| श्री आनंद गोपाल महिंद्रा |
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श्री आनंद महिंद्रा, महिंद्रा समूह और महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के अध्यक्ष हैं। उनके कार्यकाल में समूह ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑटोमोबाइल और कृषि से लेकर आईटी और एयरोस्पेस तक विभिन्न प्रकार के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में विस्तार किया है। समूह, स्वराज ट्रैक्टर, रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी, सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज, प्यूज़ो मोटरसाइकिल, एयरोस्टाफ ऑस्ट्रेलिया, हॉलिडे क्लब रिसॉर्ट्स और पिनिनफेरिना एस.पी.ए. जैसे अधिग्रहणों के माध्यम से इनॉर्गेनिक रूप से भी विकसित हुआ है।
उन्होंने कई प्रभावशाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों में कार्य किया है। इनमें संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पेक्ट बोर्ड, विदेश संबंध परिषद के वैश्विक सलाहकार बोर्ड, विश्व बैंक समूह के एडवाइजरी बोर्ड फॉर डूइंग बिजनेस और सिंगापुर के आर्थिक विकास बोर्ड का अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद शामिल है। वे भारतीय उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष रहे हैं और उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के बोर्ड में कार्य किया है। वे वर्तमान में इन्वेस्ट इंडिया, नेशनल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन एजेंसी के बोर्ड में हैं।
श्री महिंद्रा को 'व्यापार और उद्योग' के क्षेत्र में राष्ट्र के लिए उनके योगदान हेतु भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण पुरस्कार (2020) से सम्मानित किया गया है। उन्हें दुनिया भर में शीर्ष 30 सीईओ की बैरन की सूची (2016) और फॉर्च्यून पत्रिका की दुनिया के 50 महानतम नेताओं की सूची (2014) में नामित किया गया है। उन्हें एशियन सेंटर फॉर कॉरपोरेट गवर्नेस एंड सस्टेनेबिलिटी (2012) द्वारा सर्वश्रेष्ठ परिवर्तनकारी नेता पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें फ्रांसीसी गणराज्य के राष्ट्रपति द्वारा 'नाइट इन द नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर' (2016) नियुक्त किया गया था और इटली के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें 'ग्रैंड ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इटली' (2013) से सम्मानित किया गया था।
श्री महिंद्रा द्विटर पर 8.5 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स के साथ एक कुशाग्र व्यावसायिक टिप्पणीकार और मानवतावादी हैं। उनकी बहुत सारी सामाजिक परिवर्तन पहलों में एक है नन्ही कली कार्यक्रम, जिसने पिछले दो दशकों से 330,000 से अधिक अल्पसुविधा-प्राप्त लड़कियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुंच प्रदान की है। श्री महिंद्रा भारत के अग्रणी गैर सरकारी संगठन नंदी फाउंडेशन के बोर्ड के अध्यक्ष हैं, जो लड़कियों को शिक्षित करने, युवाओं को कौशल प्रदान करने और बायोडायनामिक कृषि के माध्यम से छोटे किसानों को स्थायी आजीविका प्रदान करने पर केंद्रित है। श्री महिंद्रा 2 बिलियन डॉलर के इंपैक्ट फंड, द राइज फंड के संस्थापक बोर्ड में भी कार्यरत हैं।
वे कला और संस्कृति के प्रबल समर्थक हैं। महिंद्रा ब्लूज़, महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स और महिंद्रा सनतकदा भारत में संगीत, थिएटर संस्कृति, कला और इतिहास का उत्सव मनाते हैं और उसका परिपोषण करते हैं। श्री महिंद्रा लिंकन सेंटर, न्यूयॉर्क की वैश्विक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं और इससे पहले लंदन के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के न्यासी बोर्ड में कार्य कर चुके हैं।
2014 में, श्री महिंद्रा ने कबड्डी के प्राचीन और लोकप्रिय भारतीय खेल को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रो कबड्डी लीग की स्थापना की। स्टार टेलीविजन नेटवर्क के माध्यम से टेलीविजन पर प्रसारित होने वाली इस लीग का उद्देश्य क्रिकेट के विपरीत कबड्डी के लिए एक नया लोकप्रिय प्रशंसक वर्ग बनाना है।
श्री महिंद्रा ने हार्वर्ड कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की (1977) और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया (1981)।
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| श्री सोमनाथ श्रीधर पणिक्कर |
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डॉ. श्रीधर पणिक्कर सोमनाथ ने जनवरी 2025 तक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक (शीर्ष) और सचिव, अंतरिक्ष विभाग और अध्यक्ष, इसरो के रूप में कार्य किया। डॉ. एस. सोमनाथ, जिनका करियर लगभग 40 वर्षों का है, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और प्रक्षेपण वाहनों के सिस्टम इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में वह इसरो में प्रो. विक्रम साराभाई प्रोफेसर के रूप में, आईआईएससी, बैंगलोर में प्रतिष्ठित विजिटिंग प्रोफेसर, चाणक्य विश्वविद्यालय, बैंगलोर के कुलाधिपति और आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं।
