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बैंकिंग प्रणाली का विनियामक

बैंक राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रणाली की नींव होते हैं। बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं सुदृढता को सुनिश्चित करने और वित्‍तीय स्थिरता को बनाए रखने तथा इस प्रणाली के प्रति जनता में विश्‍वास जगाने में केंद्रीय बैंक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

अधिसूचनाएं


भारतीय रिज़व बैंक (व्यापार राहत उपाय) निदेश, 2026

भारिबैं/2025-26/263
विवि.एसटीआर.आरईसी.सं.455/21.04.048/2025-26

31 मार्च 2026

भारतीय रिज़व बैंक (व्यापार राहत उपाय) निदेश, 2026

1. भारतीय रिज़र्व बैंक को विधिक रूप से देश की ऋण प्रणाली को देश के हित में संचालित करने का दायित्व सौंपा गया है। इस क्रम में और पश्चिम एशियाई संकट से उत्‍पन्‍न वैश्विक-राजनीतिक तनावों के कारण बढ़े ऋण-सेवा के बोझ को कम करने और सक्षम व्यवसायों की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट होकर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और समीचीन है, एतद्द्वारा विनिर्दिष्ट निदेश जारी करता है।

2. यह निदेश बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 21, 35ए और 56, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45जेए, 45एल और 45एम और फैक्टर विनियमन अधिनियम, 2011 की धारा 6 द्वारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए जा रहे हैं।

संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ

3. इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (व्यापार राहत उपाय) निदेश, 2026 कहा जाएगा।

4. यह निदेश तत्‍काल से प्रभावी होंगे।

प्रयोज्‍यता

5. यह निदेश निर्यात वित्तपोषण कारोबार करने के लिए पात्र निम्नलिखित विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लागू होंगे:

  1. वाणिज्यिक बैंक

  2. प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक और केंद्रीय सहकारी बैंक

  3. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – फैक्‍टर

  4. अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान

निर्यात ऋण की अवधि का विस्तार

6. आरई 30 जून, 2026 तक संवितरित पोत-लदानपूर्व और पोत-लदानोत्‍तर निर्यात ऋण के लिए 450 दिनों तक की बढ़ी हुई क्रेडिट अवधि की अनुमति दे सकता है।

7. इन निदेशों के जारी होने की तारीख या उससे पहले निर्यातकों द्वारा पहले से ही प्राप्त क्रेडिट सुविधाओं की पैकिंग सुविधाओं के संबंध में, जहां माल का प्रेषण नहीं हो सकता था, आरई किसी भी वैध वैकल्पिक स्रोतों से ऐसी सुविधाओं के परिसमापन की अनुमति दे सकता है, जिसमें ऐसे माल की घरेलू बिक्री अथवा किसी अन्य निर्यात आदेश की आय के साथ संविदा का प्रतिस्थापन शामिल है।

भवदीय,

(वैभव चतुर्वेदी)
मुख्‍य महाप्रबंधक

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