आरबीआई/2026-27/14
ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र. सं. 07
20 अप्रैल, 2026
सभी प्राधिकृत डीलर
महोदया/महोदय,
जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन
प्राधिकृत डीलरों का ध्यान दिनांक 27 मार्च, 2026 के ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 24, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 के ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 03 और समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 05 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश – जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन की ओर आकृष्ट किया जाता है।
2. समीक्षा करने पर, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 के ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 03 के माध्यम से जारी अनुदेशों को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि प्राधिकृत डीलर, निम्नलिखित को छोड़कर, अपनी संबंधित पार्टियों से भारतीय रुपये से जुड़ी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा नहीं करेंगे:
(i) मौजूदा संविदाओं का निरसन और विस्तारण (रोल-ओवर); और
(ii) समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 05 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश – जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन के अनुसार बैक-टू-बैक आधार पर गैर-संबंधित अनिवासी उपयोगकर्ताओं के साथ किए गए लेनदेन।
3. 'संबंधित पार्टियों' का वही अर्थ होगा जो भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 24 – संबंधित पार्टी प्रकटीकरण या अंतरराष्ट्रीय लेखा मानक (आईएएस) 24 – संबंधित पार्टी प्रकटीकरण या किसी भी अन्य समकक्ष लेखांकन मानकों के अंतर्गत इसे दिया गया है।
4. ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
5. इस परिपत्र में निहित निदेश फेमा, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4), 11(1) और 11(2) के अंतर्गत और किसी अन्य कानून के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति/अनुमोदन, यदि हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गए हैं।
भवदीया,
(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक |