आरबीआई/मुप्रवि/2026-27/393
मुप्रवि (सीसी) सं.G-3/03.06.001/2026-27
अप्रैल 01, 2026
अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक / मुख्य कार्यकारी अधिकारी
विनियमित बैंक
महोदया / प्रिय महोदय,
मुद्रा वितरण और विनिमय के लिए प्रोत्साहन और ग्राहक सेवा प्रदान करने और लेनदेन/शेषों की रिपोर्टिंग
में कमी के लिए बैंक शाखाओं और मुद्रा तिजोरियों के लिए आर्थिक दंडात्मक प्रावधानों पर मास्टर निदेश
भारतीय रिजर्व बैंक, मुद्रा प्रबंधन के अंतर्गत स्वच्छ नोट नीति के उद्देश्यों को पूरा करने और मुद्रा प्रबंधन परिचालन दक्षता में वृद्धि के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की प्रस्तावना एवं धारा 45 तथा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए एवं 56 के अंतर्गत दिशानिर्देश / अनुदेश जारी करता है। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु बैंकों द्वारा मुद्रा तिजोरी स्थापित किए जाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रोत्साहन योजना को प्रतिपादित किया है। साथ ही, मुद्रा तिजोरी द्वारा लेन-देन की सटीक व समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने और मुद्रा तिजोरियों/शाखाओं/बैंक के एटीएम द्वारा उचित ग्राहक सेवाओं को सुनिश्चित के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आर्थिक दंड की योजना भी बनाई गई है।
2. इस विषय पर मौजूदा दिशानिर्देशों / अनुदेशों / निर्देशों और कुछेक उदाहरणों को अद्यतित करते हुए प्रस्तुत / संलग्न मास्टर निदेश तैयार किया गया है ताकि बैंकों को उक्त विषय पर मौजूदा अनुदेशों का संदर्भ एक ही स्थान पर प्राप्त हो सकेI उक्त संदर्भ अनुलग्नक I और अनुलग्नक II में संलग्न हैं। इस मास्टर निदेश के जारी होने के आलोक में उक्त विषय पर उपलब्ध पूर्ववर्ती मास्टर निदेश अप्रभावी होंगे। अप्रभावी मास्टर निदेशों तथा परिपत्रों की सूची अनुलग्नक III में संलग्न हैंI
भवदीया,
(सुमन नाथ)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक: यथोक्त
अनुलग्नक I
मुद्रा वितरण और विनिमय के लिए प्रोत्साहन और ग्राहक सेवा प्रदान करने और लेनदेन/शेषों की
रिपोर्टिंग में कमी के लिए बैंक शाखाओं और मुद्रा तिजोरियों के लिए दंड/दंडात्मक प्रावधानों पर मास्टर
निदेश
अध्याय I - प्रारंभिक
1. संक्षिप्त शीर्षक एवं प्रारंभ
1.1 ये दिशानिर्देश बैंक शाखाओं और मुद्रा तिजोरियों के लिए प्रोत्साहन और दंडात्मक प्रावधानों पर आधारित मास्टर निदेश हैं।
1.2 ये दिशानिर्देश 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।
2. परिचय
2.1 भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (आरबीआई अधिनियम) की प्रस्तावना और धारा 45 तथा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए और धारा 56 के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक, स्वच्छ नोट नीति के उद्देश्यों के अनुरूप और मुद्रा प्रबंधन की परिचालन दक्षता में वृद्धि के लिए दिशानिर्देश/निर्देश जारी करता है।
2.2 इन उद्देश्यों के अनुसरण में, बैंक द्वारा ग्राहकों को बेहतर ग्राहक सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन की रूपरेखा तैयार की गई है।
2.3 साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए कि बैंक शाखाएं ग्राहकों को उचित सेवा प्रदान करें, भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुद्रा तिजोरियों तथा बैंक शाखाओं द्वारा ग्राहक सेवा में कमी के लिए दंड योजना तैयार की है।
2.4 मुद्रा तिजोरियों के सुचारू परिचालन और उनके लेनदेन की समयबद्ध और सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में अद्यतन दिशा-निर्देश इस मास्टर निदेश (Master Direction) में संकलित हैं।
3. दायरा
अध्याय II और अध्याय III में उल्लिखित प्रोत्साहन और दंडात्मक प्रावधान सभी बैंकों पर लागू होंगे। मुद्रा तिजोरियों के परिचालन में कमी के लिए दंडात्मक प्रावधान मुद्रा तिजोरी धारित बैंकों पर लागू होंगे।
4. परिभाषाएँ
4.1. स्वच्छ नोट नीति
यह आरबीआई द्वारा आम जनता को अच्छी गुणवत्ता वाले बैंक नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई नीति है।
4.2. मुद्रा तिजोरी
बैंक नोटों और रुपये सिक्कों के वितरण को सुगम बनाने के लिए, बैंक ने चयनित अनुसूचित बैंकों को मुद्रा तिजोरी (currency chests) स्थापित करने के लिए अधिकृत किया है। ये वे तिजोरियाँ (storehouses) हैं जहाँ भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से बैंक नोटों और रुपये के सिक्कों का स्टॉक रखा जाता है, जिससे उक्त नोटों/ रुपये सिक्कों को कार्यक्षेत्र की बैंक शाखाओं में वितरित किया जा सके।
4.3. पूंजी और राजस्व लागत
पूंजीगत लागत, करेंसी चेस्ट स्थापित करने के लिए आवश्यक अचल संपत्तियों या बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए किया गया एक बार किया गया व्यय है। राजस्व लागत करेंसी चेस्ट के दिन-प्रतिदिन के संचालन और रखरखाव पर होने वाले आवर्ती खर्च हैं। व्यय की वास्तविक प्रकार बैंक को लागत की प्रतिपूर्ति के समय संबंधित निर्गम कार्यालय द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
4.4. समझौता ज्ञापन (MoA)
मुद्रा तिजोरी की स्थापना को लेकर दिए गए आवेदन पर विचार करने के पूर्व, भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित बैंक के बीच एक सामान्य समझौता ज्ञापन दर्ज किया जाता है, जिसमें बैंक को मुद्रा तिजोरियों की ज़िम्मेदारियाँ सौंपने के लिए नियम और शर्तें निर्धारित की जाती हैं।
4.5. संबंधित शाखाएँ
ये वे बैंक शाखाएं हैं जो लिंकेज योजना के तहत आस-पास की मुद्रा तिजोरियों से जुड़ी हुई हैं। यह योजना मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस उद्देश्य से तैयार की गई है कि यथासंभव सभी गैर- मुद्रा तिजोरी बैंक शाखाओं को एक ही केन्द्र पर तिजोरी संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सके।
4.6. गंदे नोट
'गंदा नोट' उस नोट को माना जाता है जो सामान्य रूप से बहुत अधिक इस्तेमाल किये जाने के कारण गंदा हो गया हो। साथ ही उस नोट को भी गंदा नोट माना जाता है जिसे दो टुकडों को चिपकाकर बनाया गया हो जिसमें दोनों टुकड़े एक ही नोट के हों और नोट में सभी आवश्यक सुरक्षा लक्षण मौजूद हों।
4.7. कटे-फटे नोट
‘कटे-फटे (विरूपित) नोट’ का अभिप्राय ऐसे नोट से है जिसका एक हिस्सा गायब हो अथवा जिसके दो टुकड़ों से अधिक टुकड़े हुए हो।
4.8. अपूर्ण नोट
‘अपूर्ण नोट’ से अभिप्राय ऐसे किसी नोट से है, जो पूर्णत: या अंशत: विरूपित, सिकुड़ा हुआ, गला हुआ, परिवर्तित या अस्पष्ट हो, हालांकि इसमें कटा-फटा नोट सम्मिलित नहीं है।
अध्याय II - प्रोत्साहन योजना
स्वच्छ नोट नीति के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, बैंक शाखाओं (सीसी सहित) को बेहतर ग्राहक सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, बैंक शाखाओं व मुद्रा तिजोरियों के लिए मुद्रा वितरण और विनिमय प्रोत्साहन योजना बनाई गई है।
1. प्रोत्साहन
इस योजना के अनुसार, बैंक आवश्यक अवसंरचना की स्थापना तथा नोटों एवं सिक्कों के विनिमय/ वितरण की सुविधा प्रदान करने हेतु, निम्नलिखित वित्तीय प्रोत्साहन/सेवा शुल्क के पात्र हैं:
| क्रम संख्या |
सेवा की प्रकृति |
प्रोत्साहन/सेवा शुल्क के विवरण |
| 1.1 |
उत्तर पूर्वी क्षेत्र/ जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख संघ शासित प्रदेशों के दुर्गम/ पहाड़ी स्थानों (जैसा कि राज्य सरकारों / किसी उचित प्राधिकरण द्वारा माना गया हो) में मुद्रा तिजोरी की स्थापना तथा परिचालन |
क) पूंजीगत लागत: ₹50 लाख (कर सहित) की सीमा के अधीन पूंजीगत व्यय 100% तक प्रतिपूर्ति के पात्र हैं।
ख) राजस्व लागत: मुद्रा तिजोरी परिचालन के प्रथम 5 वर्षों के लिए, 50% राजस्व व्यय प्रतिपूर्ति के पात्र हैं।
(संशोधित निर्देश इन क्षेत्रों में सीसी की स्थापना के लिए 25 अप्रैल, 2025 या उसके बाद प्राप्त होने वाले नए आवेदनों पर लागू होंगे। |
| 1.2 |
बैंक शाखाओं के काउंटरों पर गंदे नोटों का विनिमय / कटे-फटे बैंकनोटों का अधिनिर्णयन |
क) गंदे बैंक नोटों का विनिमय - ₹50/ -और इससे नीचे के मूल्यवर्ग के गंदे बैंकनोटों के विनिमय के लिए प्रति पैकेट ₹2/-
ख) कटे फटे बैंकनोटों का अधिनिर्णयन - प्रति नोट ₹2/- |
| 1.3 |
सिक्कों का वितरण |
क) सिक्कों के वितरण के लिए ₹65/- प्रति बैग1। ख) ग्रामीण तथा अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में सिक्कों के वितरण के संबंध में समवर्ती लेखा-परीक्षक (सीए) द्वारा प्रमाणित प्रमाण प्रस्तुत करने पर ₹10/- प्रति बैग का अतिरिक्त प्रोत्साहन। |
| 1.4 |
मुद्रा तिजोरी लिंकेज योजना के अंतर्गत गैर-तिजोरी शाखाओं द्वारा नकदी जमा करना |
मुद्रा तिजोरी द्वारा गैर तिजोरी शाखाओं को प्रदान की गई सेवाओं के लिए निर्धारित सेवा शुल्क क) विशाल आधुनिक मुद्रा तिजोरी2 - प्रत्येक 100 पीस पर ₹11/- ख) अन्य मुद्रा तिजोरी - प्रत्येक 100 पीस के लिए ₹8/- |
2. कार्य-निष्पादन पर आधारित प्रोत्साहन योजना को लेकर परिचालन दिशानिर्देश
2.1. प्रोत्साहन निम्नलिखित आधार पर प्रदान किए जाएंगे:
2.1.1 भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्गम कार्यालय में प्राप्त गंदे नोट
2.1.2 गंदे नोटों के विप्रेषणों के साथ प्राप्त / अलग से पंजीकृत /बीमाकृत डाक से सीलबंद लिफाफे में भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रेषित अधिनिर्णीत नोट
2.2 मुद्रा तिजोरी से कुल निकासी के आधार पर सिक्कों के वितरण हेतु प्रोत्साहन का भुगतान किया जाएगा।
2.3. बैंको को प्रोत्साहन प्राप्त करने हेतु आरबीआई को इनवॉइस जमा करना होगा।
2.4. मुद्रा तिजोरी धारित शाखाएँ आरबीआई से प्राप्त प्रोत्साहन राशि को सीसी से संबद्ध शाखाओं द्वारा जमा किए गए गंदे /वितरित सिक्कों/अधिनिर्णीत कटे-फटे नोटों के लिए जुड़ी शाखाओं को यथानुपात भुगतान करेंगे।
2.5. सिक्कों के वितरण की पुष्टि भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा मुद्रा तिजोरियों के निरीक्षण / बैंक शाखाओं में आकस्मिक दौरों, आदि के माध्यम से की जाएगी।
अध्याय III – ग्राहक सेवा में कमी और मुद्रा तिजोरी परिचालन दिशा-निर्देश के गैर-अनुपालन के लिए दंडात्मक प्रावधान
बैंक नोटों के निर्गम का अधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है और बैंक इस उत्तरदायित्व का निर्वहन बैंक शाखाओं और एटीएम के विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से नागरिकों को बैंक नोट वितरित कर पूरी कर रहे हैं। बैंक / व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर (WLAOs) एटीएम में नकदी की उपलब्धता की निगरानी और नकदी की अनुपलब्धता (cash-outs) से बचने के लिए यथा-समय आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रणाली को सुदृढ़ करेंगे।
सभी बैंक शाखाएँ 'स्वच्छ नोट नीति' (Clean Note Policy) के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, बैंक नोटों और सिक्कों के विनिमय की सुविधा पर मास्टर निदेश के अनुसार जनता को ग्राहक सेवा प्रदान करेंगे। साथ ही, बैंकों को सीसी की जिम्मेदारियां सौंपने से संबंधित नियम और शर्तें / दिशानिर्देश, मुद्रा तिजोरी धारित बैंकों के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoA) में निर्धारित किए गए हैं और मुद्रा तिजोरी स्थापना की अनुमति देते समय भी सूचित किए गए हैं। इन नियमों और शर्तों / दिशानिर्देशों और ग्राहक सेवाओं के प्रावधानों के अनुपालन की पुष्टि समय-समय पर आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालयों / अधिकारियों द्वारा सीसी के निरीक्षण, बैंक शाखाओं में आकस्मिक दौरों, आदि के दौरान की जाएगी।
नोटों के विनिमय में कमी, एटीएम में नकदी की आपूर्ति, सीसी के परिचालन आदि से संबंधित किसी भी दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए बैंकों पर लगाये जाने वाले दण्ड निम्नानुसार होंगे:
| 1. ग्राहक सेवा में कमी के लिए बैंक शाखाओं पर दंड |
| क्र. सं. |
अनियमितता का प्रकार |
दंड |
| 1.1. |
आरबीआई के अधिकारियों द्वारा विनिमय सुविधा में कमी की पुष्टि, जैसे- क) स्टॉक की उपलब्धता के बावजूद नागरिकों को काउंटर पर सिक्के जारी न करना। ख) नागरिकों और सम्बद्ध शाखाओं द्वारा प्रस्तुत छोटे मूल्यवर्ग के बैंक नोट (₹50 और उससे कम मूल्यवर्ग) के विनिमय/जमा करने के लिए स्वीकार न करना। ग) किसी भी बैंक शाखा3 पर नागरिकों द्वारा प्रस्तुत गंदे/कटे-फटे/अधूरे नोटों के विनिमय से मना करना। |
सेवा में किसी भी कमी के लिए ₹10,000/-
यदि कैलेंडर वर्ष में शाखा द्वारा सेवा में 5 से अधिक बार कमी की पुष्टि होती है या उससे पहले ही, तो ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे जुर्माने को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा।
जुर्माना तुरंत लगाया जाएगा। |
| 1.2 |
एटीएम वितरण / काउंटर पर वितरण में पकड़े गए जाली नोट या बैंकों में पकड़े गए जाली नोटों को जानबूझकर जब्त न करने |
एटीएम वितरण/काउंटर पर वितरण में पाए गए नकली नोटों या बैंकों में पाए गए नकली नोटों को जानबूझकर जब्त न करने के लिए प्रति मामले ₹10,000 (दस हजार रुपये) का मौद्रिक जुर्माना लगाया जाएगा। यह व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों पर भी लागू होगा। |
| 2. एटीएम में गैर-आपूर्ति के लिए दंड |
| क्र. सं. |
अनियमितता का प्रकार |
दंड |
| 2.1 |
एटीएम में 'कैश-आउट' (नकदी की समाप्ति) की घटनाओं की गणना उस स्थिति के आधार पर की जाएगी, जब ग्राहक किसी खास एटीएम में नकदी की अनुपलब्धता के कारण पैसे की निकासी में असमर्थ होगा। |
किसी भी एटीएम में एक महीने में दस घंटे से अधिक समय तक नकदी न होने (कैश-आउट) पर प्रति एटीएम ₹10,000/- का एकमुश्त जुर्माना लगाया जाएगा। यह नियम व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों (WLAOs) पर भी लागू होगा। |
इस उद्देश्य के लिए, बैंक/WLAO को एटीएम में नकदी की कमी के कारण एटीएम के बंद रहने की स्थिति में सिस्टम द्वारा तैयार किया गया विवरण आरबीआई के उस क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करना होगा जिसके अधिकार क्षेत्र में ये एटीएम स्थित हैं। बैंकों/WLAO को उन एटीएम के बंद रहने के कुल घंटों की रिपोर्ट देनी होगी जहाँ एटीएम एक माह में 10 घंटे से अधिक नकदी अनुपलब्धता के कारण बंद रही हो। यह विवरण प्रत्येक माह के लिए अगले माह के पांच दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
| 3. मुद्रा तिजोरियों के परिचालन में कमी के लिए दंड |
| क्र. सं. |
अनियमितता का प्रकार |
दंड |
| 3.1. |
गंदे नोटों के विप्रेषण(SNRs) में बैंक नोटों की कमी और मुद्रा तिजोरी शेष में बैंक नोटों और सिक्कों की कमी |
₹50/- तक के मूल्यवर्ग के नोटों के लिए हानि की राशि के अतिरिक्त प्रति नोट ₹50/-।
₹100/- एवं उससे अधिक मूल्यवर्ग के नोटों के लिए हानि के अतिरिक्त प्रति नोट के मूल्यवर्ग के मूल्य के बराबर।
सभी मूल्यवर्ग के सिक्कों के लिए
