी जा सकती है। रिज़र्व बैंक और इसकी संबद्ध संस्थाओं के व्यापक कार्यों तथा प्रभावी प्रचार और जन संपर्क की आवश्यकता को देखते हुए सत्तर के दशक में प्रेस संपर्क अधिकारी के कार्यालय को संपूर्ण प्रेस संपर्क अनुभाग में परिवर्तित किया गया। इस प्रभाग को मार्च 2007 में संपूर्ण विभाग का दर्जा दिया गया और इसका नाम संचार विभाग (डीओसी) रखा गया।

संचार नीति

वर्ष 2008 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने पहली बार अपनी संचार नीति को विस्तार से बताया और इसे रिज़र्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल के अनुमोदन से भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर डाला गया।

प्रचार-प्रसार

रिज़र्व बैंक के विभिन्न प्रकाशन रिज़र्व बैंक की प्रचार-प्रसार नीति के मुख्य आधार हैं। प्रकाशनों के अलावा, गवर्नर और उप गवर्नरों के भाषण नीतिगत निर्णयों के तर्क और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराते हैं। मीडिया और रिज़र्व बैंक के बीच संचार का अनौपचारिक चैनल खुला रखने के लिए प्रत्येक दो महीनों में वित्तीय संपादकों के साथ अनौपचारिक चर्चाएं भी आयोजित की जाती हैं।

रिज़र्व बैंक के अंदर सूचना का प्रचार-प्रसार केंद्रीकृत है। संचार विभाग द्वारा सूचना के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयोग किए जाने वाले संचार के वर्तमान चैनल निम्नलिखित हैं:

  1. प्रेस प्रकाशनियां, रिपोर्टों और प्रकाशनों के प्रेस सारांश, गवर्नर/उप गवर्नरों के भाषण और प्रत्युत्तर;
  2. प्रेस कान्फ्रेंस, आर्थिक संपादकों की कान्फ्रेंस और मीडिया ब्रीफिंग;
  3. रिज़र्व बैंक के अधिकारियों के साथ मीडिया कर्मियों की बैठकें/साक्षात्कार;
  4. ई-मेल;
  5. मीडिया के लिए शिक्षण सत्र
  6. विवरणिका/पम्फलेट;
  7. वेबसाइट;
  8. विज्ञापन;
  9. आवधिक प्रकाशन

प्रतिसूचना (फीडबैक)

360 डिग्री संचार प्रक्रिया के रूप में रिज़र्व बैंक अपनी वेबसाइट के माध्यम से विनियमों पर स्टेकधारकों से सक्रिय रूप से प्रतिसूचनाओं की मांग करता है। संचार विभाग समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और समाचार एजेंसियों तथा टेलीविज़न में आने वाली रिपोर्टों पर भी निगरानी रखता है और राष्ट्रीय मीडिया में आने वाली महत्वपूर्ण समाचार मदों का दैनिक समाचार सारांश तैयार करता है।

सहकारी बैंक विनियमन विभाग

सहकारी बैंक विनियमन विभाग (डीसीबीआर), राज्‍य सहकारी बैंकों, जिला सहकारी बैंकों और प्राथमिक सहकारी बैंकों जो शहरी सहकारी बैंकों के नाम से जाने जाते हैं, का विनियमन करता है।

शहरी सहकारी बैंकों को प्रमुखत: या तो राज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत सहकारी सोसाइटियों के रूप में पंजीकृत किया जाता है या बहु राज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत। राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों, जो अल्‍पावधि सहकारी क्रेडिट संरचना के अंग हैं, को संबंधित राज्‍य के राज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत पंजीकृत किया जाता है। 1 मार्च 1966 से सहकारी सोसाइटियों पर बैंकिंग विधि लागू हुई। और तब से सहकारी समितियों के रजिस्‍ट्रार (आरसीएस) / केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्‍ट्रार (सीआरसीएस) और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों / शहरी सहकारी बैंकों का दुहरा नियंत्रण किया जा रहा है।

रिज़र्व बैंक एसटीसीबी/ डीसीसीबी/ यूसीबी की बैंकिंग गतिविधियों को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथालागू) की धारा 22 व 23 के प्रावधानों के अंतर्गत विनियमन करता है। जबकि इन बैंकों के निगमन, पंजीकरण , प्रबंधन, वसूली, लेखापरीक्षा, निदेशक मंडल का अधिक्रमण तथा परिसमापन जैसे कार्य आरसीएस/ सीआरसीएस के दायरे में आते हैं। सहकारी बैंक विनियमन विभाग अन्‍य विनियामकों जैसे सहकारी समितियों के रजिस्‍ट्रार, और केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्‍ट्रार के साथ समन्‍वय स्‍थापित करके कार्य करता है। यह विभाग विनियामकीय कार्यों के अतिरिक्‍त एसटीसीबी/ डीसीसीबी/ यूसीबी बैंकों के लिए विकासात्‍मक कार्य भी करता है।

कार्य:

  • शहरी सहकारी बैंकों / राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों को बैंकिंग कारोबार करने हेतु लाइसेंस देना;

  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की द्वितीय अनुसूची में शहरी सहकारी बैंकों/ राज्‍य सहकारी बैंकों को शामिल किए जाने हेतु अनुमोदन प्रदान करना;

  • शहरी सहकारी बैंकों / राज्‍य सहकारी बैंकों को शाखा खोलने हेतु प्राधिकार प्रदान करना। बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथालागू) की धारा 23 1 (बी) के अनुसार जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों के लिए शाखाएं खोलने / कारोबार स्‍थल के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक से लाइसेंस प्राप्‍त करने से छूट दी गई है;

  • शहरी सहकारी बैंकों के परिचालन क्षेत्र में विस्‍तार करने के लिए अनुमति प्रदान करना;

  • शहरी सहकारी बैंकों / राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों के सुचारू कार्य संचालन के लिहाज़ से विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित करना;

  • शहरी सहकारी बैंकों/ राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों के कार्य संचालन को सही दिशा प्रदान करने तथा जमाकर्ताओं के हित के संरक्षण हेतु आवश्‍यकतानुसार निदेश एवं परिचालनगत अनुदेश जारी करना;

  • बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (सहकारी समितियों पर यथालागू) की धारा 47 के अंतर्गत दंड लगाना;

  • शहरी सहकारी बैंकों/ राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों के लिए विभिन्‍न आवधिक विवरणियां निर्धारित करना;

  • निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करने पर शहरी सहकारी बैंकों/ राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों का लाइसेंस रद्द करना;

  • विभागीय कार्यकलापों के अंग के रूप में शहरी सहकारी बैंकों/ राज्‍य सहकारी बैंकों / जिला मध्‍यवर्ती सहकारी बैंकों के लिए ज्ञानवर्धन, कौशल वृद्धि और विशेषज्ञता प्राप्‍त करने के लिए उक्‍त बैंकों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिलाना;

भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनियमन और पर्यवेक्षण में सामंजस्‍य स्‍था‍पित करने की दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्‍न राज्‍य सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

कॉर्पोरेट सेवा विभाग (डीसीएस)

नवंबर 2014 में किए गए संस्थागत पुनर्गठन के भाग के रूप में सृजित किए गए कॉर्पोरेट सेवा विभाग कतिपय आंतरिक कॉर्पोरेट सेवाओं में सहयोग करने और उनकी सुपुर्दगी की सुविधा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगा ताकि विशेषीकृत विभाग अपने मुख्य कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इस प्रकार यह निम्नलिखित को देखेगा:
  • शीर्ष प्रबंध तंत्र के लिए शिष्टाचार सेवाएं।

  • कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, बैठकों के प्रबंध में सहयोग देना और आगंतुक पदाधिकारियों का आतिथ्य सत्कार करना।

  • संविदा प्रदान करने/ प्रकाशनों के मुद्रण, मूल्यनिर्धारण, बिक्री और वितरण के लिए निविदा प्रस्तुत करने तथा विभिन्न लेखन सामग्री मदों, कूरियर सेवाओं आदि के केंद्रीकृत खरीद/व्यवस्था के लिए दिशानिर्देश बनाने जैसी अन्य सेवाएं प्रदान करना।

  • रिज़र्व बैंक के इलेक्ट्रॉनिक प्रलेखन प्रबंध प्रणाली के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, मानव संसाधन प्रबंध विभाग और अन्य प्रयोक्ता विभागों के साथ सहयोग जिसमें प्रलेखों के संरक्षण हेतु दिशानिर्देश शामिल हैं।

आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग

  • आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग समष्टि आर्थिक मुद्दों विशेषकर मौद्रिक नीति, वित्तीय बाजारों, समष्टि आर्थिक चरों के पूर्वानुमान, वित्तीय स्थिरता और बाह्य क्षेत्र के प्रबंध के क्षेत्रों में संरचित अनुसंधान एजेंडा के तहत नीति सहायक अनुसंधान कार्य करता है।

  • मौद्रिक समग्र स्थिति, भुगतान संतुलन औ बाह्य ऋण, निधियों के प्रवाह, वित्तीय बचत और राज्यों के वित्त पर प्रारंभिक सांख्यिकी इस विभाग में संकलित की जाती है जिसका रिज़र्व बैंक द्वारा मुद्रण और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाता है।

  • रिज़र्व बैंक की सांविधिक वार्षिक रिपोर्ट के प्रकाशन का उत्तरदायित्व इस विभाग का है। रिज़र्व बैंक का इतिहास भी इसी विभाग द्वारा प्रकाशित किया जाता है। विभाग द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले रिज़र्व बैंक के अन्य प्रकाशनों में शामिल हैं – राज्य वित्तः राज्य सरकारों के बजटों का अध्ययन, भारतीय रिज़र्व बैंक मासिक बुलेटिन और साप्ताहिक सांख्यिकीय संपूरक।

  • यह विभाग अपनी अनुसंधान अध्यक्षता, फेलोशिप, अनुसंधान परियोजनाओं और अध्ययनों का प्रायोजन कर देश में अनुसंधान वातावरण को समर्थन और प्रोत्साहन देता है।

  • यह विभाग रिज़र्व बैंक के दो भूतपूर्व गवर्नरों – श्री सी.डी. देशमुख और श्री एल.के. झा की याद में दो व्याख्यान भी आयोजित करता है।

बाह्य निवेश और परिचालन विभाग

कार्य
  • विदेशी मुद्रा और भारतीय रिज़र्व बैंक की स्वर्ण आस्तियों का निवेश और प्रबंधन

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से संबंधित लेनदेन सहित भारत सरकार की तरफ से बाह्य लेनदेन का प्रबंध

  • एशियाई समाशोधन यूनियन में भारत की सदस्यता से संबंधित सभी नीति मामले और

  • स्वर्ण नीति, अंतर्राष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) की सदस्यता और भारत तथा रूस जैसे अन्य देशों के बीच द्विपक्षीय बैंकिंग व्यवस्था से संबंधित अन्य मामले, द्विपक्षीय और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) की मुद्रा स्वैप व्यवस्था

सरकारी और बैंक लेखा विभाग

सरकारी और बैंक लेखा विभाग (डीजीबीए) सरकार के बैंक और बैंकों के बैंक के रूप में कार्य करने का मुख्य केंद्रीय बैंकिंग कार्य करता है।

अधिक विशिष्ट रूप से यह निम्नलिखित कार्य करता हैः

  • केंद्रीय लेखा अनुभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, नागपुर में केंद्रीय और राज्य सरकारों के प्रधान जमा खातों का अनुरक्षण करता है

  • केंद्रीय और राज्य सरकारों को अर्थोपाय अग्रिम प्रदान करता है

  • एजेंसी बैंक शाखाओं (इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत) और क्षेत्रीय कार्यालयों में बैंकिंग विभागों के दैनिक कार्यों को पूरा करता है

  • रिज़र्व बैंक की लेखांकन नीति बनाता है

  • निर्गम और बैंकिंग विभागों के साप्ताहिक लेखा विवरणों और रिज़र्व बैंक के वार्षिक तुलन पत्र को अंतिम रूप देता है

  • एजेंसी बैंकों की नियुक्ति, उन्हें कमीशन देना और उनके सरकारी कारोबार की निगरानी करने जैसे सरकारी कारोबार से संबंधित मामलों को देखता है। इसमें से अधिकांश कार्य सरकार के परामर्श से किए जाते हैं

बैंकों के बैंक के रूप में अपनी क्षमता में रिज़र्व बैंक:

  • अपने पास बैंकों के चालू खाते खोलता है, उन्हें सांविधिक निर्धारित नकदी प्रारक्षित निधि अनुरक्षित करने और अंतर-बैंक लेनदेन करने के लिए समर्थ बनाता है

  • इन चालू खातों के माध्यम से अंतर-बैंक समाशोधन निपटान करता है

सरकारी और बैंक लेखा विभाग (डीजीबीए) क्षेत्रीय कार्यालयों में बैंकिंग विभागों के केंद्रीय कार्यालय के रूप में भी कार्य करता है।

गैर-बैंकिंग विनियमन विभाग (डीएनबीआर)

गैर बैंकिंग विनियमन विभाग (डीएनबीआर) द्वारा बंधक गारंटी कंपनी (एमजीसी) और प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण कंपनी (एससी/आरसी) सहित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के लिए विवेकपूर्ण मानदंड और कारोबार संहिता विनियम के साथ साथ उचित विनियमन बनाकर गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र को बढावा देने और सुदृढता प्रदान करने का कार्य किया जाता है।

कार्य:

ए. एनबीएफसी(एमजीसी सहित) तथा एससी/आरसी का विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए नीतियां बनाना,

बी. एनबीएफसी(एमजीसी सहित) तथा एससी/आरसी के लिए पंजीकरण प्रमाण पत्र (सीओआर) जारी करना तथा रद्द करना, यदि आवश्यता होती है तो,

सी. नीति तथा अन्य संबंधित मामलों में भारतीय रिज़र्व बैंक के अन्य विभागों, वित्तीय क्षेत्र के अन्य विनियामकों, उद्योग एंव केन्द्र और राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों (स्टेक होल्डर्स) के साथ परामर्श और सहयोग करना,

डी. एनबीएफसी से संबंधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 और वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एंव प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के प्रति प्रशासन की भूमिका रखना,

ई. चिट फंड अधिनियम, 1982, इनामी चिट और धन परिचालन योजना (पाबंदी) अधिनियम,1978 से संबंधित नियम बनाने के के कार्यों से संबंधित मुद्दों पर डीएनबीएस द्वारा राज्य सरकारों को आवश्कता अनुसार परामर्श प्रदान किया जाता है।

गैर बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग (डीएनबीएस)

