भा.रि.बैंक/2025-26/222
केंका.विबाविवि.एमआईओडी.सं.8/11.01.057/2025-26
18 फरवरी, 2026
सभी पात्र बाजार प्रतिभागी
महोदया/महोदय,
ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन के लिए विशिष्ट लेनदेन अभिज्ञापक
विशिष्ट लेनदेन अभिज्ञापक (यूटीआई) की संकल्पना, ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) डेरिवेटिव लेनदेन की रिपोर्टिंग करने के लिए विश्व स्तर पर चिन्हित प्रमुख डेटा तत्वों में से एक के रूप में की गई है ताकि नीति निर्माताओं को ओटीसी डेरिवेटिव बाजार के संबंध में व्यापक दृष्टिकोण मिल सके।
2. वर्तमान में, रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव, सरकारी प्रतिभूतियों में वायदा संविदा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव, विदेशी मुद्रा ब्याज दर डेरिवेटिव और ऋण डेरिवेटिव के लिए ओटीसी बाजारों में सभी लेनदेन क्लियरिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा प्रबंधित ट्रेड रिपॉजिटरी (सीसीआईएल-टीआर) को रिपोर्ट किए जाते हैं। अब ऐसे सभी लेनदेन के लिए यूटीआई को अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन के लिए यूटीआई के कार्यान्वयन के लिए एक रूपरेखा अनुबंध में संलग्न है।
3. ये निदेश 01 जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे और इन निदेशों के प्रभावी होने की तारीख को या इसके बाद किए गए ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन पर लागू होंगे।
4. इस परिपत्र में निहित निदेश भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45यू के साथ पठित धारा 45डब्ल्यू के तहत प्रदत्त शक्तियों और इस संबंध में इसे सक्षम बनाने वाली सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किए गए हैं।
भवदीया,
(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक
(ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन के लिए विशिष्ट लेनदेन अभिज्ञापक पर 18 फरवरी, 2026 के परिपत्र केंका.विबाविवि.एमआईओडी.सं.8/11.01.057/2025-26 का अनुबंध)
1. ये निदेश निम्नलिखित निदेशों (इसके बाद "शासी निदेश") के अनुसार किए गए सभी ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन पर लागू होंगे:
ए) समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदा) विनियम, 2000 (दिनांक 3 मई, 2000 की अधिसूचना सं. फेमा.25/आरबी-2000) और मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन (दिनांक 05 जुलाई, 2016 की अधिसूचना सं. एफएमआरडी मास्टर निदेश सं.1/2016-17)।
बी) समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव) निदेश, 2025 (दिनांक 09 दिसंबर, 2025 की अधिसूचना सं. एफएमआरडी.डीआईआरडी. 06/14.03.046/2025-26);
सी) समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (सरकारी प्रतिभूतियों में वायदा संविदा) निदेश, 2025 (दिनांक 21 फरवरी, 2025 की अधिसूचना सं. एफ़एमआरडी.डीआईआरडी.17/14.03.042/2024-25)।
डी) समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (ऋण डेरिवेटिव) निदेश, 2022 (दिनांक 10 फरवरी, 2022 की अधिसूचना सं. एफएमआरडी.डीआईआरडी.11/14.03.004/2021-22)।
ई) अन्य निदेश, जो रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएँ।
2. विशिष्ट लेनदेन अभिज्ञापक (यूटीआई), किसी ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन को दिया गया एक विशिष्ट अभिज्ञापक, ओटीसी डेरिवेटिव बाजार में शासी निदेशों के अनुसार किए गए सभी लेनदेन के लिए सृजित/रिपोर्ट किया जाएगा। ये निदेश, इन निदेशों के प्रभावी होने की तारीख को या इसके बाद किए गए ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन पर लागू होंगे।
