केंद्रीय बोर्ड निदेशकों का प्रोफ़ाइल
श्री नटराजन चंद्रसेकरन
श्री भरत नरोतम दोशी
श्री सुधीर मांकड
डॉ. अशोक गुलाटी
श्री मनीष सभरवाल
श्री सुभाष चंद्र गर्ग
श्री राजीव कुमार
डॉ. प्रसन्‍न कुमार मोहंती
श्री दिलीप एस. शंघवी
श्री सतीश काशीनाथ मराठे
प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी
सुश्री रेवती अय्यर
श्री स्‍वामीनाथन गुरुमूर्ति

श्री नटराजन चंद्रसेकरन

श्री नटराजन चंद्रसेकरन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रमुख कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, त्रिची से कम्प्यूटर एप्लीकेशन में स्नातकोत्‍तर उपाधि प्राप्‍त की है और भारत और विदेशों के कई विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से उन्‍हें सम्मानित किया गया है। श्री चंद्रसेकरन के पास वैश्विक सॉफ्टवेयर उद्योग और कारोबार परिचालन में 28 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्‍होंने नैसकॉम के अध्यक्ष और 2015-16 के लिए विश्व आर्थिक मंच, दावोस में आईटी उद्योग के अध्यक्ष रहें । वे इंडो–अमेरिका सीईओ फोरम के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जापान के लिए भारत के द्विपक्षीय व्यापार कार्यदलों के सदस्य हैं । उन्‍होंने कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं, जिनमें 2015 में व्यापार के लिए क्विमप्रो प्लेटिनम स्टैंडर्ड अवार्ड और 2015 में लगातार पांचवें वर्ष के लिए संस्थागत निवेशकों के सर्वोत्‍तम कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) भी शामिल हैं। 2014 में उन्‍हें सीएनबीसी टीवी 18 - इंडियन बिज़नेस आइकन और व्यवसाय की श्रेणी में वर्ष 2014 के सीएनएन-आईबीएन भारतीय के रूप में मतदान (वोट) किया गया था। फोटोग्राफी में वे काफी रुचि रखते हैं, संगीत के अच्‍छे जानकार हैं और उन्‍हें लंबी दूरी की दौड़ से काफी लगाव है जिन्‍होंने दुनिया भर के मैराथनों को पूरा कर लिया है।

श्री भरत नरोतम दोशी

श्री भरत नरोतम दोशी भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान और भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के फेलो सदस्य हैं तथा उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से विधि में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। वे हारवर्ड बिजनस स्कूल (पीएमडी) के पूर्व छात्र हैं तथा “एशियन इकॉनोमिजः रिजनल एंड ग्लोबल रिलेशनशिप्स” पर साल्जबर्ग सेमिनार के फेलो हैं।

श्री दोशी महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के पूर्व कार्यपालक निदेशक और ग्रूप सीएफओ हैं। वे अप्रैल 2008 से महिन्द्रा एंड महिन्द्रा फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड के अध्यक्ष भी रहे हैं और मार्च 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय निदेशक बोर्ड के निदेशक के रूप में उनका नामांकन होने पर उन्होंने यह पद छोड़ दिया।

वे महिन्द्रा इंटर ट्रेड लिमिटेड के अध्यक्ष हैं।

वे गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड के स्वतंत्र निदेशक भी हैं।

श्री दोशी महिन्द्रा यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज ऑफ इंडिया, के.सी. महिन्द्रा एजुकेशन ट्रस्ट और महिन्द्रा फाउन्डेशन के नियंत्रक बोर्ड में भी हैं। वे गेटवे हाउसः इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशन्स के बोर्ड में भी हैं जो मुंबई में एक विदेशी नीति विचारक मंडल है।

पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से श्री दोशी विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के सदस्य होने के नाते वाणिज्य और उद्योग चेम्बर्स के कार्य से भी सक्रियता के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2009-10 के लिए बॉम्बे वाणिज्य और उद्योग चेम्बर के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

वे वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार विशेषज्ञ समिति के सदस्य थे जो मुंबई को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र बनाने के संबंध में थी। वे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गठित कार्यदल के सदस्य थे जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के विनियमन से संबंधित उभरते हुए व्यापक मुद्दों की जांच करने के संबंध में था और वे लघु कारोबार तथा कम आय परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवा (सीसीएफएस) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गठित समिति के सदस्य भी थे। वे प्रकटन और लेखांकन मानकों पर सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) द्वारा गठित समिति के सदस्य थे। वर्तमान में वे एक्सीलेंस एनैबलर्स के परामर्शदात्री बोर्ड में हैं। यह संगठन भारत में कॉर्पोरेट अभिशासन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री दोशी की करियर उपलब्धियों के कारण उन्हें कई अवार्ड और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जिनमें उन्हें बिजनस टुडे द्वारा “भारत के सर्वोत्तम सीएफओ”, वर्ष 2005 में आईएमए इंडिया तथा वर्ष 2007 में सीएनबीसी द्वारा “वर्ष का सर्वश्रेष्ठ सीएफओ” घोषित करना और अनुकरणीय करियर और वित्त के क्षेत्र में उनके जीवनभर के योगदान को देखते हुए सीएफओ इंडिया द्वारा उन्हें सीएफओ हॉल ऑफ फेम में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल करना है।

श्री सुधीर मांकड

श्री सुधीर मांकड, आईएएस (सेवानिवृत्त) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से विकास अध्ययन में डिप्लोमा प्राप्त किया है। उन्होंने वर्ष 1971 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यभार ग्रहण किया और भारत सरकार तथा गुजरात सरकार के मुख्य रूप से शिक्षा और वित्त विभागों में विभिन्न क्षमताओं में सेवा की। उनकी अंतिम नियुक्ति गुजरात सरकार के मुख्य सचिव के रूप में थी। अगस्त 2007 में सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें गुजरात अंतरराष्ट्रीय वित्त टेक(जीआईएफटी) सिटी लिमिटेड, जिसे हाल में भारत के पहले आईएफएससी के रूप में अधिसूचित किया गया है, के गैर-कार्यपालक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने अनेक कंपनियों में स्वतंत्र निदेशक के रूप में सेवा की है। वे गुजरात डेजर्ट इकोलॉजी भूज, भारतीय लोक स्वास्थ्य संस्थान, गांधीनगर के अध्यक्ष और चारुतार आरोग्य मंडल, करमसद के उपाध्यक्ष भी हैं। वे नवरचना विश्वविद्यालय, वडोदरा के गवर्नर बोर्ड के सदस्य हैं। वे गुजरात में शिक्षा क्षेत्र के कार्य में प्रथम, ज्ञानशाला और अमेरिका इंडिया फाउंडेशन में सहयोग और परामर्श देते हैं। वर्तमान में वे नई शिक्षा नीति बनाने के लिए गठित समिति के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे हैं।

डॉ. अशोक गुलाटी

अशोक गुलाटी वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर अनुसंधान के लिए भारतीय परिषद (आईसीआरआईईआर) में कृषि के लिए इंफोसिस चेयर प्रोफेसर हैं। वह एक प्रसिद्ध भारतीय कृषि अर्थशास्त्री हैं और कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) (भारत सरकार) के पूर्व अध्यक्ष (2011-14) हैं।

वह अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) में 10 वर्षों (2001-11) के लिए निदेशक थे, पहले बाजार, व्यापार और संस्थान प्रभाग (2001-06), और बाद में दिल्ली में आईएफपीआरआई के एशिया कार्यालय (2006-11) का कार्य देखते थे। आईएफपीआरआई में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में दुनिया भर में एक्सपोजर, उपक्रम और मार्गदर्शन अनुसंधान को संचित किया। उन्होंने आर्थिक विकास संस्थान (1992-2000) में नाबार्ड चेयर प्रोफेसर के रूप में भी काम किया, और इससे पहले वे 1991 से 1997 तक निदेशक / मुख्य अर्थशास्त्री, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर), कृषि और ग्रामीण विकास थे ।

डॉ.गुलाटी भारत में नीति विश्लेषण और सलाह में पिछले कई वर्षो से गंभीर तौर पर शामिल हैं। वह श्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधान मंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के सबसे युवा सदस्य ; आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य; और वर्तमान में (2016-17) कर्नाटक के राज्य नियोजन बोर्ड के सदस्य थे, वे मध्य प्रदेश सरकार, कृषि पर मुख्यमंत्री के कार्यबल के सदस्य भी हैं; और समय-समय पर कई विशेषज्ञ समितियों के सदस्य रहे हैं।

"एंडिंग हंगर एंड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर" (जोआकिम वॉन ब्रौन के साथ अध्यक्ष के रूप में) (2017) पर जी 20 के लिए टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष भी हैं।

गुलाटी ने भारत में शैक्षिक और नीति दोनों क्षमताओं की सलाह देने का काम किया है। भारतीय और एशियाई कृषि पर 13 पुस्तकें लिखने का श्रेय उनके पास हैं। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में कई शोध पत्र लिखे हैं। वे भारत में अग्रणी दैनिक समाचार पत्रों के एक विपुल लेखक रहे हैं, उनके करंट कॉलम "फ्राम प्लेट टू प्लॉ" इंडियन एक्सप्रेस और फाइनेंशियल एक्सप्रेस में है।

वह नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के भी एक फैलो है, और सेंटर फॉर डिवेलपमेंट रिसर्च, बॉन विश्वविद्यालय में वरिष्ठ विजिटिंग फैलो है।

