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वित्तीय बाजार

सुचारू ढ़ंग से कार्य करने वाले, चलनिधि युक्त और लचीले वित्तीय बाजार मौद्रिक नीति अंतरण और भारत के विकास के वित्तपोषण में अपरिहार्य जोखिमों के आवंटन और अवशोषण में सहायता करते हैं।

अधिसूचनाएं


गैर-प्रदेय रुपया व्युत्पन्नी बाजारों में एकल प्राथमिक व्यापारियों की सहभागिता

आरबीआई/2025-26/78
एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.10

22 सितंबर, 2025

सभी प्राधिकृत व्यक्ति

महोदया/महोदय,

गैर-प्रदेय रुपया व्युत्पन्नी बाजारों में एकल प्राथमिक व्यापारियों की सहभागिता

प्राधिकृत व्यक्तियों का ध्यान समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 3 मई, 2000 के विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदा) विनियम, 2000 [दिनांक 3 मई, 2000 की अधिसूचना सं. फेमा 25/आरबी-2000] और समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 05 जुलाई, 2016 के मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंध एवं अंतर-बैंक लेन-देन (इसके पश्चात ‘मास्टर निदेश’ के रूप में संदर्भित) की ओर आकृष्ट किया जाता है।

2. मास्टर निदेश के अंतर्गत, भारत में प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों, जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) बैंकिंग यूनिट (आईबीयू) परिचालित कर रहे हैं, को उपयोगकर्ताओं, आईबीयू परिचालित करने वाले अन्य प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों और विदेशों में बैंकों के साथ रुपया वाली गैर-प्रदेय व्युत्पन्नी संविदाओं (एनडीडीसी) में लेन-देन करने की अनुमति प्रदान की गई है। समीक्षा करने पर, यह निर्णय लिया गया है कि प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–III (एडी श्रेणी-III) के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारी भी रुपया वाली एनडीडीसी में लेन-देन करने के पात्र होंगे।

3. ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। इस मास्टर निदेश को निम्नानुसार अद्यतित किया गया है:

(i) भाग-क (खंड-I) के पैराग्राफ 2.2(vi) में, मौजदा पैराग्राफ के अंत में, निम्नलिखित शब्दों को जोड़ा जाएगा, अर्थात:-

“प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–III के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारियों द्वारा भी ऐसे लेन-देन की पेशकश निवासियों और गैर-निवासियों को की जा सकती है।”

(ii) भाग-क (खंड-I) के पैराग्राफ 2.3(iii) में, “आईएफएससी बैंकिंग इकाई का परिचालन कर रहे प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक” शब्दों के बाद, निम्नलिखित शब्दों को अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-

“और प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–III के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारी”

(iii) भाग-ग के पैराग्राफ 3ए में, “(समय-समय पर यथासंशोधित) में निर्दिष्ट किया गया है)” शब्दों के बाद, निम्नलिखित शब्दों को अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-

“और प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–III के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारी”

(iv) भाग-ग के पैराग्राफ 3ए में, “आईबीयू वाले अन्य प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों,” शब्दों के बाद, निम्नलिखित शब्दों को अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-

“प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–III के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारियों”

4. इस परिपत्र के प्रयोजन से, प्राधिकृत व्यक्तियों का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 10(1) के अंतर्गत एडी श्रेणी-I बैंक और एडी श्रेणी–III के रूप में प्राधिकृत एकल प्राथमिक व्यापारी होगा।

5. इस परिपत्र में निहित निदेश, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45डबल्यू और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 के 42) की धारा 10(4), 11(1) और 11(2) के तहत जारी किए गए हैं और किसी अन्य कानून के अंतर्गत आवश्यक अनुमति/अनुमोदन, यदि कोई हो, के प्रति पूर्वाग्रह के बिना हैं।

भवदीया,

(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक

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