27 मई 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पुणे पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 22 मई 2026 के आदेश द्वारा, श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पुणे (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी 'अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)'; 'जमा खातों का रखरखाव - प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक' और 'बैंकों में निष्क्रिय खाते/अदावी जमा - संशोधित अनुदेश' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹2 लाख (दो लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
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बैंक खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा, जो छह माह में कम से कम एक बार होनी चाहिए, करने में विफल रहा;
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बैंक निर्धारित समय-सीमा के भीतर ग्राहकों के केवाईसी अभिलेखों को केंद्रीय केवाईसी अभिलेखागार (सीकेवाईसीआर) में अपलोड करने में विफल रहा;
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बैंक ने, न्यूनतम शेष राशि का रखरखाव न करने पर, ग्राहकों को सूचित किए बिना, दंडात्मक प्रभार लगाया; और
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बैंक ने, ऐसे खातों की वार्षिक समीक्षा नहीं की जिनमें एक वर्ष से अधिक समय तक ग्राहक-प्रेरित कोई लेनदेन नहीं हुआ था।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/337 |