अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली में बड़ी राशि की लेनदेनों के लिए विधिक संस्था पहचानकर्ता (एलईआई)

(12 अगस्त 2021 तक अद्यतन)

1. एलईआई क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

उत्तर. विधिक संस्था पहचानकर्ता (एलईआई) एक 20-अक्षर का अल्फा-न्यूमेरिक कोड है जिसका उपयोग दुनिया भर में वित्तीय लेनदेनों से जुड़े पक्षों की विशिष्ट रूप से पहचान करने के लिए किया जाता है । इसे बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए वित्तीय डेटा रिपोर्टिंग प्रणाली की गुणवत्ता और सटीकता में सुधार के लिए लागू किया गया है । इसका उपयोग वैश्विक संदर्भ डेटा प्रणाली सृजित करने के लिए किया जाता है जो किसी भी क्षेत्राधिकार में प्रत्येक विधिक संस्था की विशिष्ट रूप से पहचान करता है जो किसी वित्तीय लेनदेन से जुड़ा एक पक्ष है । इसे वैश्विक विधिक संस्था पहचानकर्ता फाउंडेशन (जीएलईआईएफ) द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी स्थानीय परिचालन इकाई (एलओयू) से प्राप्त किया जा सकता है, जिस इकाई को एलईआई के कार्यान्वयन और उपयोग का समर्थन करने का काम सौंपा गया है । भारत में, एलईआई विधिक संस्था पहचानकर्ता इंडिया लिमिटेड (एलईआईएल) (https://www.ccilindia-lei.co.in) से प्राप्त किया जा सकता है, जिसे रिज़र्व बैंक द्वारा एलईआई के जारीकर्ता के रूप में भी मान्यता प्राप्त है ।

2. किस लेनदेनों में एलईआई सूचना शामिल होनी चाहिए?

उत्तर. संस्थाओं (गैर-व्यक्तियों) द्वारा किए गए 50 करोड़ और उससे अधिक के सभी एकल भुगतान लेनदेनों में विप्रेषक और लाभार्थी से संबंधित एलईआई जानकारी शामिल होनी चाहिए। यह एनईएफटी और आरटीजीएस भुगतान प्रणालियों के माध्यम से किए गए लेनदेन पर लागू होता है ।

आरटीजीएस के मामले में, ग्राहक भुगतान और अंतर-बैंक लेनदेन दोनों में, जो उपरोक्त मानदंड को पूरा करते हों, एलईआई जानकारी शामिल होनी चाहिए ।

3. क्या केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों अथवा विभागों और मंत्रालयों के लिए एलईआई आवश्यक है?

उत्तर. सरकारों अथवा उनके विभागों/मंत्रालयों के लिए एनईएफटी और आरटीजीएस में भुगतान लेनदेन के लिए एलईआई प्राप्त करना अथवा एलईआई नंबर का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है । तथापि, निगमों/उपक्रमों, जिसमें सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाले शामिल हैं, को एलईआई प्राप्त करने की आवश्यकता होगी । एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से सरकारी उपक्रमों और निगमों के 50 करोड़ और उससे अधिक के सभी एकल भुगतान लेनदेनों में विप्रेषक और लाभार्थी से संबंधित एलईआई जानकारी शामिल होगी ।

4. क्या व्यक्तिगत ग्राहक लेनदेन के लिए एलईआई आवश्यक है?

उत्तर. नहीं, जिन मामलों में विप्रेषक और लाभार्थी दोनों व्यक्ति हैं उनमें ग्राहक लेनदेन के लिए एलईआई की आवश्यकता नहीं है । जहां कोई एक अथवा दोनों पक्ष गैर-व्यक्ति हैं, वहां लेनदेन के लिए एलईआई की आवश्यकता होगी ।

5. सदस्य संस्थानों द्वारा एनईएफटी एवं आरटीजीएस तथा संदेशों में एलईआई को पाप्युलेट करने के लिए तकनीकी दिशानिर्देश क्या हैं?

उत्तर.

i. एनईएफटी भुगतान संदेशों में, फ़ील्ड 7495 एक मुफ़्त प्रारूप वैकल्पिक फील्ड है जिसमें 6 पंक्तियाँ होती हैं, जिनमें से प्रत्येक में अल्फान्यूमेरिक विकल्प वाले 35 अक्षर होते हैं । इस फील्ड हॉल की पहली दो पंक्तियों का उपयोग, उसी क्रम में, जहां लागू हो और उपलब्ध हो, विप्रेषक और लाभार्थी ग्राहक एलईआई जानकारी ग्रहण करने के लिए किया जाएगा । जब एलईआई की जानकारी ग्रहण की जाती है, तो विवरण, टिप्पणी आदि फील्ड की अंतिम 4 पंक्तियों का हिस्सा होंगी । विप्रेषक और लाभार्थी की जानकारी निम्नलिखित प्रारूप में ग्रहण की जाएगी:

