12 मार्च 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि पल्लिकोंडा को-ओपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, तमिलनाडु
पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 9 मार्च 2026 के आदेश द्वारा, दि पल्लिकोंडा को-ओपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, तमिलनाडु (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी 'पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड - प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक (यूसीबी)' तथा 'एक्सपोजर मानदंड और सांविधिक/अन्य प्रतिबंध – शहरी सहकारी बैंक' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹30,000 (तीस हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई के निदेशों के अननुपालन और तत्संबंधी पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है :
बैंक ने:
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न्यूनतम विनियामकीय सीमा से कम सीआरएआर होने के बावजूद अपने सदस्यों को शेयर-पूंजी की वापसी की अनुमति दी थी;
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न्यूनतम विनियामकीय सीमा से कम सीआरएआर होने के बावजूद, ऋण को शेयर से जोड़ने संबंधी मानदंड का पालन किए बिना, कुछ ऋण स्वीकृत किए थे; और
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कुछ नाममात्र-सदस्यों को निर्धारित विनियामकीय सीमा से अधिक ऋण स्वीकृत किए थे।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2255 |