हानि के अतिरिक्त प्रति सिक्के के मूल्यवर्ग के मूल्य के बराबर। हानि की वसूली तथा दण्ड का काम, कमी का पता लगते ही, नोटों की संख्या को ध्यान में रखे बिना, तुरंत किया जाएगा। उपरोक्त आर्थिक जुर्माना उन्हीं मूल्यवर्गों पर लगाया जाएगा जिनमें कमी पाई गई है, भले ही उस Sएनआर के किसी अन्य मूल्यवर्ग में कितनी भी अतिरिक्त राशि (excess) क्यों न उपलब्ध हो। दंड आरोपण के समय अतिरिक्त राशि के मूल्य को नुकसान की राशि के साथ समायोजित (adjust) किया जाएगा। |
| 3.2. |
गंदे नोटों के विप्रेषण में जाली नोटों की पुष्टि |
₹5, ₹10 और ₹20 के मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली।
₹50 का मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली के अतिरिक्त, जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 50% दंड।
₹100 और उससे अधिक का मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली के अतिरिक्त, निम्नलिखित संरचना के अनुसार एकल प्रेषण में किसी विशेष मुद्रा तिजोरी के लिए भा.रि.बैं. में संसाधित प्रति मिलियन (सीपीएम4) गंदे नोटों के जाली नोटों से जुड़ा एक श्रेणीबद्ध जुर्माना:
| सीपीएम |
दंड |
| सीपीएम < 5 |
जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 100% दंड। |
| 5 ≤ सीपीएम< 20 |
जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 150% दंड। |
| सीपीएम ≥ 20 |
जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 200% दंड। |
|
| 3.3. |
भारतीय रिज़र्व बैंक के निरीक्षण/ऑडिट के दौरान सीसी बैलेंस में जाली बैंक नोट का पाया जाना |
₹5, ₹10 और ₹20 के मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली।
₹50 का मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली के अतिरिक्त, जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 50% दंड।
₹100 और उससे अधिक का मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली के अतिरिक्त, जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 200% दंड। |
| 3.4. |
गंदे नोट विप्रेषणों और मुद्रा तिजोरी शेषों में पाए गये कटे-फटे नोट (जानबूझ कर काटे गए तथा बनाए गए नोटों सहित) |
हानि के अतिरिक्त मूल्यवर्ग को ध्यान में रखे बिना निरपेक्ष रूप से प्रति नोट ₹50/-।
हानि की वसूली तथा दण्ड का आरोपण, पता लगते ही, नोटों की संख्या को ध्यान में रखे बिना, तुरंत किया जाएगा। |
| 3.5. |
आरबीआई अधिकारियों सीसी में परिचालनात्मक अनुदेशों का गैर-अनुपालन का पाया जाना, जैसे - क) सीसीटीवी कार्यरत न होना, सीसीटीवी से संबन्धित नियमों / दिशानिर्देशों, रिकॉर्डिंग परिरक्षण अवधि तथा संबन्धित मामलों का पालन न करना। ख) शाखा नकदी/दस्तावेजों को स्ट्रॉन्ग रूम (मुद्रा तिजोरी वॉल्ट) में रखना ग) नोटों की छंटाई के लिए नोट सॉर्टिंग मशीन (एनएसएम) का उपयोग न करना (उच्च मूल्यवर्ग के नोटों की छंटाई के लिए एनएसएम का उपयोग नहीं करना अर्थात ₹100 तथा इससे अधिक मूल्यवर्ग के नोट जो काउंटर से प्राप्त किए गए हैं अथवा मुद्रा तिजोरी/आरबीआई को विप्रेषित किए गए नोटों की छंटाई के लिए उपयोग नहीं करना), निर्धारित मानदंड के अनुसार नोट सॉर्टिंग मशीन को अद्यतित न करना, इत्यादि घ) मुद्रा तिजोरी शेषों का, (i) उसकी अभिरक्षा से असंबद्ध अधिकारियों द्वारा द्विमासिक अंतराल पर और (ii) नियंत्रक कार्यालय के अधिकारियों द्वारा छ: माह के अंतराल पर, आकस्मिक सत्यापन न किया जाना। |
अनियमितता के प्रत्येक मामले में ₹5,000/- का जुर्माना। यदि लगातार निरीक्षण चक्रों में या उससे पहले अनियमितता की पुनरावृत्ति होती है, तो जुर्माना ₹10,000/- तक की वृद्धि की जाएगी।
जुर्माना तुरंत लगाया जाएगा। |
| 3.6. |
आरबीआई के अधिकारियों द्वारा आरबीआई के साथ किये गये करार (मुद्रा तिजोरियां खोलने और उनके रखरखाव के लिए) की किसी भी शर्त का उल्लंघन पाए जाने पर जैसे कि: क) अन्य बैंकों की संबद्ध शाखाओं को सुविधाएं/सेवाएं देने से इनकार करना। ख) मुद्रा तिजोरी शाखाओं द्वारा तैयार किये गये पुन: जारी करने योग्य नोटों के पैकेटों में आरबीआई द्वारा कटे-फटे, निर्मित, जाली नोट पाया जाना। |
अनुबंध के उल्लंघन या सेवा में कमी के लिए ₹10,000/-।
यदि मुद्रा भंडार/शाखा द्वारा लगातार निरीक्षण चक्रों या उससे पहले 5 से अधिक बार अनुबंध का उल्लंघन/सेवा में कमी होती है, तो ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे जुर्माने को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा।
जुर्माना तुरंत लगाया जाएगा। |
अध्याय IV – मुद्रा तिजोरी में लेनदेन/शेष राशि की रिपोर्टिंग के लिए दंडात्मक प्रावधान
मुद्रा तिजोरी के सुचारु परिचालन और सीसी लेनदेन की समयबद्ध और सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश लागू होंगे।
1. रिपोर्टिंग प्रक्रिया
1.1 लेनदेन की न्यूनतम राशि
मुद्रा तिजोरी में जमा/मुद्रा तिजोरियों से आहरण करने की न्यूनतम राशि ₹50,000/- होगी और उसके उपरांत ₹10,000/- के गुणकों में होगी।
1.2 रिपोर्टिंग समय सीमा
मुद्रा तिजोरियाँ सभी लेनदेनो की रिपोर्टिंग अनिवार्य रूप से सीवायएम – सीसी पोर्टल माध्यम से उसी दिन शाम 7 बजे तक करेंगी।
1.3 रविवार या अवकाश के दिन सीसी की रिपोर्टिंग