डीओएस के सचिव के रूप में, उन्होंने राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति, निजी अंतरिक्ष पहलों के साथ इसरो की भागीदारी और अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्ट-अप का संचालन किया था। उनके नेतृत्व में मिशन चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग पूरी हुई। उनके कार्यकाल के दौरान उल्लेखनीय मिशनों में आदित्य- L1, एक्सपोसैट, इनसैट- 3DS, एनवीएस-01, ओशनसैट, जीसैट-24, स्पाडेक्स और एलवीएम3- OneWeb मिशन शामिल हैं। उनके नेतृत्व में लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान और परीक्षण यान विकसित किए गए और पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (आरएलवी-एलईएक्स) के लैंडिंग प्रयोग किए गए। उन्होंने गगनयान की संरचना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पहले मिशन अबोर्ट डेमोस्ट्रेशन को पूरा किया। उन्होंने 'स्पेस विजन-2047' विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें गगनयान विस्तार कार्यक्रम, चंद्रयान शृंखला और अन्य अन्वेषण मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन विकास और चंद्रमा पर मानव मिशन, नए लॉन्च पैड को सरकार द्वारा मंजूरी दी गई थी।
वह 2018-21 के दौरान विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक और 2015-18 के दौरान तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) के निदेशक थे। वह LVM3-X/CARE मिशन के सिस्टम इंजीनियर और परियोजना निदेशक थे, जिसे दिसंबर, 2014 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया था।
डॉ. एस. सोमनाथ ने टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कोल्लम से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में विश्वविद्यालय रैंक के साथ बी.टेक., आईआईएससी, बैंगलोर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर और आईआईटीएम चेन्नई से पीएचडी की। उन्हें 18 विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है।
वह भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी (आईएनएई), भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए), एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एईएसआई), एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई), यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियर्स (यूएस-एनएई) के फेलो हैं और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) के सदस्य हैं। वह एईएसआई के अध्यक्ष (निर्वाचित) और एयरोस्पेस क्वालिटी एंड रिलाएबिलिटी सोसाइटी (एसएक्यूआर) के अध्यक्ष हैं। उन्हें इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिक्स फेडरेशन (आईएएफ) से हॉल ऑफ फेम पुरस्कार, इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) से वॉन-करमन पुरस्कार, एईएसआई से राष्ट्रीय एरोनॉटिक्स पुरस्कार, एएसआई से अंतरिक्ष स्वर्ण पदक, आईआईएससी, बैंगलोर और आईआईटी मद्रास से प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार, आईआईटी कानपुर से प्रतिष्ठित फेलो पुरस्कार, कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार, केरल प्रभा और केरल शास्त्र पुरस्कारम् से सम्मानित किया गया।
उन्होंने संरचनात्मक गतिशीलता और नियंत्रण, मटेरियल मॉडलिंग, पृथक्करण तंत्र के गतिशील विश्लेषण, कंपन और ध्वनिक परीक्षण, प्रक्षेपण वाहन डिजाइन और प्रक्षेपण सेवा प्रबंधन में पत्रिकाओं और सम्मेलनों में पेपर प्रकाशित किए हैं। डॉ. एस. सोमनाथ ने व्यापक रूप से यात्रा की है और अधिकांश वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों और सुविधाओं का दौरा किया है, वह यूएन-सीओपीयूओएस के प्रतिनिधि रहे हैं, इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन (आईएएफ) (आईएएफ) के उपाध्यक्ष रहे हैं और विभिन्न देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्री कांग्रेस (आईएसी) में भाग लिया है। |
| श्री जनमेजय कुमार सिन्हा |
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जनमेजय सिन्हा बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) इंडिया प्रैक्टिस के अध्यक्ष हैं। इससे पहले, उन्होंने 2009-2018 के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और 2006-2018 के बीच फर्म की कार्यकारी समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्होंने दुनिया भर में ग्राहकों की सेवा की है।