गैर बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग (डीएनबीएस) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 का अध्याय IIIबी और सी तथा अध्याय V के तहत विनिर्दिष्ट प्रावधानों के अनुसार गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पर्यवेक्षण का दायित्व सौंपा गया है, विभाग का प्रमुख कार्य ए) जमाकर्ता सुरक्षा बी) ग्राहक सुरक्षा तथा सी) वित्तीय स्थिरता है। भारतीय रिज़र्व बैंक का पर्यवेक्षी संरचना परोक्ष निगरानी और प्रत्यक्ष निरीक्षण के माध्यम से चौकसी प्रदान करता है।

कार्य:

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एंव प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 तथा फैक्टरिंग अधिनियम, 2011 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
  2. प्रत्यक्ष निरीक्षण तथा परोक्ष निगरानी के माध्यम से विनियमित संस्थाओं का पर्यवेक्षण करना।
  3. संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों (आरओ) की सहायता से गैर बैंकिंग विनियमन विभाग (डीएनबीआर) द्वारा विनिर्दिष्ट नीतियों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
  4. राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) के लिए सचिवालय की भूमिका का निर्वाह करना तथा अप्राधिकृत गैर बैंकिंग वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रण करने के लिए एसएलसीसी पद्धति के माध्यम से विनियामकों के बीच समुचित समन्वय स्थापित करना।

सार्वजनिक जागरूकता, जमाकर्ता शिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना तथा व्यापार और उद्योग संस्थाओं के लिए कार्यशाला/संगोष्ठी (सेमिनार) आयोजित करना।

भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग

कार्य:

भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग भारतीय रिजर्व बैंक में एक पृथक विभाग के रूप में मार्च 2005 में अस्तित्व में आया।

विभाग के कार्यों में शामिल हैं:

  • भुगतान और निपटान प्रणाली के संबंध में नीति निर्माण
  • भुगतान और निपटान प्रणालियों / ऑपरेटरों का प्राधिकरण
  • भुगतान और निपटान प्रणालियों का विनियमन
  • भुगतान और निपटान प्रणाली का पर्यवेक्षण और निगरानी
  • भुगतान और निपटान प्रणाली के लिए मानकों का निर्धारण
  • राष्ट्रीय महत्व की भुगतान प्रणाली परियोजनाओं को डिजाइन करना, उनका विकास और एकीकारण करना और / अथवा इनके क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करना
  • अंतर्राष्ट्रीय निपटारों के लिए बैंक द्वारा प्रतिपादित भुगतान प्रणाली से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का कार्यान्वयन

विभाग के चार क्षेत्रीय कार्यालय चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली में हैं।

भुगतान और निपटान प्रणाली के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए बोर्ड

भुगतान और निपटान प्रणाली के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए बोर्ड (बीपीएसएस) ने सभी प्रकार की भुगतान और निपटान प्रणालियों के विनियमन और पर्यवेक्षण से संबंधित नीतियों का प्रावधान किया है। बीपीएसएस मौजूदा और साथ ही साथ भविष्य की भुगतान प्रणालियों के लिए मानकों की स्थापना, भुगतान और निपटान प्रणालियों / ऑपरेटरों को प्राधिकृत करने, इन प्रणालियों की सदस्यता के लिए मानदंड निर्धारित करने के साथ इनके जारी रहने, समाप्ति और सदस्यता को रद्द करने से संबन्धित विषयों पर मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। प्रत्येक तिमाही में बीपीएसएस की बैठक होती है।

  • भारत में भुगतान और निपटान प्रणालियां भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (पीएसएस अधिनियम) के अंतर्गत विनियमित हैं। पीएसएस अधिनियम और इस अधिनियम के अंतर्गत बनाई गई भुगतान और निपटान प्रणाली विनियमावली 2008 दिनांक 12 अगस्त 2008 से प्रभावी हुई। पीएसएस अधिनियम के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति भारत में भुगतान प्रणाली को आरंभ और परिचालित नहीं कर सकता है जब तक कि वह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत न किया गया हो।

  • भारत में भुगतान और निपटान प्रणाली में चेक आधारित समाशोधन प्रणालियाँ, इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ईसीएस) सूट, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) प्रणाली, डेबिट और क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हुए किए गए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, प्रीपेड भुगतान लिखत, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग इत्यादि शामिल हैं। जबकि, रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) वित्तीय बाजार की आधारभूत संरचना को बनाते हैं वहीं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) खुदरा भुगतानों के लिए एक छत्र संगठन है।

सांख्यिकी और सूचना प्रबंध विभाग

  • बैंकिंग, कॉर्पोरेट और बाह्य क्षेत्रों पर आंकड़ों का संग्रह, प्रोसेसिंग और विश्लेषण।

  • रिज़र्व बैंक के महत्व के क्षेत्र के लिए नियमित रूप से तीव्र प्रतिदर्श सर्वेक्षणों की आयोजना, डिज़ाइनिंग और आयोजन।

  • रिज़र्व बैंक के डेटा वेयरहाउस का अनुरक्षण और आंकड़ों/सूचना का प्रसार करना।

  • महत्वपूर्ण समष्टि आर्थिक संकेतकों की मॉडलिंग और पूर्वानुमान।

  • चर वस्तुओं के माप और अनुमान की पद्धति का विकास तथा समितियों, कार्य समूहों आदि में सहभागिता के माध्यम से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के डेटाबेस में सुधार करना।

  • विशिष्ट क्षेत्रों में सांख्यिकी विश्लेषण के संबंध में रिज़र्व बैंक के अन्य विभागों को तकनीकी सहायता प्रदान करना और रिज़र्व बैंक के महत्व के क्षेत्रों का अध्ययन करना।

वर्तमान ध्यानकेंद्रण
  • प्राप्ति, प्रोसेसिंग, उत्पादन, भंडारण और आंकड़ों की पुनःप्राप्ति के प्रौद्योगिकी आधारित केंद्रीकृत सूचना प्रबंध प्रणाली का निर्माण और डेटा वेयरहाउसिंग दृष्टिकोण के आधार पर इसकी प्रसार प्रणाली। यह प्रणाली निर्णय निर्माताओं, विश्लेषकों और अनुसंधानकर्ताओं को स्वच्छ और अनुरूप पुराने और वर्तमान आंकड़ों की केंद्रीय रिपोजिटरी की ऑनलाइन और तत्काल पहुंच उपलब्ध कराती है।

  • एक्सबीआरएल के अंतर्गत वित्तीय आंकड़ों की रिपोर्टिंग में मानकीकरण जिसे डेटा वेयरहाउस के साथ समेकित किया जा रहा है, और आने वाले समय में आवक आंकड़ों को प्राप्त करने और वैध करने के लिए एकमात्र मंच के रूप में परिकल्पना की गई है।

  • आंकड़ों की गुणवत्ता कायम रखने के लिए सांख्यिकीय प्रणाली विकसित करना।

  • रिज़र्व बैंक के आंकड़ों का प्रकाशन सीधे डेटा वेयरहाउस से करना।

  • समष्टि आर्थिक बदलावों और मौद्रिक नीति निर्माण की प्रत्याशाओं पर स्पष्ट सर्वेक्षण कराना। संगत संकेतकों जैसे आवास, नए स्नातकों के लिए रोजगार नियोजन आदि पर आंकड़ों का अंतर पूरा करने के लिए अन्य आवधिक सर्वेक्षण कराना।

  • अर्थव्यवस्था के निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र के वित्त से संबंधित अध्ययनों की कवरेज़ में सुधार करना।

  • समष्टि आर्थिक चर वस्तुओं और संबंधित अनुभवजन्य कार्य के पूर्वानुमान का सृजन जिसमें पूर्वानुमानों और नीति बनावट के लिए तिमाही समष्टि अर्थमितीय मॉडल विकसित करना शामिल है।