यदि स्थानीय अवकाश के दिन विशेष मुद्रा तिजोरी को संचालन की अनुमति है और सीवाईएम पोर्टल उपलब्ध है, ऐसी स्थिति में सीसी उसी दिन लेनदेन को रिपोर्ट करेंगे। यदि उस दिन सीवाईएम पोर्टल उपलब्ध नहीं है (वैश्विक अवकाश/माह के दूसरे या चौथे शनिवार/रविवार के कारण), तो सीसी दिन के मूल्यवर्ग-वार समेकित जमा और/ या आहरण राशि और मूल्यवर्ग-वार तिजोरी जमा शेष को सायं 7 बजे तक संबंधित निर्गम कार्यालय को ईमेल के माध्यम से और अगले कार्यदिवस पर उक्त लेनदेन को सीवाईएम पोर्टल पर रिपोर्ट करेंगे।
1.4 कारोबार निरंतरता योजना (बिसनेस कंटिन्यूइटी प्लान-बीसीपी)
लेनदेन रिपोर्टिंग और अन्य अनुरोधों के लिए सीवाईएम सीसी पोर्टल में समग्र देश में एक बैंक के उपयोगकर्ता को बदलने/इंटरचेंज करने की क्षमता है (तत्पर संदर्भ के लिए उपयोगकर्ता पुस्तिका संलग्न है)। यदि कोई सीसी, कनेक्टिविटी या अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण सीवाईएम पोर्टल में दैनिक लेनदेन की रिपोर्ट करने में असमर्थ है, तो बैंक का बैक ऑफिस (बीओ) प्रशासक उस बैंक के दूसरे सीसी के यूजर आईडी को कनेक्टिविटी समस्या वाले सीसी से दैनिक लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए मैप कर सकता है। लेन-देन के पूरा होने पर उपयोगकर्ता अधिकार मूल सीसी में बहाल हो जाएंगे। कार्य का यह आयाम सीसी को विलंबित/रिपोर्टिंग न करने और परिणाम स्वरूप दंडात्मक कार्रवाई से बचने में मदद करेगी। लेखापरीक्षा प्रयोजनों के लिए ऐसे प्राधिकारणों का उचित रेकॉर्ड रखा जाएगा। मुद्रा तिजोरी धारक बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे इस पहलू को अपनी सीसी कारोबार निरंतरता योजना (बीसीपी) में शामिल करें। हड़ताल की स्थिति में, रिपोर्टिंग की अवधि में छूट देने पर विचार परिस्थितिवार आधार पर किया जाएगा।
2. दंडात्मक ब्याज लगाना
2.1 मुद्रा तिजोरियों के लेन-देन की विलंबित/गलत रिपोर्टिंग
बैंकों के चालू खाते (करेंट अकाउंट) में डेबिट/क्रेडिट मुद्रा तिजोरी द्वारा रिपोर्ट किए गए लेन-देन के आधार पर किए जाते हैं, इसलिए यह अपेक्षा की जाती है कि मुद्रा तिजोरियाँ सीवाईएम-सीसी पोर्टल पर रिपोर्ट किए गए आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा जाए कि आरबीआई/नोट मुद्रणालय से मुद्रा तिजोरियों को विप्रेषित नए/पुनः जारी किए जाने योग्य नोटों के विप्रेषण को 'जमा' लेन-देन के रूप में रिपोर्ट न किया जाए। लेन-देन की विलंबित/गलत रिपोर्टिंग के कारण यदि बैंक के चालू खाते में 'गलत’ क्रेडिट हुई है, तो उन सभी मामलों में दंडात्मक ब्याज आरोपित किया जाएगा।
2.2 मुद्रा तिजोरी शेषों में अनुचित राशियों का समावेश
(i) केवल उस नकद को जो संयुक्त अभिरक्षकों की संरक्षणा में है और उनके पास 'स्वतंत्र रूप से उपलब्ध' है, तिजोरी शेष में शामिल किये जाने योग्य हैइस प्रकार, तिजोरी के बाहर/ सीसीटीवी कैमरों के आवरण के बाहर रखी गई नकद/ किसी भी कारण से बंद लिफाफों में सुरक्षित रखी गई नकद/ ट्रंकों में/ एकल ताले में/ अनलॉक की गई/ किसी अधिकारी की चाबी वाले बिनों में रखी गई नकद जो संयुक्त अभिरक्षकों के अलावा किसी अन्य अधिकारी की हो या संयुक्त अभिरक्षकों के दो तालों के अतिरिक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा लगाए गए तीसरे रखे गए नकद को तिजोरी शेष में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। यदि ऐसी राशियों को तिजोरी शेष में शामिल किया जाता है, तो इन्हें गलत रिपोर्टिंग के मामले के रूप में माना जाएगा।
(ii) उपरोक्त सभी मामलों में (नकदी/विप्रेषण में कमी, चोरी/धोखाधड़ी के कारण कमी, नकदी/विप्रेषण में पाए गए जाली नोटों को छोड़कर), “अयोग्य” राशि को तिजोरी शेषों में शामिल किये जाने की तारीख से लेकर तिजोरी शेष से यह राशि निकाल दिये जाने की तारीख तक के लिए निम्नलिखित दंडात्मक ब्याज लगाया जाएगा
| क्रमांक |
अनियमितता की प्रकृति |
दंड प्रावधान |
| 1. |
मुद्रा तिजोरी लेनदेन की विलंबित/गलत रिपोर्टिंग |
सीसी द्वारा लेनदेन की विलंबित/गलत रिपोर्टिंग की स्थिति में, सीसी द्वारा देय राशि पर, विलंब की अवधि/रिज़र्व बैंक द्वारा सही सूचना प्राप्त होने की तिथि तक, प्रचलित बैंक ब्याज दर से 2% अधिक की दर से दंडात्मक ब्याज आरोपित की जाएगी। दंडात्मक ब्याज की गणना T+0 के आधार पर की जाएगी (T लेनदेन की तिथि है)। |
3. दण्ड लगाना
3.1 भारतीय रिज़र्व बैंक को गंदे नोटों के विप्रेषण की रिपोर्टिंग
भारतीय रिज़र्व बैंक को विप्रेषित गंदे नोटों को मुद्रा तिजोरी द्वारा निकासी के रूप में रिपोर्टिंग नहीं की जाएगी और उल्लंघन की स्थिति में दंड आरोपित किया जाएगा।
3.2 सीवायएम – सीसी पोर्टल में विचलनों की रिपोर्टिंग
सभी मुद्रा तिजोरियों के विचलनों (उस बैंक की तिजोरियों के बीच तथा अन्य बैंकों की तिजोरियों के बीच) को सीवाईएम – सीसी पोर्टल के ‘विचलन’(डायवर्जन मॉड्यूल) के माध्यम से रिपोर्ट किया जाएगा। विचलन प्रेषित करने वाली सीसी प्रविष्टि प्रारम्भ करेगी तथा प्राप्तकर्ता सीसी इसकी प्राप्ति सूचना देगी। विचलन को जमा/निकासी के रूप में रिपोर्ट नहीं किया जाएगा और ऐसी किसी भी गलत रिपोर्टिंग के मामले में दंड आरोपित किया जाएगा।
3.3 ‘देरी से रिपोर्टिंग जहां मुद्रा तिजोरियों के पास “निवल जमा” है
रिपोर्टिंग में देरी के मामलों में, जहां मुद्रा तिजोरी ने “नेट डिपॉज़िट’” रिपोर्ट किया है, दण्डात्मक ब्याज आरोपित नहीं किया जाएगा। यद्यपि, मुद्रा तिजोरी के लेन देन की रिपोर्टिंग को सुचारू रूप से अनुशासित करने के लिए मुद्रा तिजोरियों को देरी से रिपोर्टिंग करने के लिए निम्नलिखित समान दर से दण्ड आरोपित किया जाएगा।
| क्रमांक |
अनियमितता का प्रकार |
दंड प्रावधान |
| 1 |
क. गंदे नोट के विप्रेषण का आरबीआई को निकासी के रूप में रिपोर्टिंग। ख. सीवाईएम-सीसी पोर्टल में जमा/निकासी के रूप में विचलन/विषयांतर की रिपोर्टिंग। ग. मुद्रा तिजोरी में "नेट डिपॉज़िट" होने पर लेनदेन की रिपोर्टिंग में विलंब। |
इसमें शामिल राशि चाहे कितनी भी हो, ₹50,000/- राशि का दंड आरोपित किया जाएगा। |
अध्याय V - दंड/दंडात्मक ब्याज आरोपण संबंधी परिचालन दिशानिर्देश
1. सक्षम प्राधिकारी
अनियमितता के प्रकार पर निर्णय लेने और उस पर दंडात्मक ब्याज/जुर्माना लगाने के लिए सक्षम प्राधिकारी उस क्षेत्रीय कार्यालय के निर्गम विभाग के प्रभारी अधिकारी होंगे, जिनके क्षेत्राधिकार में में चूक करने वाला मुद्रा तिजोरी/बैंक शाखा/एटीएम स्थित है।
2. अपीलीय प्राधिकारी
सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के खिलाफ मुद्रा तिजोरी/ बैंक शाखा के नियंत्रक कार्यालय द्वारा डेबिट/ दंड आरोपित करने की तारीख से एक माह के भीतर, क्षेत्रीय निदेशक/ मुख्य महाप्रबंधक/ संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अधिकारी को अपील की जा सकती है, जो यह निर्णय लेंगे कि इसे पूर्ण या आंशिक रूप में स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है। अपील नियमित रूप से या सामान्य कारणों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए।
3. दंड/दंडात्मक ब्याज से छूट के लिए अपील संबंधी सामान्य दिशानिर्देश
3.1 कर्मचारियों के नए/अप्रशिक्षित होने, जागरूकता की कमी, सुधारात्मक कार्रवाई की गई/की जाएगी आदि आधारों पर दंड की छूट के लिए की गई अपीलों पर विचार नहीं किया जाएगा।
3.2 सीवाईएम में कारोबार निरंतरता क्षमता के प्रावधान कारण, लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए आरबीआई द्वारा लगाए गए दंड के निर्णय पर पुनर्विचार के लिए बैंकों द्वारा अनुरोध करने का प्रसंग नहीं बनता है। तथापि, पहाड़ी/दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित मुद्रा तिजोरियों और प्राकृतिक आपदाओं आदि से प्रभावित बैंकों द्वारा वास्तविक कठिनाइयों के कारण किया गया अनुरोध अपीलीय प्राधिकारी को प्रेषित किया जा सकता है।
3.3 किसी भी दंड/दंडात्मक ब्याज से छूट के अनुरोध पर केवल तभी विचार किया जाएगा, जब उसके लिए आवेदन सीवाईएम-सीसी पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा के भीतर दिया गया हो। केवल उन बैंकों को, जिनके पास सीवाईएम-सीसी पोर्टल के क्रेडेंशियल नहीं हैं, संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से छूट का अनुरोध करने की अनुमति होगी। किसी अन्य तरीके से किए गए छूट के अनुरोधों पर विचार नहीं किया जाएगा।
3.4 गलत रिपोर्टिंग के मामले में, छूट के लिए अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।
3.5 चूंकि दंडात्मक ब्याज/दंड लगाने का उद्देश्य बैंकों में अनुशासन बनाए रखना है, जिससे समयबद्ध/सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सके, इसलिए बैंकों द्वारा दंडात्मक ब्याज की छूट के लिए, देरी से/गलत रिपोर्टिंग के कारण आरबीआई के धन का उपयोग नहीं हुआ या सीआरआर/एसएलआर के रखरखाव में कमी नहीं आई या वे लिपिकीय गलतियों, अनिच्छा से हुई या गणितीय त्रुटियों, पहली बार की गलती, कर्मचारियों की अनुभवहीनता, डिजिटल प्रमाणपत्र की समाप्ति आदि के कारण आदि तर्कों पर आधारित अनुरोध को दंडात्मक ब्याज की छूट के लिए वैध आधार के रूप में नहीं माना जाएगा।
3.6 एटीएम मे यथासमय मुद्रा की गैर-आपूर्ति, दंड आरोपण की स्थिति में अपील पर विचार केवल उन्हीं मामलों में किया जाएगा जिनमें दिए गए दलील बैंक/डब्ल्यूएलएओ के नियंत्रण में न हों और कारण वास्तविक हों, जैसे कि राज्य/प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लॉकडाउन लागू करना, हड़ताल आदि।
अनुलग्नक II
उदाहरण
क. मुद्रा तिजोरियों के लिए प्रोत्साहन
1. उत्तर पूर्वी क्षेत्र में/ जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख संघ शासित प्रदेशों के दुर्गम/ पहाड़ी स्थानों (जैसा कि राज्य सरकारों / किसी उचित प्राधिकरण द्वारा माना गया हो) पर मुद्रा तिजोरी की स्थापना तथा परिचालन
उदाहरण 1: पूंजीगत व्यय की प्रतिपूर्ति
बैंक द्वारा खर्च और दावा की गई पूंजीगत लागत: ₹75 लाख (कर सहित) (क)
प्रतिपूर्ति की जाने वाली पूंजीगत लागत: (क) का 100% (प्रति मुद्रा तिजोरी ₹50 लाख की सीमा के अधीन) = ₹50 लाख (कर सहित)
उदाहरण 2: राजस्व व्यय की प्रतिपूर्ति
| दावा किए गए व्यय का प्रकार |