क्षेत्र में उनके योगदान के लिए, भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें 2015 में "पद्म श्री", एक उच्च नागरिक पुरस्कार, से सम्मानित किया।

उन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक किया और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पीएचडी किया ।

श्री मनीष सभरवाल

श्री मनीष सभरवाल वर्तमान में टीमलीज़ सर्विसेज के अध्यक्ष और सह-संस्थापक हैं। यह एक व्यावसायिक प्रशिक्षण फर्म है जो यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय पीपीपी अपरेंटिसशिप कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रही है।

उन्होंने पहले इंडिया लाइफ नामक एचआर आउटसोर्सिंग कंपनी की सह-स्थापना की थी जिसका वर्ष 2002 में अधिग्रहण किया गया जिसके बाद उन्होंने दो वर्ष तक सिंगापुर स्थित हेविट आउटसोर्सिंग (एशिया) में सेवा दी।

श्री मनीष सभरवाल राष्ट्रीय कौशल मिशन और सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन के सदस्य हैं तथा उन्होंने शिक्षा, रोजगार और नियोज्यता पर राज्य और केंद्रीय सरकार की विभिन्न समितियों में सेवा की। उन्होंने वार्टन स्कूल से अपनी एमबीए प्राप्त की तथा वे श्रीराम कॉलेज, दिल्ली और मायो कॉलेज, अजमेर के छात्र भी रहे हैं।

श्री सुभाष चंद्र गर्ग

श्री सुभाष चंद्र गर्ग, सचिव, आर्थिक कार्य विभाग, वित्‍त मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1983 बैच के राजस्‍थान कैडर से हैं। श्री गर्ग राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय, जयपुर, भारत से वाणिज्‍य और विधि में स्‍नातक हैं तथा पेशेवर योग्‍य लागत और निर्माण लेखाकार एवं कंपनी सचिव हैं।

श्री सुभाष चंद्र गर्ग नवंबर 2014 से जुलाई 2017 तक बांग्‍लादेश, भूटान, भारत और श्रीलंका के लिए विश्‍व बैंक समूह में कार्यपालक निदेशक थे। श्री गर्ग ने अंतरराष्‍ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी), अंतरराष्‍ट्रीय विकास संघ (आईडीए), जिन्‍हें संयुक्‍त रूप से विश्‍व बैंक के रूप में जाना जाता है, अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍त निगम (आईएफसी) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) में सेवा प्रदान की।

श्री गर्ग को प्रशासन, प्रबंधन और लोक नीति में, वित्‍त और कई विकास क्षेत्रों – कृषि, शिक्षा, ऊर्जा और ग्रामीण विकास में 34 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्‍होंने केंद्र और राजस्‍थान राज्‍य दोनों में सरकारी वित्‍त को प्रबंधित किया है। भारत सरकार में उन्‍होंने आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) में निदेशक, व्‍यय विभाग (डीओई) में संयुक्‍त सचिव, वित्‍त मंत्रालय और राजस्‍थान राज्‍य में सचिव (व्‍यय), सचिव (बजट) और प्रधान वित्‍त सचिव के रूप में विभिन्‍न पदों पर कार्य किया। उन्‍होंने केंद्र सरकार में संयुक्‍त सचिव (कृषि) और अपर सचिव (मंत्रिमंडल) के रूप में अन्‍य वरिष्‍ठ पदों पर भी सेवाएं प्रदान कीं।

श्री राजीव कुमार

श्री राजीव कुमार ने 12 सितंबर 2017 को सचिव, वित्‍तीय सेवाएं विभाग, वित्‍त मंत्रालय, भारत सरकार का कार्यभार ग्रहण किया।

श्री राजीव कुमार को कई क्षेत्रो में प्रशासन और लोक-नीति का 33 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्‍होंने बिहार, झारखंड के राज्‍य सरकारों और केंद्र सरकार में विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य किया जैसे कि उप आयुक्‍त, रांची जनपद; निदेशक, उद्योग, बिहार; निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, बिहार; संयुक्‍त सचिव, वित्‍त मंत्रालय, व्‍यय विभाग। व्‍यय विभाग में संयुक्‍त सचिव के रूप में उन्‍होंने राज्‍य वित्‍त, बचत, राज्‍य उधार और नकदी प्रबंधन, ऋण राहत उपाय, पीएफएमएस, खजानों का कंप्‍यूटरीकरण, वित्‍त आयोग प्रभाग आदि से संबंधित उत्‍तदायित्‍वों का निवर्हन किया। डीओपीटी में स्‍थापना अधिकारी एवं अपर सचिव के रूप में वे सिविल सेवा बोर्ड (सीएसबी) के सदस्‍य सचिव; कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) के सचिव थे और उन पर सभी मंत्रालयों, उनके पीएसयू, संबद्ध और अधीनस्‍थ कार्यालयों में जेएस और उससे ऊपर की पदोन्‍नति, पैनल तैयार करने और पदस्‍थापन से संबंधित सभी एसीसी प्रस्‍तावों को संसाधित करने का उत्‍तरदायित्‍व था।

श्री राजीव कुमार मानव संसाधन के इष्‍टतम उपयोग संबंधी कार्य बल के अध्‍यक्ष थे और उन्‍होंने ‘अधिकतम शासन, न्‍यूनतम सरकार’ का उद्देश्‍य प्राप्‍त करने के लिए समस्‍त मंत्रालयों में व्‍यापक सुधार से संबंधित रिपोर्ट प्रस्‍तुत किया। वे नीति आयोग के पुनर्गठन से संबंधित कार्य बल के भी सदस्‍य थे। श्री राजीव कुमार ने बीएससी, एलएलबी, पीजीडीएम तथा लोक-नीति एवं संधारणीयता (सस्‍टेनेबिलिटी) में एमए किया है।

डॉ. प्रसन्‍न कुमार मोहंती

डॉ. प्रसन्‍न कुमार मोहंती हार्वर्ड विश्‍वविद्यालय में पोस्‍ट-डॉक्‍टोरल सदस्‍य थे। उन्‍होंने दिल्‍ली स्‍कूल ऑफ इकोनॉमिक्‍स से स्‍नातकोत्‍तर (अर्थशास्‍त्र), बोस्‍टन विश्‍वविद्यालय से स्‍नातकोत्‍तर (राजनीतिक अर्थशास्‍त्र) और शहरी लोक नीति और वित्‍त में विशेषज्ञता सहित - पीएचडी (अर्थशास्‍त्र) किया। वे जनसंख्‍या परिषद, न्‍यूयार्क के भी सदस्‍य थे। वर्तमान में वे हैदराबाद विश्‍वविद्यालय में अर्थशास्‍त्र के चेयर प्रोफेसर, और सुशासन केंद्र (सीजीजी) और राष्‍ट्रीय शहरी प्रबंध संस्‍थान (एनआईयूएम), हैदराबाद के मानद सलाहकार हैं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (1979 बैच) के अधिकारी, डॉ. मोहंती संयुक्‍त आंध्र प्रदेश राज्‍य सरकार के अंतिम मुख्‍य सचिव थे। यह पद उनके द्वारा भारत सरकार का सचिव बनने के बाद धारित किया गया था। उनके द्वारा धारित अन्‍य पदों में अग्रलिखित पद शामिल हैं : मिशन निदेशक, जवाहरलाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम), भारत सरकार; विशाखापत्‍तनम और हैदराबाद नगर निगमों के आयुक्‍त; उपाध्‍यक्ष, हैदराबाद शहरी विकास प्राधिकरण; महानिदेशक, सुशासन केंद्र (सीजीजी), हैदराबाद, और जिला कलेक्‍टर और मजिस्‍ट्रेट, गुंटूर, आंध्र प्रदेश। वे राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण नीति समिति, बीपीएल परिवारों की पहचान के लिए विशेषज्ञ समिति, विकेंद्रीकृत योजना विशेषज्ञ दल आदि सहित राष्‍ट्रीय स्‍तर की कई विशेषज्ञ समितियों के सदस्‍य रहे हैं। विशाखापत्‍तनम और हैदराबाद नगर निगमों में शहरी वानिकी हेतु उनकी पहलों के लिए दो बार प्रधानमंत्री पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ।

डॉ. मोहंती ने ''फाइनेंसिंग सिटीज इन इंडिया : म्‍यूनिसिपल रिफॉर्म्‍स, फिस्‍कल एकाउंटीबिलिटी एंड अर्बन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर’’ – सेज प्रकाशन (2016) और ''सिटीज एंड पब्लिक पालिसी: एन अर्बन एजेंडा फॉर इंडिया’’ – सेज प्रकाशन (2014) नामक पुस्‍तकें लिखी हैं। उन्‍होंने ''अर्बनाइजेशन इन इंडिया: चैलेंजेज, ऑपरच्‍युनिटीज एंड द वे फॉर्वर्ड’’ – सेज प्रकाशन (2014) का सह-संपादन किया है। उन्‍होंने भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निष्‍पादित और प्रकाशित मौलिक अध्‍ययन : “भारत में नगर वित्‍त – एक मूल्‍यांकन’’ (2007) का नेतृत्‍व किया। वर्तमान में उनकी शोध रूचि राजकोषीय संघवाद, शहरी नियोजन और विकास, बुनियादी संरचना वित्‍त, सुशासन और लोक नीति सुधारों में हैं।