7495: लाइन 1 -> एसएल/20 अंक का विप्रेषक एलईआई/

लाइन 2 -> बीएल/20 अंक का लाभार्थी एलईआई/

ii. आरटीजीएस में ग्राहक भुगतान और अंतर-बैंक संदेशों में, वैकल्पिक फ़ील्ड "<RmtInf>" में 4 रिपीट टैग होते हैं जिनमें से प्रत्येक में 140 अक्षर होते हैं । इस फील्ड के पहले दो लूप का उपयोग विप्रेषक और लाभार्थी ग्राहक एलईआई की जानकारी, उसी क्रम में, जहां लागू हो और उपलब्ध हो, ग्रहण करने के लिए किया जाएगा । जब एलईआई की जानकारी ग्रहण की जाती है, तो विवरण, टिप्पणी आदि फील्ड की अंतिम दो दोहराए जाने वाले लूप का हिस्सा होंगे । विप्रेषक और लाभार्थी की जानकारी निम्नलिखित प्रारूप में ग्रहण की जाएगी:

<RmtInf> लूप 1 -> /एसएल/20 अंक का विप्रेषक एलईआई/

लूप 2 -> /बीएल/20 अंक का लाभार्थी एलईआई/

6. वे किस प्रकार के खाते हैं जिनके लिए एलईआई दर्ज किया जाना चाहिए?

उत्तर. एलईआई को सभी गैर-व्यक्तिगत एनईएफटी/आरटीजीएस संदेशों/लेनदेनों के लिए रिकॉर्ड किया जाएगा । विधिक संस्था पहचानकर्ता इंडिया लिमिटेड (एलईआईएल) द्वारा https://www.ccilindia-lei.co.in/Documents/FAQs.pdf पर संस्थाओं के प्रकारों की एक सांकेतिक सूची दी गई है ।

7. क्या प्रतिपक्षी एलईआई सूचना अर्थात बैंकों द्वारा आवक लेनदेनों के मामले में विप्रेषक और जावक लेनदेनों में लाभार्थी, को ग्रहण करना आवश्यक है?

उत्तर. विप्रेषण करने वाले बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विप्रेषक और लाभार्थी दोनों के लिए एलईआई की जानकारी ली गई है। तथापि, विप्रेषण और लाभार्थी दोनों बैंकों को 50 करोड़ और उससे अधिक के सभी भुगतान लेनदेनों का अभिलेख रखना चाहिए।

8. क्या उप-सदस्य बैंकों/बैंकों/बीसी/डब्ल्यूएलए आदि जैसे वित्तीय संस्थाओं द्वारा किए गए 50 करोड़ और उससे अधिक के दैनिक परिचालन वाले लेनदेनों को इन दिशानिर्देशों के दायरे से बाहर रखा गया है?

उत्तर. लेनदेनों हेतु लागू प्रकारों के लिए प्रश्न सं. 2 के उत्तर को संदर्भित किया जा सकता है ।

9. क्या एलईआई बैंकों द्वारा उनके आंतरिक भुगतानों, उनके कॉरपोरेट को ऋण संवितरण, मीयादी जमा, परिपक्वता कार्यवाही, खाता बंद करने की कार्यवाही आदि के लिए शुरू किए गए लेनदेनों के लिए लागू होगा ।

उत्तर. लेनदेनों के लागू प्रकार के लिए प्रश्न सं. 2 के उत्तर को संदर्भित किया जाए ।

10. क्या प्रारूप में यह परिवर्तन वेब-एपीआई संदेशों के लिए लागू है?

उत्तर. एलईआई अनुदेश आरटीजीएस से जुडने के लिए उपयोग किए जा रहे सभी चैनलों (इनफिनेट अथवा किसी अन्य अनुमोदित नेटवर्क के माध्यम से) पर लागू हैं, यथा थिक-क्लाइंट, वेब-एपीआई और पेमेंट अरिजनैटर (पीओ) मॉड्यूल ।

ये एफएक्यू आरबीआई द्वारा केवल सूचना और सामान्य मार्गदर्शन देने संबंधी उद्देश्यों के लिए जारी किए जाते हैं । इसके आधार पर की गई कार्यवाहियों और/अथवा निर्णयों के लिए बैंक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा । स्पष्टीकरण अथवा व्याख्या, यदि कोई हो, के लिए किसी व्यक्ति को बैंक द्वारा समय-समय पर जारी प्रासंगिक परिपत्रों और अधिसूचनाओं द्वारा निर्देशित किया जाए ।


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