अवधि |
दावा की गई राशि (कर सहित)
(क) |
प्रतिपूर्ति की गई राशि (कर सहित)
(क) का 50% |
| राजस्व लागत |
पहला वर्ष |
₹15 लाख |
₹7.5 लाख |
| दूसरा वर्ष |
₹16 लाख |
₹08 लाख |
| तीसरा वर्ष |
₹16 लाख |
₹08 लाख |
| चौथा वर्ष |
₹17 लाख |
₹8.5 लाख |
| पांचवा वर्ष |
₹18 लाख |
₹09 लाख |
2. बैंक शाखाओं के काउंटरों पर गंदे नोटों का विनिमय/कटे-फटे बैंकनोटों का अधिनिर्णयन:
उदाहरण 1: बैंक शाखाओं के काउंटरों पर गंदे नोटों के विनिमय के लिए प्रोत्साहन
| प्राप्त गंदे नोटों के प्रेषण का विवरण |
| मूल्यवर्ग |
₹10/₹20/₹50 |
₹100 |
| |
परिद्रश्य 1 |
परिद्रश्य 2 |
|
| नोटों की संख्या |
5500 |
7500 |
5000 |
| पैकेटों की संख्या |
55 |
75 |
50 |
| कुल विसंगतियाँ (कमी / कटे-फटे / जाली) की संख्या |
110 |
75 |
245 |
| प्रोत्साहन हेतु विचार किये गये कुल बैंकनोट |
5390 |
7425 |
NA |
| प्रोत्साहन हेतु विचार किये गये कुल पैकेट |
53 |
74 |
NA |
| प्रोत्साहन राशि * (कर पुर्व) |
106 |
148 |
NA |
| * @ ₹2 प्रति पैकेट |
उदाहरण 2: बैंक शाखाओं के काउंटरों पर कटे-फटे बैंक नोटों का अधिनिर्णयन के लिए प्रोत्साहन
| नोटों की संख्या |
400 |
| कुल विसंगतियाँ (कमी / जाली) की संख्या |
05 |
| प्रोत्साहन हेतु शामिल पीस |
395 |
| प्रोत्साहन राशि * (कर पुर्व) |
790 |
| * @ ₹2 प्रति नोट |
3. सिक्कों के वितरण के लिए प्रोत्साहन:
उदाहरण:
कुल संख्या
(जमा) |
कुल संख्या
(निकासी) |
कुल बैग
(जमा) |
कुल बैग
(निकासी) |
नेट स्टैंडर्ड बैग
(निकासी) |
| 4000 |
2500 |
1.6 |
1 |
-0.6 |
| 0 |
7500 |
0 |
3 |
3 |
| 2000 |
4000 |
1 |
2 |
1 |
| कुल (दशमलव सहित कुल योग) |
3.4 |
| प्रोत्साहन के लिए विचार किए गये नेट बैग (केवल पूर्ण बैग शामिल किये गये) |
3 |
शहरी क्षेत्र में सिक्कों का वितरण: 3 बैग के लिए प्रोत्साहन राशि, ₹65 प्रति बैग: ₹195 (कर पूर्व)
अर्ध-शहरी/ग्रामीण क्षेत्र में सिक्कों का वितरण: 3 बैग के लिए प्रोत्साहन राशि, ₹75 प्रति बैग: ₹225 (कर पूर्व)
नोट: 50 पैसे के सिक्कों के 5000 पीस; ₹1, ₹2 या ₹5 के सिक्कों के 2500 पीस; ₹10 या ₹20 के सिक्कों के 2000 पीस, को एक बैग माना जाएगा।
ख. सार्वजनिक सदस्यों को ग्राहक सेवा प्रदान करने में कमी के लिए बैंक शाखाओं और मुद्रा भंडारों के लिए दंड
1. गंदेनोट विप्रेषण (SNRs) और मुद्रा तिजोरी में नोट और सिक्कों की कमी के लिए दंड:
| परिदृश्य |
हानि की वसूली* |
जुर्माने की राशि* |
| गंदे नोट विप्रेषण में ₹20 के अंकित मूल्य के 200 नोटों की कमी का पता चला |
हानि की वसूली ₹4,000/- (₹20*200) |
जुर्माने की राशि ₹10,000/- (₹50*200) |
| गंदे नोट विप्रेषण में ₹100 के अंकित मूल्य के 50 नोटों की कमी का पता चला |
हानि की वसूली ₹5,000/- (₹100*50) |
जुर्माने की राशि ₹5,000/- (₹100*50 |
| ₹100 मूल्यवर्ग में 80 नोटों की कमी मुद्रा तिजोरी शेष में पाई गई |
हानि ₹8,000/- (₹100*80) तुरंत भरपूर की जाएगी |
जुर्माना राशि ₹8,000/- (₹100*80) |
| ₹100 मूल्यवर्ग में 50 नोटों की कमी और ₹200 मूल्यवर्ग में 20 नोटों की अधिशेष मुद्रा तिजोरी शेष/ गंदे नोट विप्रेषण में पाने पर |
चूंकि कमी की राशि अधिशेष की राशि से अधिक है, इसलिए कुल कमी की राशि (₹5000-₹4000 = ₹1000) बैंक के चालू खाते से वसूल (डेबिट) की जाएगी। यह लेनदेन तत्काल किया जाएगा। |
50 पीस की कमी के लिए जुर्माना राशि ₹5,000/- (₹100*50) |
| ₹10 मूल्यवर्ग में 100 नोटों की कमी और ₹20 मूल्यवर्ग में 50 नोटों की अधिकता (नेट शेष मिलता है) सीसी शेष में पाई गई। |
चूंकि कमी की राशि अधिशेष की राशि के बराबर है, इसलिए बैंक के चालू खाते में कोई वसूली (डेबिट) या अतिरिक्त क्रेडिट नहीं किया जाएगा। |
100 पीस की कमी के लिए जुर्माना राशि ₹5,000/- (₹50*100) |
| ₹50 मूल्यवर्ग में 100 नोटों की कमी और ₹100 मूल्यवर्ग में 100 नोटों का अधिशेष (नेट अधिशेष शेष) सीसी शेष में पाया गया। |
चूंकि अतिरिक्त राशि कमी राशि से अधिक है, इसलिए कुल अतिरिक्त राशि (₹10,000-₹5000 = ₹5000) बैंक के चालू खाते में जमा की जाएगी। |
100 पीस की कमी के लिए जुर्माना राशि ₹5,000/- (₹50*100) |
| * आरोपण/क्रेडिट लेनदेन तुरंत किया जाएगा। जुर्माने की गणना लॉट की पूरी प्रक्रिया के बाद शुद्ध कमी/घाटे के आधार पर की जाएगी। |
2. गंदे नोटों (जिनमें जानबूझकर काटे गए नोट और बनाए गए नोट शामिल हैं) के लिए जुर्माना, जो गंदे नोट के विप्रेषण और मुद्रा तिजोरी के शेष में पाए गए हैं
| परिदृश्य |
हानि वसूली |
जुर्माने की राशि |
| ₹200 मूल्यवर्ग में 200 टुकड़े फटे नोट पाए गए |
हानि की वसूली ₹40,000/- (₹200*200) |
जुर्माने की राशि ₹10,000/- (₹50*200) |
3. जाली बैंक नोटों की खोज के लिए जुर्माना
3.1 एटीएम वितरण / काउंटर पर संवितरण में पकड़े गए जाली नोट या बैंकों में पकड़े गए जाली नोटों को जानबूझकर जब्त न करने के लिए
यदि आरबीआई अधिकारियों द्वारा बैंक के मुद्रा तिजोरी / एफएनवी सेल के निरीक्षण / लेखा परीक्षा के दौरान या जनता से प्राप्त शिकायत के आधार पर निम्नलिखित उल्लंघन की पुष्टि होती हैं:
क. बिना जब्त किए निविदाकर्ता को लौटाए गए जाली नोट
ख. काउंटर पर जाली नोटों का संवितरण
ग. एटीएम के माध्यम से जाली नोटों का वितरण।
ऐसे उल्लंघन के प्रत्येक मामले के लिए, ₹10,000/- का मौद्रिक जुर्माना लगाया जाएगा।
3.2 गंदे नोट विप्रेषण में पाए गए नकली नोट:
एक मुद्रा तिजोरी ने निम्नलिखित गंदे नोट विप्रेषण को प्रसंस्करण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के निर्गम कार्यालय को भेजा है और नीचे उल्लिखित नकली नोट पाए गए हैं:
| मूल्यवर्ग |
₹5 |
₹10 |
₹20 |
₹50 |
₹100 |
₹200 |
₹500 |
₹2000 |
| विप्रेषण में नगद राशि की संख्या |
1,30,000 |
21,50,000 |
13,40,000 |
11,00,000 |
11,92,000 |
90,000 |
1,70,000 |
20,000 |
| प्रसंस्करण के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक में पाए गए जाली नोटों की संख्या |
0 |
0 |
4 |
9 |
40 |
2 |
2 |
1 |
फिर पकड़े गए जाली नोटों के लिए संशोधित प्रावधानों के अनुसार लगाया गया जुर्माना निम्नानुसार होगा:
क. 5, 10 और 20 रुपये के मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली यानी 20*4 = 80 रुपये।
ख. 50 रुपये के मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली यानी 50*9 = 450 रुपये और जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 50% दंड यानी 225 रुपये जुर्माना, यानी कुल 675 रुपये वसूल किए जाएंगे।
घ. ₹100 और उससे अधिक मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली यानी, ₹100*40 + ₹200*2 + ₹500*2 + ₹2000*1 = ₹7400 और सीपीएम के अनुसार दंड 30.57 (>20), यानी जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 200% दंड = ₹14800.
सीपीएम = [(40+2+2+1) * 10,00,000] / [1192000+90000+170000+20000] = 30.57
3.3 भारतीय रिजर्व बैंक के निर्गम कार्यालय द्वारा मुद्रा तिजोरी के लेखा परीक्षा / निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित जाली नोट पाए गए:
| मूल्यवर्ग |
₹5 |
₹10 |
₹20 |
₹50 |
₹100 |
₹200 |
₹500 |
₹2000 |
| आरबीआई द्वारा निरीक्षण / लेखा परीक्षा के दौरान पकड़े गए नकली नोटों की संख्या |
0 |
4 |
2 |
8 |
16 |
20 |
15 |
10 |
फिर पकड़े गए जाली नोटों के लिए संशोधित प्रावधानों के अनुसार लगाया गया जुर्माना इस प्रकार होगा:
क. ₹5, ₹10 और ₹20 के मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली यानी, ₹10*4 + ₹20*2 = ₹80।
ख. ₹50 का मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली यानी, ₹50*8 = ₹400 और जाली नोटों के अनुमानित मूल्य का 50% दंड यानी ₹200, यानी कुल 600 रुपये वसूल किए जाएंगे।
घ. ₹100 और उससे अधिक मूल्यवर्ग: जाली नोटों के अनुमानित मूल्य की मात्रा तक हानि की वसूली अर्थात ₹100*16 + ₹200*20 + ₹500*15 + ₹2000*10 = ₹33,100 और अनुमानित मूल्य का 200% दंड अर्थात ₹66,200, कुल ₹99,300 वसूल किए जाएंगे।.
4. आरबीआई अधिकारियों द्वारा सीसी के परिचालन दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने पर
आरबीआई अधिकारियों द्वारा मुद्रा भंडारों द्वारा संचालन दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने का पता लगाए जाने में, सीसीटीवी के अक्षम होने, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, संरक्षण अवधि और संबंधित मुद्दों से संबंधित नियम/दिशानिर्देशों के अनुपालन में अनियमितता के मामले में, प्रत्येक अनियमितता के लिए ₹5,000/- का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि लगातार निरीक्षण चक्रों में या उससे पहले अनियमितता की पुनरावृत्ति होती है, तो जुर्माना ₹10,000/- तक बढ़ा दिया जाएगा।
उदाहरण:
| परिदृश्य |
जुर्माना |
| निरीक्षण/ऑडिट के दौरान मुद्रा भंडार में सीसीटीवी अक्षम पाया गया। |
₹5,000/- का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि अगले निरीक्षण चक्र या उससे पहले वही मुद्दा दोबारा होता है, तो ₹10,000/- का जुर्माना लगाया जाएगा। |
| निरीक्षण/ऑडिट के दौरान निर्धारित अवधि से कम अवधि के सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण का अवलोकन किया गया। |
अनुलग्नक III
यह मास्टर निदेश नीचे उल्लिखित परिपत्रों के स्थान पर जारी किया गया है:
1. DCM (CC) No. G-1/03.44.001/2025-26 दिनांक 01 अप्रैल, 2025 – मास्टर निदेश - आम जनता को ग्राहक सेवा प्रदान करने में कमी के लिए मुद्रा तिजोरियों एवं बैंक शाखाओं हेतु अर्थ दण्ड योजना
2. DCM (CC) No. G-2/03.35.01/2025-26 दिनांक 01 अप्रैल, 2025 – मुद्रा तिजोरी में लेनदेन/शेष की रिपोर्टिंग के लिए दंड के प्रावधान पर मास्टर निदेश
3. DCM (CC) No. G-3/03.41.01/2025-26 दिनांक 25 अप्रैल, 2025 – बैंक शाखाओं व मुद्रा तिजोरियों के लिए मुद्रा वितरण और विनिमय योजना हेतु प्रोत्साहन की रूप रेखा पर मास्टर निदेश (29 सितंबर 2025 को अद्यतित)
4. DCM (RMMT) No. S153/11.01.01/2021-22 दिनांक 10 अगस्त, 2021 – एटीएम में नकदी की उपलब्धता की निगरानी
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