श्री दिलीप एस. शंघवी

श्री दिलीप एस. शंघवी, 62, सन फार्मास्‍यूटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। यह कंपनी उच्‍च-गुणवत्‍तायुक्‍त, किफायती दवाएं उपलब्‍ध करती है जिस पर विश्‍व के 150 से अधिक देशों के ग्राहकों और मरीजों द्वारा भरोसा किया जाता है। श्री शंघवी सन फार्मा एडवांस्‍ड रिसर्च कंपनी लिमिटेड के अध्‍यक्ष और प्रबंध निदेशक भी हैं; यह एक अंतरराष्‍ट्रीय दवा कंपनी है जो दवाओं के अनुसंधान और विकास तथा वितरण प्रणालियों के क्षेत्र में कार्य कर रही है।

पिछले कुछ दशकों में, श्री शंघवी को कई पुरस्‍कार और सम्‍मान प्रदान किए गए है जिनमें निम्‍नलिखित शामिल है:

  • 2016 में पद्म श्री

  • वर्ष-2017 का एआईएमए-उद्यमी

  • वर्ष-2014 के लिए फोर्ब्‍स उद्यमी

  • आउटस्‍टैंडिंग बिजनेस लीडर ऑफ द इयर – 2014, सीएनबीसी – टीवी18

  • द इकोनामिक टाइम्‍स बिजनेस लीडर ऑफ द इयर, 2014

  • एआईएमए (अखिल भारतीय प्रबंध संघ) – जेआरडी टाटा कार्पोरेट लीडरशिप अवार्ड, 2014

  • बिजनेस स्‍टैंडर्ड कंपनी ऑफ द इयर, 2013

  • द इकोनॉमिक टाइम्‍स कंपनी ऑफ द इयर, 2013

  • एनडीटीवी प्राफिट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड 2012, फार्मास्‍यूटिकल्‍स

  • आईबीएलए आउटस्‍टैंडिंग कंपनी ऑफ द इयर – 2012, सीएनबीसी –टीवी18

  • बिजनेस इंडिया – बिजनेसमैन ऑफ द इयर, 2011

  • सीएनएन आईबीएन इंडियन ऑफ द इयर, 2011 – बिजनेस

  • वर्ष के अर्न्स्ट एंड यंग उद्यमी, भारत – 2010

  • वर्ष के उद्यमी - इनोनॉमिक टाइम्‍स, 2008

  • वर्ष के सीईओ- बिजनेस स्‍टैंडर्ड, 2008

  • वर्ष के प्रथम पीढ़ी के उद्यमी – सीएनबीसी – टीवी18 आईबीएलए – 2007

श्री शंघवी इंडियन फार्मास्‍यूटिकल अलायंस (आईपीए) के पूर्व अध्‍यक्ष हैं।

श्री सतीश काशीनाथ मराठे

श्री सतीश काशीनाथ मराठे ने अपना बैंकिंग कैरियर बैंक ऑफ इंडिया में शुरू किया। वे 2002 से 2006 तक यूनाइटेड वेस्‍टर्न बैंक लिमिटेड के अध्‍यक्ष और सीईओ तथा 1991-2001 के दौरान जनकल्‍याण सहकारी बैंक लिमिटेड के सीईओ थे। एक संक्षिप्‍त अवधि के लिए, वे महाप्रबंधक के रूप में डीएनबीएस लिमिटेड के साथ संबद्ध थे।

श्री सतीश मराठे सहकारी क्षेत्र के एक एनजीओ सहकार भारती के संस्‍थापक सदस्‍य हैं। वे सहकारी क्षेत्र में अध्‍ययन और अनुसंधान करने के लिए भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत प्रतिष्‍ठान सहकारिता अध्‍ययन और अनुसंधान केंद्र के संस्‍थापक निदेशक हैं।

वर्तमान में, श्री सतीश मराठे राष्‍ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के निदेशक, राष्‍ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) की कार्यपालक समिति के सदस्‍य और पालघर जिले के जवाहर तहसील में मूक-बधिर जनजातीय बच्‍चों के आवासीय विद्यालय, प्रगति प्रतिष्‍ठान के अध्‍यक्ष हैं।

श्री सतीश काशीनाथ मराठे भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के माननीय सचिव (2001), आईबीए की प्रबंध समिति के सदस्‍य और अर्थशास्त्रियों की समिति के भी सदस्‍य, निजी क्षेत्र बैंक संघ के अध्‍यक्ष (2005-06), कमजोर और रुग्‍ण शहरी सहकारी बैंकों के संबंध में महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा गठित उच्‍च अधिकार-प्राप्‍त समिति के सदस्‍य (2001), राजकोट नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड के बोर्ड पर निदेशक, ठाणे भारत सहकारी बैंक लिमिटेड के बोर्ड पर विशेषज्ञ निदेशक, महाराष्‍ट्र राज्‍य सहकारी परिषद के सदस्‍य (1995-99), एपेक्‍स बैंक ऑफ अर्बन बैंक्‍स ऑफ महाराष्‍ट्र एंड गोवा लिमिटेड के निदेशक, और राष्‍ट्रीय युवा सहकारी समिति लिमिटेड के निदेशक जैसे विभिन्‍न पदों पर रहे।