  • रिज़र्व बैंक के लिए संगत विभिन्न साख्यिकीय, अर्थमितीय और परिचालनात्मक अनुसंधान तकनीकों का उपयोग करते हुए विश्लेषणात्मक अध्ययन करना।

वित्तीय समावेशन और विकास विभाग

रिज़र्व बैंक की वित्तीय समावेशन और विकास भूमिका में ग्रामीण और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों सहित अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए नीतियां बनाने की परिकल्पना की गई है। वित्तीय शिक्षण और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना इस कार्य का वर्तमान ध्यानकेंद्रण बिन्दु है और यह वित्तीय समावेशन पर नवीकृत राष्ट्रीय ध्यानकेंद्रण को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। विभाग के कार्य इस प्रकार हैं:

  • प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों के लिए ऋण प्रवाह को मजबूती प्रदान करने के लिए समष्टि नीति बनाना

  • यह सुनिश्चित करना कि प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र उधार बैंकों के लिए समाज के वित्तीय रूप से छूटे हुए वर्गों के बीच अप्रयुक्त कारोबारी अवसर प्राप्त का साधन हो

  • प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) का विस्तार करना और इसे वित्तीय साक्षरता के माध्यम से संधारणीय और मापनीय वित्तीय समावेशन पहल बनाना

  • एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण प्रवाह को बढ़ाना और समयबद्ध ऋण सहायता के माध्यम से बीमारू इकाइयों का पुनर्वास करना

  • राज्य स्तरीय बैंकर समिति और अग्रणी बैंक योजना जैसी सांस्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाना जिससे कि इन उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके

वित्तीय बाजार परिचालन विभाग

नवंबर 2014 में वित्तीय बाजार विभाग से बनाए गए वित्तीय बाजार परिचालन विभाग (एफएमओडी) को रिज़र्व बैंक के मौद्रिक नीति उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए बाजार परिचालन का कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है। यह विभाग रिज़र्व बैंक की तरफ से मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाजार का कार्य करता है। इस दायित्व के भाग के रूप में एफएमओडी विभिन्न बाजार खंडों के विश्लेषण भी करता है और सूचित निर्णय निर्माण के लिए शीर्ष प्रबंध तंत्र को इनपुट उपलब्ध कराता है।

एफएमओडी के विशेष कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार परिचालन (स्पॉट, फारवर्ड और स्वैप)

  • अगस्त 2014 में संशोधित चलनिधि प्रबंध ढ़ांचे के अंतर्गत चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) परिचालन (रिपो, प्रत्यावर्तनीय रिपो, सीमांत स्थायी सुविधा) जिसमें खुला बाजार परिचालन (सीधी बिक्री/गिल्ट की खरीद)

  • विशिष्ट प्रयोजन हेतु विशेष बाजार परिचालन (एसएमओ)

  • रिज़र्व बैंक की रुपया संदर्भ दर का अभिकलन और प्रसार

  • सांकेतिक प्रभावी दर (एनईईआर) और वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) का अभिकलन

  • बाजार स्थिरता योजना (एमएसएस) के अंतर्गत दिनांकित प्रतिभूतियों का निर्गम और पुनर्खरीद

  • बाजार गतिविधियों का विश्लेषण

  • बाजारोन्मुखी अनुसंधान और विश्लेषण करना

  • बैंकिंग प्रणाली में चलनिधि आवश्यकता का अनुमान लगाना

  • रिज़र्व बैंक की वित्तीय बाजार समिति (एफएमसी) को सचिवीय सहायता प्रदान करना

  • शीघ्र चेतावनी समूहों (ईडब्ल्यूजी) जिसमें वित्तीय क्षेत्र के विनियामकों और वित्त मंत्रालय शामिल हैं, की बैठकों में सहयोग करना

इसके अतिरिक्त, एफएमओडी वित्तीय बाजार के विभिन्न खंडों, तत्काल सकल निपटान खातों के परिचालन के लिए अंतरा-दिवस सीमाओं का निर्धारण (आईडीएल) करता है और रिज़र्व बैंक के अन्य विभागों, अंतरराष्ट्रीय और अन्य विनियामक संगठनों से प्राप्त संदर्भ देखता है।

वित्तीय बाजार विनियमन विभाग

वित्तीय बाजार विनियमन विभाग (एफएमआरडी) की स्थापना वित्तीय बाजारों को नियंत्रित करने, विकसित करने और उनकी निगरानी करने के अधिदेश के साथ 3 नवंबर 2014 को की गई है। विभाग के प्रमुख कार्यकलापों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  • मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा बाजारों और संबंधित डेरिवेटिव बाजारों का विनियमन और विकास;

  • ब्याज दरों और विदेशी मुद्रा बाजारों के लिए वित्तीय बेंचमार्कों का विनियमन और पर्यवेक्षण;

  • मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा बाजारों और ओवर दि काउंटर (ओटीसी) डेरिवेटिव लेनदेन के लिए ट्रेड रिपोजिटरी सहित संबंधित डेरिवेटिव बाजारों के लिए वित्तीय बाजार मूलभूत सुविधा से संबंधित विकास कार्य;

  • मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा बाजारों और संबंधित डेरिवेटिव बाजारों की निगरानी/निरीक्षण; और

  • मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाजारों पर तकनीकी परामर्शदात्री समिति और ब्याज दर तथा करेंसी फ्यूचर्स पर आरबीआई-सेबी तकनीकी समिति के लिए सचिवीय सहायता।

इसके अतिरिक्त एफएमआरडी के एक भाग के रूप में बाजार आसूचना कक्ष स्थापित करना प्रस्तावित है।

वित्तीय स्थिरता ईकाई

वित्तीय संकट का समाधान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पहलों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना के सुदृढ़ीकरण को ध्यान में रखते हुए वित्तीय स्थिरता इकाई (एफएसयू) जुलाई 2009 में स्थापित की गई। एफएसयू के मुख्य कार्य निम्नानुसार हैं:

  • सतत आधार पर वित्तीय प्रणाली की समष्टि-आर्थिक निगरानी करना

  • वित्तीय स्थिरता रिपोर्टें तैयार करना

  • मुख्य वित्तीय संकेतकों की समय-श्रृंखलाओं का विकास

  • आघात सहनीयता का आकलन करने के लिए प्रणालीगत दबाव परीक्षण कराना और

  • वित्तीय स्थिरता का आकलन करने के लिए मॉडलों का विकास

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) के गठन के बाद, एफएसयू एफएसडीसी की उप-समिति को सचिवालय उपलब्ध कराती है, एफएसडीसी की अध्यक्षता गवर्नर द्वारा की जाती है। कार्यपालक निदेशक (एफएसयू के प्रभारी) एफएसडीसी उप-समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करता है।

विदेशी मुद्रा विभाग

विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (फेरा) समाप्त कर दिया गया था और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) नामक नया अधिनियम 1 जून 2000 से लागू हुआ। नवीन प्रबंधन का उद्देश्य विदेशी व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना तथा भारत में विदेशी मुद्रा विनिमय के व्यवसाय को प्रोन्नत, व्यवस्थित, विकसित और सुगम बनाना है।

