21 अक्तूबर 2026
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश –
पुदुचेरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड
जनसाधारण की सूचना के लिए एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उप धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 19 अक्तूबर 2026 के निदेश संदर्भ सं. सीएचएन.डीओएस.यूसीबी.सं. एस336/16-05-847/2026-27 द्वारा “पुदुचेरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड” (बैंक) को कतिपय निदेश जारी किए हैं। इन निदेशों के अनुसार उक्त बैंक 21 अक्तूबर 2026 को कारोबार समय की समाप्ति से आरबीआई के लिखित पूर्व-अनुमोदन के बिना, भारतीय रिज़र्व बैंक के 19 अक्तूबर 2026 के निदेश, जिसकी एक प्रति इच्छुक जनसाधारण के अवलोकनार्थ बैंक की वेबसाइट / उसके परिसर में प्रदर्शित की गई है, में यथा-अधिसूचित बातों को छोड़कर, किसी ऋण और अग्रिम की संस्वीकृति या नवीकरण नहीं करेगा, कोई निवेश नहीं करेगा, अपने ऊपर ऐसा कोई भी दायित्व नहीं लेगा, जिसमें उधार लेना और नई जमाराशि स्वीकार करना भी शामिल है, किसी भी भुगतान का संवितरण या संवितरित करने के लिए सहमति नहीं देगा चाहे वह उसकी देयताओं और दायित्वों के निर्वहन में या अन्यथा हो, कोई भी समझौता या इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं करेगा और अपनी किसी भी संपत्ति या आस्ति की बिक्री और अंतरण या अन्यथा निपटान नहीं करेगा। चलनिधि से संबंधित बैंक की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, बैंक को यह निर्देश दिया गया है कि वह किसी जमाकर्ता के बचत या चालू खाते या किसी अन्य खाते से ₹5,000/- (पाँच हजार रुपये मात्र) से अधिक की निकासी की अनुमति न दे, लेकिन उपर्युक्त आरबीआई निदेशों में उल्लिखित शर्तों के अधीन जमा के एवज में ऋण समायोजित करने की अनुमति है। बैंक कुछ आवश्यक कार्यों जैसे कर्मचारियों के वेतन, किराया, बिजली बिल, आदि के संबंध में व्यय कर सकता है, जैसा कि उक्त निदेशों में विनिर्दिष्ट किया गया है।
2. भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल के दिनों में बैंक के कामकाज में सुधार के लिए इसके बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ बातचीत की है। हालांकि पर्यवेक्षी चिंताओं को दूर करने और बैंक के जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बैंक द्वारा किए गए ठोस प्रयासों की कमी के कारण इन निदेशों को जारी करना आवश्यक हो गया है।
3. पात्र जमाकर्ता अपनी सहमति प्रस्तुत करने और विधिवत सत्यापन के बाद डीआईसीजीसी अधिनियम 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम से समान क्षमता और समान अधिकार में ₹5,00,000/- (रुपये पांच लाख मात्र) की अधिकतम मौद्रिक सीमा तक अपनी जमाराशि के लिए जमा बीमा की दावा राशि प्राप्त करने के हकदार होंगे। अधिक जानकारी के लिए जमाकर्ता अपने बैंक अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। ये विवरण, डीआईसीजीसी की वेबसाइट: www.dicgc.org.in पर भी देखे जा सकते हैं।
4. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उपर्युक्त निदेशों को जारी करने का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधों के साथ बैंकिंग कारोबार करना जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंक की स्थिति की निरंतर निगरानी जारी रखेगा और परिस्थितियों और जमाकर्ताओं के हित के आधार पर यथा आवश्यक इन निदेशों में संशोधन सहित आवश्यक कार्रवाई करेगा।
5. ये निदेश 21 अक्तूबर 2026 को कारोबार की समाप्ति से छह माह की अवधि के लिए लागू रहेंगे और ये समीक्षा के अधीन हैं।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/1362 |