1 फरवरी 1950 को जन्‍मे, श्री सतीश काशीनाथ मराठे ने मुंबई विश्‍वविद्यालय से वाणि‍ज्‍य और कानून (जीईएन.) में स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त की। उन्‍होंने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में डिप्‍लोमा (गोल्‍ड मेडलिस्‍ट) भी किया है।

प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी
डॉ. सचिन चतुर्वेदी नई दिल्‍ली संस्थित एक स्‍वायत्‍त विचारक मंडल ‘विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस)’ में महानिदेशक हैं। वे येल विश्‍वविद्यालय में मैकमिलन सेंटर फॉर इंटरनेशनल अफेयर्स में ग्‍लोबल जस्टिस फेलो भी थे। वे विकास सहयोग नीतियों और दक्षिण-दक्षिण सहयोग से संबं‍धित मुद्दों पर कार्य करते हैं। उन्‍होंने डब्‍ल्‍यूटीओ पर विशेष फोकस के साथ व्‍यापार और नवाचार सहबद्धताओं पर भी कार्य किया है। डॉ. चतुर्वेदी ने जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (जेएनयू) में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में सेवा प्रदान की है और अन्‍य संगठनों के साथ-साथ, संयुक्‍त राष्‍ट्र खाद्य और कृषि संगठन, विश्‍व बैंक, यूएन-ईएससीएपी, यूनेस्‍को, ओईसीडी, राष्‍ट्रमंडल सचिवालय, आईयूसीएन, भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा पर्यावरण और वन मंत्रालय में परामर्शदाता के रूप में भी कार्य किया है। वे एम्‍स्‍टर्डम विश्‍वविद्यालय में विकासशील देश फेलो (1996), उच्‍चस्‍तरीय अध्‍ययन संस्‍थान, शिमला में विजिटिंग फेलो (2003) और जर्मन विकास संस्‍थान में विजिटिंग स्‍कॉलर (2007) रहे हैं। उनके अनुभव में डच विदेश मंत्रालय द्वारा समर्थित, विकासशील देशों के लिए अंतरराष्‍ट्रीय विकास सहयोग और जैव प्रौद्योगिकी पर परियोजना पर एम्‍स्‍टर्डम विश्‍वविद्यालय में कार्य करना शामिल है। वे आईडीएस बुलेटिन (यूके) के संपादकीय सलाहकार बोर्ड पर हैं और एशियाई जैव प्रौद्येगिकी विकास समीक्षा के संपादक हैं। विभिन्‍न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कई शोध लेखों के प्रकाशन के अतिरिक्‍त, उन्‍होंने नौ पुस्‍तकों को लिखा एवं संपादित किया है।
सुश्री रेवती अय्यर

सुश्री रेवती अय्यर पूर्व उप नियंत्रक और महालेखापरीक्षक – सरकारी लेखा (दिसंबर 2013 - मई 2014) थीं। इससे पहले, वे अपर उप नियंत्रक और महालेखापरीक्षक – पूर्वी राज्‍य (सितंबर 2012 - दिसंबर 2013) थीं और वह आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी राज्‍यों के लेखे पर सीएजी लेखापरीक्षा रिपोर्टों के लिए उत्‍तरदायी थीं। अक्‍तूबर 2007 - मार्च 2012 के दौरान, सुश्री अय्यर ने परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार में संयुक्‍त सचिव के रूप में सेवा प्रदान की और उक्‍त विभाग में नीति निर्माण/पर्यवेक्षण, कार्यक्रम/गतिविधियों के बजट एवं कार्यान्‍वयन का कार्य निष्‍पादित किया।

सुश्री रेवती अय्यर ने 1980 में भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा सेवा में कार्य ग्रहण किया तथा महाराष्‍ट्र और दिल्‍ली लेखा और लेखापरीक्षा कार्यालय में सहायक महालेखाकार (1981-1984), दिल्‍ली, आंध्र प्रदेश और मध्‍य प्रदेश में क्षेत्र लेखापरीक्षा और लेखा कार्यालयों में उप महालेखाकार / वरिष्‍ठ उप महालेखाकार (1984 -1990), उप सचिव (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) (1990-1994), सहायक नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (एन) (1994 - 1996), प्रधान/मुख्‍य लेखापरीक्षक (केंद्रीय रेलवे – जुलाई 1996 - जुलाई 1998) और उत्‍तरी रेलवे (जुलाई 1998 - मार्च 2001), प्रधान निदेशक (स्‍टाफ) (अप्रैल 2001 - मार्च 2003), भारतीय उच्‍चायोग में मंत्री (लेखापरीक्षा) (अप्रैल 2003 - मार्च 2005), प्रधान वाणि‍ज्यिक लेखापरीक्षा निदेशक और पदेन सदस्‍य, लेखापरीक्षा बोर्ड - ।।, मुंबई (अप्रैल 2005 - अक्‍तूबर 2007) जैसे पदों को धारित किया।