विदेशी मुद्रा लेनदेनों की सुलभता

चूंकि विदेशी मुद्रा विनिमय की प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) के अंतर्गत प्राधिकृत व्यक्तियों को शक्तियों का प्रत्यायोजन किया गया है, इसलिए जहां तक नागरिकों (व्यक्तियों) का संबंध है, इस संबंध में विदेशी मुद्रा विभाग की भूमिका न्यूनतम रह गई है। भारत में निवासी व्यक्तियों की विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आम तौर पर उन्हें प्राधिकृत व्यक्ति/व्यक्तियों से संपर्क करना होता है। भारत सरकार द्वारा समय-समय पर यथा अधिसूचित चालू खाता नियमावली और रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित पूंजी खाता विनियमावली द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति विदेशी मुद्रा लेनदेनों की सुविधा प्रदान करने के लिए दिशा-निर्देशित होते हैं। रिज़र्व बैंक केवल उन आवेदनपत्रों पर कार्रवाई करता है जिनमें विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियमावली और (पूंजी खाता लेनदेन) विनियमावली के अंतर्गत पूर्व अनुमोदन की अपेक्षा होती है।

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन की कंपाउंडिंग

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम की भावना को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने उक्त अधिनियम की धारा–15 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को उक्त अधिनियम की धारा–3(ए) को छोडकर शेष सभी धाराओं के अंतर्गत हुए उल्लंघनों की कंपाउंडिंग करने की शक्तियाँ प्रदान की हैं। कंपाउंडिंग के अंतर्गत उल्लंघनकर्ता को स्वेच्छा से उल्लंघन स्वीकार करने, दोष स्वीकार करने और निदान प्राप्त करने का विकल्प होता है। यह प्रक्रिया विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के अंतर्गत व्यक्तियों और कंपनियों द्वारा भूलवश हुए उल्लंघनों के संबंध में उन्हें राहत देती है, जबकि जान-बूझ कर, इरादतन और कपटपूर्ण लेनदेनों के प्रति इसमें गंभीर रुख अपनाया जाता है।

मानव संसाधन प्रबन्‍ध विभाग

मानव संसाधन प्रबन्‍ध विभाग का विज़न है कि अपने बैंक को केन्‍द्रीय बैंकिंग के क्रियाकलापों को पूरा करने के बारे में सहायता प्रदान की जाए, यथा – (i) संस्‍था की दक्षता को बढ़ाने के लिए सही परिवेश का सृजन करना; (ii)स्‍टाफ का समुचित कार्यनियोजन करके, उसे प्रोत्‍साहन देकर सर्वोत्‍कृष्‍ट कार्यनिष्‍पादन और (iii)भरोसे का वातावरण तैयार करना, प्रत्‍याशाओं के प्रति आश्‍वस्‍त करना और ऐसी भावना को बढ़ावा देना कि यह संस्‍था अपने स्‍टाफ की सुख-सुविधाओं और उनकी अभिलाषाओं का ध्‍यान रखती है। इससे निजी अभिलाषाओं को व्‍यवसायिक लक्ष्‍यों के समतुल्‍य रखते हुए दक्षता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विशिष्ट रूप से मानव संसाधन प्रबंध विभाग के निम्नलिखित कार्य हैं:

  1. निम्‍नानुसार मानव संसाधन नीतियों का निरूपण
    1. भर्ती
    2. नियुक्ति
    3. पदोन्‍नति और करियर का क्रमिक विकास
    4. कार्यनिष्‍पादन और क्षमता का मूल्‍यांकन
    5. प्रशिक्षण, विकास और कौशल उन्नयन
    6. गतिशीलता (स्‍थानांतरण और प्रत्‍यावर्तन )
    7. पारितोषिक एवं प्रोत्साहन
    8. सेवानिवृत्ति/ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से रिक्तियां
    9. वेतन संरचना एवं अन्य सुविधाएं
    10. प्रतिनियुक्तियां/सेकेंडमेंट/ड्यूटी पर दौरा
  1. बैंक में सामान्यत: अनुशासन प्रबंधन प्रणाली का संचालन करना।
  2. बैंक के परिचालन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों के अनुसार सूचना का प्रसार करना।
  3. बैंक में मानव स्रोतों के डेटाबेस का रख-रखाव कर उसे अद्यतन करना।
  4. सद्भावपूर्ण औद्योगिक संबंध बनाए रखना और स्टाफ के विभिन्न वर्गों के विविध मान्यता प्राप्त निकायों से वेतनमान तथा भत्तों, कल्याण योजनाओं, कार्मिक नीतियों इत्यादि पर बातचीत करना।
  5. कार्यनिष्पादन के मूल्यांकन प्रणाली की निरंतर समीक्षा करते रहने ताकि इसे मानव संसाधन विकास नीति प्रबंधन का एक प्रभावी साधन बनाया जा सके।
  6. तरक्की तथा अनुक्रमण योजनाएं बनाना
  7. भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रशिक्षण संस्थानों यथा आंचलिक प्रशिक्षण केन्द्र, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई तथा नई दिल्ली के अलावा भारतीय रिज़र्व बैंक स्टाफ कॉलेज, चेन्नई तथा कृषि बैंकिंग महाविद्यालय, पुणे की निगरानी करना तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को औचित्यपूर्ण बनाना।
  8. स्‍टाफ सुझाव योजना का संचालन करना।
  9. ग्रीष्मकालीन नियोजन प्रस्तावित करना।
  10. गृह पत्रिका – ‘विदाउट रिज़र्व’ का प्रकाशन तथा आरबीआई क्विज़ का आयोजन करना।
  11. केन्द्रीय बोर्ड की मानव संसाधन प्रबंध उप समिति के लिए सचिवालय की भूमिका निभाना।
  12. कार्य-स्थल पर महिलाओं के यौन शोषण निवारण से संबंधित मामलों की निगरानी सहित केन्द्रीय शिकायत समिति को सचिवालय संबंधी सहायता प्रदान करना।

निरीक्षण विभाग

निरीक्षण विभाग की स्‍थापना उसी वर्ष अर्थात् 1935 में हुई, जिस वर्ष भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपना कार्य आरंभ किया था। विभाग को भारतीय रिज़र्व बैंक के परिचालन/ कार्यप्रणाली के संबंध में निष्‍पक्ष और वस्‍तुनिष्‍ठ आश्‍वासन/ फीडबैक देने की जिम्‍मेदारी सौपी गई थी। विभाग उपर्युक्‍त का परीक्षण और मूल्‍यांकन करता है और रिज़र्व बैंक के जोखिम प्रबंधन, आंतरिक नियंत्रण तथा गवर्नेंस प्रक्रिया की पर्याप्‍तता और विश्‍वसनीयता के संबंध में रिपोर्ट प्रस्‍तुत करता है।

निरीक्षण विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की लेखापरीक्षा तथा जोखिम प्रबंधन उप समिति (ए.आर.एम.एस) के सचिवालय का कार्य करता है तथा अपने मूल्‍यांकन की रिपोर्ट उप समिति के समक्ष प्रस्‍तुत करता है। इसके अलावा, इस विभाग द्वारा केंद्रीय बोर्ड की सूचना प्रौद्योगिकी उप समिति (आइ.टी.एस.सी) को सूचना प्रणाली (आइ.एस) लेखापरीक्षाओं के निष्‍कर्ष प्रस्‍तुत किए जाते हैं। उच्‍च जोखिम के रूप में वर्गीकृत किए गए लेखापरीक्षा प्रेक्षणों को कार्यपालक निदेशक समिति के समक्ष समीक्षा और मार्गदर्शन के लिए प्रस्‍तुत किया जाता है। भारतीय रिज़र्व बैंक की गवर्नेंस-संरचना में आंतरिक लेखापरीक्षा की प्रमुख भूमिका है।

