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बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश – दि यू. पी. सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ

11 मार्च 2026

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश –
दि यू. पी. सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ

जन सामान्य के सूचनार्थ एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उप-धारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 11 मार्च 2026 को जारी निदेश संदर्भ सं. LKO.DOS.SED.No.S796/10-12-294/2025-2026 के द्वारा दि यू. पी. सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी को-ओपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ (बैंक) को कतिपय निदेश जारी किए हैं, जिसके तहत दिनांक 11 मार्च 2026 को कारोबार समाप्ति के पश्चात बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक के लिखित रूप में पूर्व अनुमोदन के बिना, कोई भी ऋण और अग्रिम प्रदान या नवीकृत नहीं करेगा, निवेश नहीं करेगा, निधियां उधार लेने और नई जमाराशियों की स्वीकृति सहित किसी दायित्व का वहन नहीं करेगा, किसी भी भुगतान का संवितरण नहीं करेगा या संवितरण करने के लिए सहमति नहीं देगा, चाहे वह अपनी स्वयं की देयताओं और दायित्वों के निर्वहन में हो या अन्यथा रूप में हो, साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक के दिनांक 11 मार्च 2026 के निदेश, जिसकी एक प्रतिलिपि जन सामान्य के अवलोकनार्थ बैंक की वेबसाइट पर/ शाखा परिसर में प्रदर्शित करने के लिए बैंक को निर्देश दी गईहै, में अधिसूचित को छोड़कर कोई समझौता अथवा व्यवस्था नहीं करेगा और अपनी किसी भी संपत्ति या आस्तियों की बिक्री या उनका हस्तांतरण या अन्यथा रूप में उनका निपटान नहीं करेगा। बैंक की वर्तमान नकदी स्थिति को ध्यान में रखते हुए, बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह बचत बैंक या चालू खातों या जमाकर्ता के किसी अन्य खाते से किसी भी राशि की निकासी की अनुमति न दे, लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक के उपरोक्त निदेशों में बताई गई शर्तों के अधीन जमाराशियों के बदले ऋणों को समायोजित करने की अनुमति है। बैंक कुछ आवश्यक मदों, जैसे- कर्मचारियों के वेतन, किराया, बिजली का बिल, आदि के संबंध में व्यय कर सकता है, जैसा कि उक्त निदेशों में विनिर्दिष्ट किया गया है।

2. भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में बैंक की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए इसके बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ विचार-विमर्श किया था। तथापि, पर्यवेक्षी मुद्दों को दूर करने और बैंक के जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए बैंक के द्वारा कोई ठोस प्रयास न किए जाने के कारण इन निदेशों को जारी करना आवश्यक हो गया है।

3. पात्र जमाकर्ता, अपनी जमाराशियों पर जमा बीमा दावा राशि 5,00,000/- (पांच लाख रुपये मात्र) की मौद्रिक सीमा तक निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) से उसी क्षमता में और उसी अधिकार में प्राप्त करने के हकदार होंगे, जैसा कि डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत लागू है। ऐसा जमाकर्ताओं द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने पर और उचित सत्यापन के बाद किया जा सकता है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जमाकर्ता बैंक के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। विस्तृत विवरण डीआईसीजीसी की वेबसाइट www.dicgc.org.in पर भी देखा जा सकता है।

4. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी उपर्युक्त निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकिंग लाइसेंस रद्द करने के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार होने तक उक्त निदेशों में निर्दिष्ट प्रतिबंधों के अधीन रहते हुए अपना बैंकिंग कारोबार करना जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंक की स्थिति की निगरानी करता रहेगा और परिस्थितियों व जमाकर्ताओं के हित में, जैसा भी आवश्यक हो, इन निदेशों में संशोधन सहित आवश्यक कार्रवाई करेगा।

5. यह निदेश दिनांक 11 मार्च 2026 को कारोबार की समाप्ति से छह महीने की अवधि के लिए लागू रहेंगे और आगे समीक्षा के अधीन होंगे।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2252


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