सुश्री अय्यर सरकारी लेखा मानकों को औपचारिक रूप देने और समान सामान्‍य लेखा मानकों के ढांचे के तहत सरकार के विभिन्‍न स्‍कंधों में प्रचलित लेखा प्रणाली और प्रक्रियाओं को एकीकृत करने के लिए 2002 में गठित सरकारी लेखा मानक सलाहकार बोर्ड (जीएएसएबी) की अध्‍यक्ष थीं।

सेवानिवृत्ति के बाद, उन्‍होंने एक अंतरराष्‍ट्रीय एनजीओ (इनजेंडर हेल्‍थ) में निदेशक वित्‍त और परिचालन के रूप में सितंबर 2015 से मार्च 2017 तक कार्य किया।

दिनांक 28 मई 1954 को जन्‍मीं, सुश्री रेवती अय्यर ने दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय से रसायन शास्‍त्र में स्‍नात्‍कोत्‍तर किया है।

श्री स्‍वामीनाथन गुरुमूर्ति

श्री स्‍वामीनाथन गुरुमूर्ति [69] एक सनदी लेखाकार और उच्‍च श्रेणी के कार्पोरेट एवं विधि परामर्शदाता हैं।

पेशेवर विशेषज्ञता

1972 में अखिल भारतीय श्रेणी के साथ सीए की इंटरमीडिएट और अंतिम दोनों परीक्षाओं में उत्‍तीर्ण होने के उपरांत, वे पिछले 42 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं।

श्री गुरुमूर्ति कानून एवं वित्‍त तथा कॉर्पोरेट को प्रभावित करने वाले समष्टि आर्थिक मुद्दों से संबंधित विषयों में बहुत सारे कॉर्पोरेट के प्रतिष्ठित परामर्शदाता हैं। एक पेशेवर विशेषज्ञ के रूप में उन्‍होंने कुछ जटिल कॉर्पोरेट मामलों में मध्‍यस्‍थता की है और उनका समाधान किया है।

शैक्षणिक गतिविधियां

पेशेवर परामर्शदाता होने के अलावा, वे एक कुशाग्र शिक्षाविद भी हैं। वे अर्थशास्‍त्र, व्‍यवसाय, वित्‍त और प्रबंध के भारतीय मॉडलों पर आईआईटी बॉम्‍बे के विजिटिंग प्रोफ़ेसर रहे हैं। वे वर्तमान में सास्त्र विश्वविद्यालय, तंजौर में विधि नृविज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं।

आनुभविक अध्ययन

भू राजनीतिक और रणनीतिक मामलों के कुशाग्र चिंतक होने के कारण, वे दिल्‍ली स्थित प्रतिष्ठित रणनीतिक थिंक टैंक, विवेकानंद अंतरराष्‍ट्रीय फाउंडेशन के उपाध्‍यक्ष हैं।

बहुत सारे कॉर्पोरेट के परामर्शदाता होने और बृहत राष्‍ट्रीय हित से प्रभावित होने के कारण, श्री गुरुमूर्ति ने अर्थव्‍यवस्‍था पर भूमंडलीकरण के प्रभाव तथा निर्देशित अर्थव्‍यवस्‍था की आदी आर्थिक एवं राजनीतिक संस्‍कृति का अध्‍ययन करना शुरू किया।

1993 से, श्री गुरुमूर्ति और उनके स्‍वयंसेवकों की टीम, जिसमें अर्थशास्‍त्री, सनदी लेखाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे, बहुत सारे औद्योगिक समूहों के पास गई, जो सरकारी सहायता अथवा बैंकिंग और शैक्षिक संस्‍थाओं सहित किसी संस्‍थागत सहायता के बिना अपने बल पर स्‍थापित हुए हैं। 40 से अधिक महत्वपूर्ण औद्योगिक समूहों उत्तर में लुधिना, बटाला, अमृतसर, राजकोट, सूरत, बड़ौदा, मोरवी और पश्चिम में तिरुपुर, नामक्कल, करूर, शिवकाशी और तुतुकुडी की यात्रा करने में उन्हें अगले कई वर्षों तक अध्ययन करना पड़ा। इस अध्‍ययन में आगरा और कानपुर का दलित प्रधान चर्मोद्योग समूह भी शामिल था। इन औद्योगिक समूहों जिसमें 10000 से अधिक संख्‍या में कारीगर-समूह शामिल हैं, का भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद में 50% से अधिक तथा विनिर्माण और निर्यात में 60% योगदान है।

