अर्थव्यवस्था के ऐसे क्षेत्रों, जिनका योगदान सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, को बैंकिंग प्रणाली से पर्याप्त रूप में ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र ऋण संबंधी दिशानिर्देशों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। इसमें ऐसे विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है जिनकी ऋण-पात्रता होने के बावजूद ऋण-संबंधी आवश्यकताएं पूरी नहीं होती हैं। वाणिज्यिक बैंकों को भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचे के अंतर्गत आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित पात्र उधारकर्ताओं को सहायता प्रदान करने का भी दायित्व सौंपा गया है।
देश में वित्तीय समावेशन की प्रगति को समग्र रूप से बढ़ाने और बनाए रखने की दृष्टि से वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय रणनीति 2025-30 के कार्रवाई बिंदुओं को लागू करना और एफआई सूचकांक और विखंडित (डिसएग्रीगेटेड) डेटा के माध्यम से वित्तीय समावेशन परिदृश्य में प्रगति की निगरानी करना।
वित्तीय साक्षरता केंद्र के माध्यम से जनता के बीच वित्तीय साक्षरता जागरूकता को मजबूत करना।