3. यूटीआई, भुगतान और बाजार अवसंरचना समिति (सीपीएमआई) – अंतरराष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन (आईओएससीओ) द्वारा फरवरी 2017 में जारी यूटीआई तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार सृजित किया जाएगा। यूटीआई में अधिकतम 52 अक्षर (कैरेक्टर) होंगे जिसमें सृजक इकाई का एलईआई और उसके बाद एक विशिष्ट अभिज्ञापक होगा और यह अपने पूरे जीवनचक्र में किसी डेरिवेटिव लेनदेन के लिए विशिष्ट होगा।
4. यूटीआई सृजक इकाई का निर्धारण सारणी 1 में दिए गए प्रवाह (वाटरफॉल) के अनुसार किया जाएगा, जिसमें यूटीआई सृजन की जिम्मेदारी प्रवाह में अगली इकाई को सौंप दी जाएगी, यदि अभिज्ञापित यूटीआई सृजक इकाई यूटीआई सृजन करने में असमर्थ या अनिच्छुक है। प्रवाह के अनुसार, यदि क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड – ट्रेड रिपॉजिटरी (सीसीआईएल-टीआर (सीसीआईएल-टीआर) को कोई लेनदेन यूटीआई के बिना रिपोर्ट की जाती है तो सीसीआईएल-टीआर लेनदेन के लिए यूटीआई का सृजन करेगा।
| सारणी 1: यूटीआई का सृजन |
केवल भारत में रिपोर्ट किए जाने योग्य लेनदेन |
भारत और एक या अधिक विदेशी क्षेत्राधिकारों में रिपोर्ट किए जाने योग्य लेनदेन |
1) सीसीपी, यदि लेनदेन के लिए सीसीपी प्रतिपक्षकार है। |
1) सीसीपी, यदि लेनदेन के लिए सीसीपी प्रतिपक्षकार है। |
2) ईटीपी, यदि ईटीपी पर लेनदेन निष्पादित किया गया है। |
2) क्लियरिंग सदस्य, यदि लेनदेन के लिए क्लियरिंग सदस्य प्रतिपक्षकार है; |
3) प्रतिपक्षकारों के बीच परस्पर सहमति से कोई इकाई। |
3) ईटीपी, यदि ईटीपी पर लेनदेन निष्पादित किया गया है। |
4) सीसीआईएल-टीआर। |
ए) यदि किसी विदेशी क्षेत्राधिकार में शीघ्रतर रिपोर्टिंग समयरेखा है1 |
4) विदेशी क्षेत्राधिकार में आवश्यकताओं द्वारा निर्धारित इकाई। |
बी) यदि विदेशी क्षेत्राधिकार में शीघ्रतर रिपोर्टिंग समयरेखा नहीं है |
4) प्रतिपक्षकारों के बीच परस्पर सहमति से कोई इकाई।
5) सीसीआईएल-टीआर। |
5. भारत और किसी विदेशी क्षेत्राधिकार में रिपोर्ट करने योग्य लेनदेन के लिए, जिसमें विदेशी क्षेत्राधिकार में शीघ्रतर रिपोर्टिंग समयरेखा है, बाजार सहभागियों को यह सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयास करने होंगे कि यूटीआई, लेनदेन की रिपोर्टिंग समय-सीमा के भीतर प्राप्त और रिपोर्ट किया जाए। यदि बाजार प्रतिभागी रिपोर्टिंग समय-सीमा के भीतर यूटीआई प्राप्त करने में असमर्थ है, तो बाजार प्रतिभागी यथाशीघ्र लेकिन लेनदेन की तारीख से पाँच मुंबई कारोबार दिवसों के भीतर यूटीआई प्राप्त कर सकता है और सीसीआईएल-टीआर को प्रस्तुत कर सकता है। लेनदेन जब शुरू में रिपोर्ट किया गया, तब बाजार प्रतिभागी द्वारा रिपोर्ट किया गया या सीसीआईएल-टीआर द्वारा सृजित अस्थायी यूटीआई को तब एक अंतरिम यूटीआई के रूप में माना जाएगा।
6. सीसीआईएल-टीआर में रिपोर्टिंग के पश्चात, डेरिवेटिव संविदा में संशोधन के लिए नए यूटीआई के सृजन की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, मौजूदा रिपोर्टिंग दिशानिर्देशों के अनुसार, रिपोर्ट करने योग्य एक नई डेरिवेटिव संविदा के निर्माण के परिणामस्वरूप नवीयन जैसी जीवनचक्र घटना के परिणामस्वरूप एक नया यूटीआई सृजन करना होगा।
7. सीसीआईएल, यूटीआई की रिपोर्टिंग के लिए परिचालन दिशानिर्देश और रिपोर्टिंग प्रारूप जारी करेगा।
8. बाजार सहभागियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं।
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