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भारतीय रिज़र्व बैंक ने जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, मऊ, उत्तर प्रदेश पर मौद्रिक दंड लगाया

5 जनवरी 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, मऊ, उत्तर प्रदेश
पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 31 दिसंबर 2025 के आदेश द्वारा जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, मऊ, उत्तर प्रदेश (बैंक) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 'अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 2 लाख (दो लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बीआर अधिनियम की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2024 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है।

बैंक:

  1. खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा, जिसकी अवधि छह महीने में कम से कम एक बार होनी चाहिए, के लिए प्रणाली स्थापित करने में विफल रहा; और

  2. अपने ग्राहकों के केवाईसी को समय-समय पर अद्यतन करने में विफल रहा।

यह कार्रवाई, सांविधिक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1846


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