भा.रि.बैंक/2025-26/207
केंका.सीईपीडी.पीआरएस.सं.S1121/13-01-008/2025-2026
11 फरवरी 2026
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)
महोदया/महोदय,
बैंकों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाना – समीक्षा
कृपया “बैंकों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाना” संबंधी 27 जनवरी 2021 का परिपत्र आरबीआई/2020-21/87 सीईपीडी.केंका.पीआरडी.परिपत्र.सं.01/13.01.013/2020-21 देखें।
2. उपर्युक्त परिपत्र में निहित अनुदेशों की बाद के विनियामक और पर्यवेक्षी घटनाक्रमों के आलोक में समीक्षा की गई। विशेष रूप से रिज़र्व बैंक के समेकन अभ्यास के भाग के रूप में शिकायत से संबंधित प्रकटीकरण, वित्तीय विवरणों पर प्रासंगिक मास्टर निदेश: प्रस्तुति और प्रकटीकरण (निदेश), दिनांक 28 नवंबर 2025 के तहत निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक-एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2026 के तहत बढ़ी हुई मुआवजा सीमा के माध्यम से उपभोक्ता मुआवजा फ्रेमवर्क को मजबूत किया गया है, और भारतीय रिज़र्व बैंक (आंतरिक ओम्बड्समैन) निदेश, 2026 ने आंतरिक ओम्बड्समैन को मुआवजा देने की सिफारिश करने का अधिकार दिया है। बैंकों की शिकायत निवारण व्यवस्थाएँ भी नियमित निगरानी प्रक्रियाओं के माध्यम से पर्यवेक्षी मूल्यांकन और फॉलो-अप के अधीन हैं। तदनुसार, निदेशों को तर्कसंगत बनाने और दोहराव से बचने के लिए, 27 जनवरी 2021 के परिपत्र को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
3. यह स्पष्ट किया जाता है कि परिपत्र वापस लेने का यह निर्णय प्रभावी ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र को बनाए रखने और मौजूदा विनियामक और पर्यवेक्षी अनुदेशों तथा बैंक के बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के संदर्भ में अपनी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणालियों को लगातार मजबूत बनाने के बैंकों के दायित्वों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना है।
4. तदनुसार, 27 जनवरी 2021 का परिपत्र तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है और यह इस परिपत्र की तारीख से निरस्त माना जाएगा।
डॉ. नीना रोहित जैन
(मुख्य महाप्रबंधक) |