भारतीय रिज़र्व बैंक में निरीक्षण विभाग से संबंधित कार्यक्षेत्र/ दायरे

वर्तमान में, विभाग द्वारा निम्नलिखित प्रकार के निरीक्षण किए जाते हैं/ उनका समन्‍वय किया जाता है।

  • जोखिम आधारित आंतरिक लेखापरीक्षा (आरबीआइए)
  • सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा (आइएस ऑडिट)
  • समवर्ती लेखापरीक्षा (सीए)
  • नियंत्रण स्‍व-मूल्‍यांकन लेखापरीक्षा (सीएसएए)

जोखिम आधारित आंतरिक लेखापरीक्षा (आरबीआइए)

जोखिम आधारित आंतरिक लेखापरीक्षा (आरबीआइए) के अंतर्गत निरीक्षण विभाग द्वारा प्रबंधतंत्र को स्‍वतंत्र और वैकल्पिक राय प्रदान की जाती है, चाहे यह रिज़र्व बैंक के सीधे कारोबार प्रक्रिया से जुड़ी हो या नहीं तथा इससे उत्‍पन्‍न जोखिमों का उचित तरीके से प्रबंधन किया जाता है। जोखिम आधारित आंतरिक लेखापरीक्षा (आरबीआइए) द्वारा अन्‍य लेखापरीक्षाओं के निष्‍कर्षों की समीक्षा की जाती है। केंद्रीय कार्यालय के विभागों (केंकावि), क्षेत्रीय कार्यालय (क्षेका), प्रशिक्षण संस्थानों (प्रसं), बैंकिंग लोकपाल कार्यालय (बैंलोका) और संबद्ध संस्‍थानों (ससं) की विभिन्‍न इकाइयों की लेखापरीक्षा आवधिक आधार पर 12 से 24 महीनों के बीच की जाती है।

सूचना प्रणाली लेखा परीक्षा (आईएसए)

सूचना सुरक्षा लेखा परीक्षा (आईएसए) आरबीआइए लेखापरीक्षा के भाग के रूप में की जाती है ताकि रिजर्व बैंक में इस्तेमाल की जा रही सूचना प्रणालियों से संबंधित जोखिम नियंत्रण उपायों का मूल्‍यांकन किया जा सके। इसके अलावा, विभाग द्वारा कंप्‍यूटर एप्लिकेशनों/प्रणालियों, प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों, सेवाओं आदि की सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा भी की जाती है। यह लेखापरीक्षाएं, लेखापरीक्षा तथा जोखिम प्रबंधन उप समिति (एआरएमएस)/ सूचना प्रौद्योगिकी उप समिति (आइटीएससी)/ उच्‍च प्रबंध तंत्र अथवा कारोबार स्‍वामी विभागों के अनुरोध / उपयोगकर्ता विभागों/ सूप्रौ विभाग के निर्देशों के आधार पर अथवा विभाग द्वारा जरूरत के अनुसार, कार्यक्षेत्रों की गंभीरता/ परिचालनों के महत्‍व/ प्रणालियों को ध्‍यान में रखकर की जाती हैं।

समवर्ती लेखा परीक्षा (सीए)

आंतरिक तंत्र के हिस्से के रूप में सभी व्यावसायिक इकाइयों से अपेक्षित है कि वे अपने लेनदेनों (मुख्य रूप से वित्तीय लेन-देन) की लेखापरीक्षा नियमित आधार पर बाह्य सनदी लेखाकारों से कराएं।

नियंत्रण स्‍व-मूल्यांकन लेखा परीक्षा (सीएसएए)

यह एक स्‍वमूल्‍यांकन/ गुणवत्‍ता परीक्षण की प्रक्रिया है जिससे जोखिम नियंत्रणों से संबंधित कमियों का मूल्‍यांकन/पता लगाया जा सके और समय-समय पर संबंधित कार्यों की समीक्षा की जा सके तथा इन कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्‍मक कदम उठाए जा सकें। यह मूल्‍यांकन उन लोगों द्वारा किए जाते हैं, जो मूल्‍यांकन किए जाने वाले परिचालनों/ प्रक्रियाओं से सीधे जुड़े नहीं होते हैं। सभी कारोबार इकाइयों से अपेक्षित है कि वे प्रत्‍येक वर्ष में कम से कम दो बार अर्थात जून और दिसंबर छमाही में सीएसएए लेखापरीक्षा सुनिश्चित करें।

अनुपालन, अनुवर्ती कार्रवाई और रिपोर्टिंग

निरीक्षण विभाग द्वारा लेखापरीक्षा प्रेक्षणों (आरबीआइए, आइएसए/टीए, सीए सीएसएए) के संबंध में अनुवर्ती कार्रवाई की जाती है ताकि तत्‍काल सुधारात्‍मक कार्रवाई और जोखिम निवारक उपाय किए जा सकें। विभाग आवश्‍यकतानुसार, ऑफसाइट और ऑनसाइट मूल्‍यांकन भी करता है। विभाग द्वारा कारोबार इकाइयों से समय-समय पर रिटर्न प्राप्त करके ऑफसाइट निगरानी की जाती है और उनका विश्‍लेषण भी किया जाता है तथा आवश्‍यकतानुसार उन पर अनुवर्ती कार्रवाई की जाती है।

लेखापरीक्षा और जोखिम प्रबंधन उप समिति (एआरएमएस) तथा कार्यपालक निदेशक समिति (ईडीसी) की बैठकें

विभाग द्वारा लेखापरीक्षा तथा जोखिम प्रबंधन उप समिति (ए.आर.एम.एस) की बैठकों का समन्‍वय और समय-समय पर बैठकों को आयोजित कराने की व्‍यवस्‍था की जाती है। एआरएमएस और ईडीसी की बैठकें सामान्‍यत: तिमाही में एक बार की जाती हैं। विभाग द्वारा छमाही आधार पर केंद्रीय बोर्ड की सूचना प्रौद्योगिकी उप समिति (आइ.टी.एस.सी) को सूचना प्रणाली (सूचना सुरक्षा सहित) लेखापरीक्षाओं की रिपोर्टें प्रस्‍तुत की जाती है।

आंतरिक ऋण प्रबंध विभाग

आंतरिक ऋण प्रबंध विभाग की मुख्य गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • जोखिम और लागत प्रभावी ढंग से सरकार के ऋण का प्रबंधन;
  • सरकार के ऋण प्रबंधन के लिए अभिनव और व्यावहारिक समाधान प्रदान करना;
  • प्राथमिक डीलरों के मजबूत संस्थागत ढांचे का निर्माण।

विभाग में निम्नलिखित प्रभागों के माध्यम से कार्य किया जाता है:

  1. सरकारी उधार प्रभाग (जीबीडी): भारत सरकार (भारत सरकार के परामर्श से निर्गम कैलेंडर संबंधी तैयारी सहित), सभी राज्य सरकारों और पुडुचेरी संघ राज्य क्षेत्र के बाजार उधार कार्यक्रमों, लिखतों का चयन तथा अवधि का प्रबंधन, नीलामी प्रक्रिया का प्रबंधन और राज्य और केंद्र के नकदी शेष की निगरानी करना।

  2. लेन देन परिचालन प्रभाग (डीओडी): सीएसएफ और जीआरएफ जैसी योजनाओं के अधीन और विदेशी केंद्रीय बैंकों की ओर से योजनाओं के तहत राज्य सरकारों द्वारा निवेश प्रयोजनों के लिए द्वितीयक बाजार से प्रतिभूतियों की खरीद के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार के साथ इंटरफेस। अन्य बातों के अलावा सरकारी प्रतिभूतियों की प्राप्तियों की घटबढ़ पर नजर रखता है तथा शीर्ष प्रबंधन के लिए आवश्यक फीडबैक प्रदान करता है। द्वितीयक बाजार - सरकारी प्रतिभूतियों का मासिक और त्रैमासिक विश्लेषण किया जाता है।

