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गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियां

यद्यपि यह भूमिका हमारी गतिविधियों का एक ऐसा पहलू है, जिसके संबंध में स्‍पष्‍ट रूप से कहीं उल्‍लेख तो नहीं है, किंतु अति महत्‍वपूर्ण गतिविधियों की श्रेणी में इसकी गिनती की जाती है। इसके अंतर्गत अर्थव्‍यवस्‍था के उत्‍पादक क्षेत्रों को ऋण उपलब्‍धता सुनिश्चित करना, देश की वित्‍तीय मूलभूत संरचना के निर्माण हेतु संस्‍थाओं की स्‍थापना करना, किफायती वित्‍तीय सेवाओं की सुलभता बढ़ाना तथा वित्‍तीय शिक्षण एवं साक्षरता को बढ़ावा देना आदि शामिल हैं।

प्रेस प्रकाशनी


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भारतीय रिज़र्व बैंक ने अवसंरचना संबंधी परियोजनाओं में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के एक्सपोज़र के लिए जोखिम भार के ढांचे पर संशोधन निदेश जारी किए

1 जनवरी 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अवसंरचना संबंधी परियोजनाओं में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के एक्सपोज़र के
लिए जोखिम भार के ढांचे पर संशोधन निदेश जारी किए

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 24 अक्तूबर 2025 को भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी - स्केल आधारित विनियमन) संशोधन निदेश, 2025 का मसौदा हितधारकों की प्रतिक्रिया के लिए जारी किया था। संशोधन निदेशों का उद्देश्य मुख्य रूप से वर्तमान में चल रहे अवसंरचना संबंधी परियोजनाओं से संबंधित वास्तविक जोखिम के साथ जोखिम भार को संरेखित करना था, ताकि इससे बेहतर जोखिम मूल्यांकन और पूंजी आबंटन को बढ़ावा मिल सके।

2. उपर्युक्त मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं की जांच की गई है और इसके परिणामस्वरूप, रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित संशोधनों को अंतिम संशोधन निदेशों में उपयुक्त रूप से शामिल किया गया है। निदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं से संबंधित विवरण अनुबंध में दिए गए हैं।

3. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां - पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) संशोधन निदेश, 2026 और भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां - संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) संशोधन निदेश, 2026 जारी किया है।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1824

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