वह पेंगुइन द्वारा प्रकाशित "अनटैंगलिंग कॉन्फ्लिक्ट: एन इंट्रोस्पेक्टिव गाइड फॉर फैमिलीज़ इन बिजनेस" और हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू प्रेस द्वारा प्रकाशित "योर स्ट्रेटेजी नीड्स ए स्ट्रेटेजी" के सह-लेखक हैं। उन्होंने वाइली द्वारा प्रकाशित "ओन द फ्यूचर" नामक पुस्तक का सह-संपादन भी किया है। वर्ष 2010 में, कंसल्टिंग मैगज़ीन ने उन्हें दुनिया के शीर्ष 25 सबसे प्रभावशाली सलाहकारों में से एक नामित किया।
वह ऊर्जा, पर्यावरण और जल केंद्र; अनंत केंद्र; सीआईआई-त्रिवेणी जल संस्थान; और सेना बीमा समूह के बोर्ड में सेवारत हैं। वह भारत सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) द्वारा गठित विभिन्न समितियों के सदस्य रहे हैं। वह श्री राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली गैर-वित्तीय विनियामक सुधारों पर उच्च स्तरीय समिति के सदस्य हैं और डिजिटल भुगतान को अपनाने पर मुख्यमंत्रियों की समिति के सदस्य थे। वह कई वर्षों तक भारतीय उद्योग महापरिसंघ (सीआईआई), राष्ट्रीय परिषद के सदस्य रहे हैं।
वर्ष 1998 में बीसीजी में कार्यग्रहण करने से पूर्व, उन्होंने 1996-98 के बीच बोस्टन में बैन एंड कंपनी के साथ कार्य किया था। वर्ष 1992 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय में अपनी पीएचडी करने से पूर्व, उन्होंने 1982 में ग्रेड बी सीधी भर्ती के रूप में प्रारम्भ करते हुए दस वर्षों तक भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ कार्य किया। उन्होंने विभिन्न विभागों और केंद्रों में कार्य किया। अपनी पीएचडी के दौरान उन्होंने दो बार विश्व बैंक में इंटर्नशिप की। डॉ. सिन्हा ने प्रिंसटन स्कूल ऑफ पब्लिक एंड इंटरनेशनल अफेयर्स, प्रिंसटन विश्वविद्यालय, यूएस (1992-96) से पीएचडी, क्लेयर कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, यूके (1984-86) से अर्थशास्त्र में बीए और एमए तथा सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत (1976-81) से इतिहास में बीए और एमए किया है।
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| श्री सैयद अकबरुद्दीन |
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"राजदूत सैयद अकबरुद्दीन कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के संस्थापक डीन हैं। उनका तीन दशकों से अधिक का एक प्रतिष्ठित राजनयिक करियर रहा है। 1985 में भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश करने के बाद, वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद अप्रैल 2020 में सेवानिवृत्त हुए। वह 2012 से 2015 तक भारत के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता थे। वह उन कुछ भारतीय राजनयिकों में से हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र संस्था में एक अंतरराष्ट्रीय सिविल-सेवक के रूप में भी सेवा करने का गौरव प्राप्त है।
वर्ष 2006 से 2011 तक उन्होंने वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में कार्य किया। वह विदेश संबंध और नीति समन्वय इकाई के प्रमुख थे और बाद में आईएईए के महानिदेशक के विशेष सहायक भी थे। उन्होंने 2000 से 2004 तक सऊदी अरब के जेद्दाह में भारत के महावाणिज्य दूत के रूप में भी कार्य किया है। इस्लामाबाद (1998-2000) में भारतीय उच्चायोग में काउंसलर के रूप में सेवा करने के साथ वह भारत और पाकिस्तान के बीच प्रमुख मुद्दों से अच्छी तरह परिचित हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव (1995-98) के रूप में कार्य किया है। वह 1997-98 के दौरान संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष संस्था, प्रशासनिक और बजटीय प्रश्नों पर सलाहकार समिति (एसीएबीक्यू) के सदस्य थे। अपनी सेवानिवृत्ति के बाद से उन्होंने वैश्विक सार्वजनिक नीति के मुद्दों पर व्यापक रूप से लिखा और बात की है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्नातकोत्तर उपाधि अर्जित की है।“
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| श्री संजय लोहिया |
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श्री संजय लोहिया, आईएएस अधिकारी, 1994 बैच (असम मेघालय कैडर) ने वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय में विशेष सचिव के रूप में कार्यग्रहण किया और जून 01, 2026 से सचिव, वित्तीय सेवाएं विभाग का कार्यभार ग्रहण किया है। डीएफ़एस में विशेष सचिव के रूप में कार्यग्रहण करने से पूर्व, वह खान मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात थे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक करने के बाद वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल हुए। उन्होंने कई पदों पर कार्य किया, जिनमें असम सरकार के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव, पीएमओ में निदेशक आदि शामिल हैं।
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