17 जुलाई 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुथूट फाइनेंस लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 10 जुलाई 2026 के आदेश द्वारा मुथूट फाइनेंस लिमिटेड (कंपनी) पर आरबीआई द्वारा जारी 'भारतीय रिज़र्व बैंक – अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) निदेश’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹5.80 लाख (पाँच लाख अस्सी हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी(5)एए के साथ पठित धारा 58जी(1)(बी) के अंतर्गत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को कंपनी की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा इसका सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर कंपनी के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
-
कंपनी, खातों के जोखिम-वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा करने हेतु एक प्रणाली स्थापित करने में विफल रही;
-
कंपनी, संदिग्ध लेनदेन की प्रभावी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए एक सुदृढ़ सॉफ्टवेयर को प्रयुक्त करने में विफल रही।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/698 |