  3. प्राथमिक व्यापारी विनियमन प्रभाग (पीडीआरडी): प्राथमिक व्यापारियों का विनियमन तथा पर्यवेक्षण करता है और प्राथमिक नीलामी में उनकी बोली-प्रतिबद्धताओं पर नज़र रखता है, प्राथमिक व्यापारियों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा करता है और नए प्रतिभागियों को प्राधिकृत करता है।

  4. अनुसंधान प्रभाग: राज्य वित्त सचिवों के सम्मेलन सहित विभिन्न समितियों के लिए नीति, विश्लेषणात्मक और तकनीकी जानकारी प्रदान करने के लिए नोडल प्रभाग है। इसके अलावा संसदीय प्रश्न, केंद्रीय बोर्ड / केंद्रीय बोर्ड की समितियों के प्रश्नों, बैंक, भारत सरकार और अन्य प्रकाशनों के लिए शोध संबंधी योगदान देने के लिए केन्द्र बिन्दु के रूप में कार्य करता है।

  5. प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) प्रभाग: सरकार नकदी शेष संबंधी आंकड़ा संचय (डाटाबेस) पर नजर रखना, शीर्ष प्रबंधन के लिए एमआईएस रखना, विभिन्न सांविधिक और आंतरिक प्रकाशनों के लिए डेटा प्रदान करता है, सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी गतिविधियों के लिए प्रौद्योगिकी मंच की देखरेख और विश्लेषणात्मक कार्य करता है । इसके अलावा मुख्य रूप से बैंक की तरलता प्रबंधन प्रयोजनों के लिए सरकारी नकदी शेष के आकलन और अल्पावधिक अनुमानों मूल्याकंन करता है।

  6. केंद्रीय ऋण प्रभाग (सीडीडी): लोक ऋण प्रबंधन संबंधी कार्यों का लेखा / रिपोर्टिंग रखता है। सरकारी प्रतिभूतियों के डिपॉजिटरी के रूप में कार्य करने साथ ही लोक ऋण का रखरखाव एवं सर्विस करनेवाले लोक ऋण कार्यालयों के लिए नीति तैयार करना तथा निगरानी संबंधी कार्य करता है। सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 / नियम 2007 और लोक ऋण अधिनियम, जहाँ भी 1944 / नियम 1947 लागू करने की व्यवस्था करता है।

अंतरराष्ट्रीय विभाग

रिज़र्व बैंक में अंतरराष्ट्रीय विभाग का गठन 3 नवंबर 2014 को किया गया जिससे कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कूटनीति और वैश्विक विनियामक मानकों के सृजन में सहभागिता पर ध्यानकेंद्रण को बढ़ावा दिया जा सके। यह विभाग अंतरराष्ट्रीय मंच पर भागीदारी करने और इस क्षेत्र में शीर्ष प्रबंध तंत्र के विचारों के आदान-प्रदान में सहायता देने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग में अपनी संस्था की सहभागिता के लिए जिम्मेदार है। यह विभाग इस क्षेत्र के मुद्दों पर रिज़र्व बैंक के रुख के लिए अनुसंधान उन्मुखी कार्य करता है। विभाग रिज़र्व बैंक की बाह्य सेवाओं और संपर्कों के लिए भी उत्तरदायी है जिसमें अन्य केंद्रीय बैंकों के साथ तकनीकी सहयोग के मामले शामिल हैं।

यह विभाग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य देखता है:

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस), वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी), जी20, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स), दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ का वित्त (सार्क फाइनान्स), भुगतान और बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर समिति (सीपीएमआई), वैश्विक वित्तीय प्रणाली समिति (सीजीएफएस), विश्व बैंक, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) आदि जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं/देशों के समूहों के साथ रिज़र्व बैंक के संबंध।

  • अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए नीति महत्व के मुद्दों पर रिज़र्व बैंक के विचार प्रस्तुत करना जिसमें विनियामक मुद्दे और केंद्रीय बैंक के करेंसी स्वैप भी शामिल हों।

  • अन्य केंद्रीय बैंकों के अधिकारियों के क्षमता निर्माण के लिए रिज़र्व बैंक की पहल और विदेशी संस्थाओं/बाजार सहभागियों/विश्वविद्यालयों आदि के प्रतिनिधियों के लिए एक्सपोज़र दौरों की व्यवस्था करना।

  • अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के वर्तमान मुद्दों पर अनुसंधान टिप्पणियां तैयार करना।

विधि विभाग

विधि विभाग के प्राथमिक दायित्व निम्नलिखित हैं :-

  1. रिज़र्व बैंक के सर्वोच्च प्रबंधन, विभागों, क्षेत्रीय कार्यालयों और सहायक संस्थाओं को कानूनी सलाह देना।
  2. रिज़र्व बैंक तथा निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम की ओर से मुकदमों की देखरेख करना।
  3. रिज़र्व बैंक के विभिन्न विभागों के परिपत्रों, निर्देशों, विनियमों और करारों की जांच करना। रिज़र्व बैंक द्वारा बनाए जाने वाले विधान का मसौदा तैयार करने में मदद करना।
  4. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के सचिवालय के रूप में कार्य करना।
  5. रिज़र्व बैंक की ओर से केंद्रीय सूचना आयोग और विभिन्न न्यायिक मंचों, जैसे जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण मंच, राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, श्रम अदालतों/ औद्योगिक अधिकरणों इत्यादि में उपस्थित होना।

मौद्रिक नीति विभाग

कार्य

अधिदेश और उद्देश्य

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अनुसार, “.......भारत में मौद्रिक स्थिरता प्राप्त करने की दृष्टि से बैंकनोटों के निर्गम को विनियमित करना तथा प्रारक्षित निधि को बनाएं रखना और सामान्य रूप से देश के हित में मुद्रा और ऋण प्रणाली संचालित करना, अत्यधिक जटिल अर्थव्यवस्था की चुनौती से निपटने के लिए आधुनिक मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क रखना, वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना।

मुख्य कार्य

  • मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के लिए एक सचिवालय के रूप में कार्य करना।

  • मौद्रिक नीति तैयार करने में एमपीसी की सहायता करना।

  • एमपीसी को तकनीकी जानकारी जैसे अल्पकालिक और मध्यम अवधि विकास और मुद्रास्फीति के अनुमानों को प्रदान करना।

  • चलनिधि की स्थितियों का आकलन और पूर्वानुमान करके मौद्रिक नीति को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना।

  • वित्तीय बाजार समिति (एफएमसी) में भाग लेता है जो नकदी प्रबंधन के साथ-साथ वित्तीय बाजारों के संचालन के मार्गदर्शन के लिए दैनिक आधार पर मिलना।

  • नियमित आधार पर मौद्रिक नीति की निगरानी और संचरण का मूल्यांकन।

  • मौद्रिक नीति रिपोर्ट (एमपीआर) तैयार करना।

  • बैंक ऋण के आंकड़ों का क्षेत्र-वार और उद्योग-वार संकलन।

  • बैंकों के सीआरआर/एसएलआर बनाए रखने के अनुपालन को मॉनिटर करना।

  • अंतिम ऋणदाता के रुप में कार्य करने के लिए बैंक के नोडल विभाग के रूप में कार्य करना।