आनुभविक अध्‍ययन से गैर-कॉर्पोरेट अर्थव्‍यवस्‍था के चार पहलुओं का पता चला, जिसके बारे में उस समय तक बहुत कम ज्ञात था। पहला, जाति और उद्यमिता के बीच गहरा संबंध है। दूसरा, इसके परिणामस्‍वरूप सामुदायिक प्रतिस्‍पर्धा हुई, जिससे उद्यमिता का विकास हुआ। तीसरा, जातियों ने पूंजी जुटाई और उसे परिचालित किया तथा आपस में सूचना का आदान-प्रदान किया। चौथा, एक समूह में जाति द्वारा निर्मित संपत्ति को अन्‍य जातियों के साथ तुरंत साझा किया गया, जो बहुत सारे समूहों से स्‍पष्‍ट है। अध्‍ययन से पता चला कि भारत इतना जटिल, विशाल और विविधतापूर्ण देश है कि इसकी विविधता को समझे बिना, इसके लिए एक सामान्‍य नीति नहीं बनाई जा सकती है।

अध्‍ययन के बहुत सारे निष्‍कर्षों का बाद में विश्‍व बैंक द्वारा अपने विश्‍व विकास रिपोर्ट में समर्थन किया गया। गुरूमूर्ति के नेतृत्‍व वाले अध्‍ययन दल ने उद्यमिता और कारोबार के विकास एवं प्रभावपूर्ण वृद्धि के संबंध का पता लगाया। उक्‍त अध्‍ययन में विकास के प्रमुख प्रेरक के तौर पर सामाजिक पूंजी पर ध्‍यान दिया गया – इस विचार को बाद में फ्रांसिस फुकुयामा के लेखन में उनकी प्रसिद्ध पुस्‍तक ट्रस्‍ट में अभिव्‍यक्‍त किया गया। बाद में ऐसे तथा समान विषयों पर बहुत सारी पुस्‍तकें लिखी गईं।

उक्‍त अध्‍ययन से बचत व परिवार-प्रेरित उद्यमिता के वित्‍तपोषण में पारंपरिक परिवार की और महिलाओं की भूमिका का भी पता चला। इससे श्री गुरुमूर्ति की राय पारंपरिक अर्थशास्‍त्रियों की राय से भिन्‍न हो गई, जिन्‍होंने पाया कि पारंपरिक अर्थशास्त्रियों की धारणा भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर उनकी बुनियादी समझ की अपेक्षा सिद्धांतों में ज्यादा गहरी है।

पत्रकारिता और सक्रियता

पिछले तीन दशकों से श्री गुरुमूर्ति को अपने अन्‍वेषणात्‍मक लेखन के लिए पत्रकार के रूप में उच्‍च सम्‍मान प्राप्‍त है। उन्‍होंने तभी से उच्‍च स्‍थानों पर व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध निरंतर अभियान चलाया है। वे राष्‍ट्रीय महत्‍व के विषयों पर विशेष रूप से अर्थशास्‍त्र के क्षेत्र में भारत में एक प्रभावशाली अभिमत निर्माता रहे हैं। वे अभी प्रसिद्ध और प्रभावशाली सामाजिक-राजनीतिक साप्‍ताहिक तमिल पत्रिका तुगलक के संपादक हैं।

मीडिया रेटिंग

श्री गुरुमूर्ति को मीडिया द्वारा 1990 से अब तक निरंतर प्रभावशाली पाया गया। द बिज़नेस बैरन पत्रिका ने श्री गुरुमूर्ति के अर्थशास्‍त्र, वित्‍त और लेखा संबंधी ज्ञान को ‘आउटस्‍टैंडिंग’ दर्जा प्रदान किया है। उन्‍हें 1990 में भारत के 50 सर्वाधिक प्रभावशाली व्‍यक्तियों के बीच [जेंटलमैन मैगजी़न]; 2004 में 8वें सर्वाधिक प्रभावशाली व्‍यक्ति के रूप में [बिज़नेस बैरन पत्रिका]; 2005 में 17वें सर्वाधिक प्रभावशाली व्‍यक्ति के रूप में [इंडिया टुडे पत्रिका]; 2015 में 50वें सर्वाधिक प्रभावशाली व्‍यक्ति के रूप में [इंडिया टुडे]; 2016 में 25वें सर्वाधिक प्रभावशाली व्‍यक्ति के रूप में [इंडिया टुडे] और 2017 में 30वें सर्वाधिक प्रभावशाली व्‍यक्ति के रूप में [इंडिया टुडे] स्‍थान दिया गया।

 

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