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शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

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आरबीआई ने सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए विराम (कूलिंग-ऑफ) अवधि पर अंतिम संशोधन निदेश जारी किया

25 मई 2026

आरबीआई ने सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए विराम (कूलिंग-ऑफ) अवधि पर अंतिम संशोधन निदेश
जारी किया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए 8 जनवरी 2026 को भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक – अभिशासन) संशोधन निदेश, 2026 और भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक - अभिशासन) संशोधन निदेश, 2026 का मसौदा जारी किया था। संशोधन निदेशों के मसौदे में यूसीबी और आरसीबी के निदेशकों के लिए, यूसीबी/आरसीबी के बोर्ड में दस वर्षों का निरंतर कार्यकाल पूरा कर लेने के उपरांत, एक विराम अवधि शुरू करने का प्रस्ताव किया गया था, ताकि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 10ए(2ए)(i) में निहित सांविधिक प्रावधान का अक्षरशः कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

2. उपर्युक्त निदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया की जांच की गई है और परिणामस्वरूप, संशोधनों को अंतिम संशोधन निदेशों में उपयुक्त रूप से शामिल किया गया है। संशोधन निदेशों के मसौदे पर प्राप्त प्रतिक्रिया का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

3. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज निम्नलिखित संशोधन निदेश जारी किए हैं:

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक - अभिशासन) संशोधन निदेश, 2026

  2. भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक – अभिशासन) संशोधन निदेश, 2026

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/326

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