  • राज्य सरकारों को खाद्य ऋण प्राधिकृत और आबंटित करना।

परिसर विभाग

परिसर विभाग का उत्तरदायित्व बैंक के परिसरों पर अवसंरचना का निर्माण और रखरखाव करना है। विभाग कार्यालय और आवासीय स्थलों की मूलभूत अवसंरचना, अधिग्रहण, रखरखाव, समेकन और व्यवस्थापन संबंधी नीतियां और दिशा-निर्देश जारी करता है। परिसर विभाग क्षेत्रीय कार्यालयों को पूंजी बजट का आबंटन करता है और देशभर के संपदा विभागों के उच्च मूल्य कार्यों/ परियोजनाओं की पारिस्थितिकीय और पर्यावरणीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए निगरानी करता है वर्तमान में विभाग के महत्वपूर्ण क्षेत्र निम्नलिखित है।

  • बृहत्तर पर्यावरणीय जागरूकता को बढावा देना, ऊर्जा और जल जैसे संसाधनों का संरक्षण और इनके प्रयोग की लेखा परीक्षा करना
  • बैंक की संपत्तियों का सुव्यवस्थीकरण

जोखिम निगरानी विभाग

रिज़र्व बैंक में उद्यम-व्‍यापी जोखिम प्रबंधन प्रणाली के कायान्‍वयन हेतु जोखिम निगरानी विभाग का गठन किया गया है। परिचालनात्‍मक जोखिमों और वित्‍तीय जोखिमों की देखरेख हेतु इस विभाग में दो प्रभाग हैं। समूचे रिज़र्व बैंक में व्‍यापक रूप से जोखिमों की प्रभावी पहचान, मूल्‍यांकन एवं प्रबंधन हेतु जोखिम निगरानी विभाग को निम्‍नलिखित कार्य सौंपे गए हैं:

  • व्‍यापक जोखिम प्रबंधन ढांचा तैयार करना और रिज़र्व बैंक की नीतियां/कार्यपद्धतियां/नीतियां/कार्यपद्धतियां/मैट्रिक्‍स तैयार करना और उसकी आवधिक समीक्षा करना तथा प्रकार्यात्मक ईकाइयों से यह सुनिश्चित करने के लिए चर्चा करना कि सभी उल्लेखनीय जोखिमों की पहचान कर ली गई है।

  • प्रकार्यात्‍मक इकाइयों द्वारा रिपोर्ट किए गए जोखिमों की रिपोर्टों को एकत्रित कर उनकी निगरानी करेगा और आवधिक रूप से उन्‍हें जोखिम निगरानी समिति (आरएमसी) तथा लेखापरीक्षा एवं जोखिम प्रबंधन उप समिति (एआरएमएस) के सम्‍मुख प्रस्‍तुत करेगा।

  • रिज़र्व बैंक की नीतिगत कार्रवाइयों से उत्पन्न होने वाले वित्‍तीय जोखिमों का मूल्‍यांकन करेगा और उनके संबंध में आरएमसी और एआरएमएस को रिपोर्ट प्रस्‍तुत करेगा।

  • संस्‍थागत स्‍मृति (इन्‍स्‍टिट्यूशनल मेमरी) के निर्माणार्थ ‘विस्‍मरणशील’ और ‘प्राय: विस्‍मरणशील’ घटनाओं का एक डेटाबेस तैयार करेगा।

  • रिज़र्व बैंक की कारोबार निरंतरता योजनाओं (बीसीपी) की पर्याप्‍तता व उपयुक्‍तता की आवधिक समीक्षा करेगा।

  • संगठन में जोखिम प्रबंधन प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का कार्य करेगा।

सचिव विभाग

  • केंद्रीय बोर्ड और इसकी समिति से संबंधित सचिवीय कार्य

  • उप गवर्नरों की समिति की बैठकों से संबंधित सचिवीय कार्य

  • वरिष्‍ठ प्रबंध समिति (एसएमसी) की बैठकों / गवर्नर की अन्‍य बैठकों से संबंधित सचिवीय कार्य

  • उपर्युक्‍त समितियों की बैठकों में लिए गए निर्णयों का कार्यान्‍वयन एवं अनुपालन की निगरानी करना

  • गवर्नर तथा उप गवर्नरों के कार्यभार ग्रहण करने / सेवानिवृत्‍त होने / पदभार छोड़ने सहित गवर्नर तथा उप गवर्नरों के सेवा-शर्त संबंधी कार्य

  • केंद्रीय बोर्ड / स्‍थानीय बोर्ड के गठन संबंधी कार्य

  • स्‍टाफ सहायता तथा विभिन्‍न गैर स्‍थापना भुगतानों सहित शीर्ष प्रबंध तंत्र को सूचना प्रोद्योगिकी से संबंधित विभिन्न कार्यों के साथ प्रशासनिक सहायता प्रदान करना

  • सचिव विभाग की ओर से आंतरिक ऋण प्रबंध विभाग, वित्‍तीय स्थिरता इकाई, वित्‍तीय बाजार विनियमन विभाग, वित्‍तीय बाजार परिचालन विभाग, संचार विभाग तथा मौद्रिक नीति विभाग (इस विभाग को सीमित प्रशासनिक सहायता) को प्रशासनिक सहायता उपलबद्ध करने और गैर स्‍थापना भुगतान का कार्य

  • अति विशिष्‍ट व्‍यक्ति अतिथि गृह के आरक्षण संबंधी कार्य

  • भारतीय रिज़र्व बैंक कर्मचारी भविष्‍य निधि के संबंध में प्रशासक का कार्य

केंद्रीय सतर्कता कक्ष

भारतीय रिज़र्व बैंक की सतर्कता इकाई मुख्‍य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के समग्र प्रभार के अंतर्गत है। सतर्कता इकाई का प्रमुख कार्य निवारक सतर्कता और भ्रष्‍टाचार निरोधक उपाय करने के साथ-साथ बैंक के कर्मचारियों के विरुद्ध की गई शिकायतों/आरापों की सतर्कता की दृष्टि से जांच करना (केंद्रीय सतर्कता आयो‍ग द्वारा की गई परिभाषा के अनुसार)। सतर्कता इकाई केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले विभिन्‍न अनुदेशों को भी लागू करती है। जो व्‍यक्ति भारतीय रिज़र्व बैंक में भ्रष्‍टाचार का शिकार बन गए हों या उनके पास भ्रष्‍टाचार की कोई सूचना हो तो वे ई-मेल या डाक द्वारा रिज़र्व बैंक के सीवीओ को अपनी शिकायत भेज सकते हैं:


मुख्‍य सतर्कता अधिकारी
भारतीय रिज़र्व बैंक
केंद्रीय कार्यालय भवन, 20वीं मंजि़ल
शहीद भगतसिंह मार्ग
मुंबई – 400 001

भारतीय रिज़र्व बैंक 31 अक्टूबर से 5 नवंबर 2016 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2016 (सप्ताह) मना रहा है। इस सप्ताह का विषय है – “सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सार्वजनिक सहभागिता”।

केंद्रीय सतर्कता आयोग, नई दिल्ली (आयोग) ने आम जनता में जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने के लिए सत्यनिष्ठा शपथ की अवधारणा की परिकल्पना की है जिससे कि विशेषकर निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार को रोकने और उसका मुकाबला करने के लिए नागरिकों और अन्य कॉर्पोरेटों/संस्थाओं/फर्मों आदि की सहायता और वचनबद्धता को सूचीबद्ध किया जा सके। शपथ-पत्र आयोग की वेबसाइट https://pledge.cvc.nic.in पर उपलब्ध हैं।

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