बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का लोगो

प्रेस प्रकाशनी

(400 kb )
भारतीय रिज़र्व बैंक ने श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड, गोकक, कर्नाटक का लाइसेंस रद्द किया

18 जून 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड, गोकक, कर्नाटक
का लाइसेंस रद्द किया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 56 के साथ पठित धारा 22 के अंतर्गत दिनांक 16 जून 2026 के आदेश द्वारा “श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड, गोकक, कर्नाटक” का लाइसेंस रद्द कर दिया है। परिणामस्वरूप, बैंक 18 जून 2026 को कारोबार की समाप्ति से बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकता है। सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, कर्नाटक से भी अनुरोध किया गया है कि वे बैंक का समापन करने और बैंक के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करें।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने निम्न कारणों से बैंक का लाइसेंस रद्द किया:

  1. बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं हैं। इस प्रकार, यह बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 11(1) और 22(3)(डी) के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करता है;

  2. बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धाराओं 22(3)(ए), 22(3)(बी), 22(3)(सी), 22(3)(डी) और 22(3)(ई) की अपेक्षाओं के अनुपालन में विफल रहा है;

  3. बैंक का बने रहना उसके जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल है;

  4. बैंक अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति के साथ अपने वर्तमान जमाकर्ताओं को पूर्ण रूप से भुगतान करने में असमर्थ होगा; और

  5. यदि बैंक को अपने बैंकिंग कारोबार को जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो जनहित प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा।

2. लाइसेंस रद्द होने के परिणामस्वरूप, “श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड, गोकक, कर्नाटक” को तत्काल प्रभाव से बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 5 (बी) में यथापरिभाषित 'बैंकिंग' कारोबार, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ जमाराशियों को स्वीकार करने और जमाराशियों की चुकौती करना शामिल हैं, करने से प्रतिबंधित किया गया है।

3. परिसमापन के बाद, प्रत्येक जमाकर्ता, डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत, नि‍क्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी नि‍गम (डीआईसीजीसी) से 5,00,000/- (पांच लाख रुपये मात्र) की मौद्रिक सीमा तक अपने जमाराशि के संबंध में जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने का हकदार होगा। बैंक द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सर्व समवेशी निदेश के लागू होने की तारीख को लगभग 97.90% जमाकर्ता डीआईसीजीसी से उनकी पूरी जमाराशि प्राप्त करने के हकदार हैं। 09 जून 2026 तक, डीआईसीजीसी ने बैंक के संबंधित जमाकर्ताओं से प्राप्त सहमति के आधार पर डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 की धारा 18ए के प्रावधानों के अंतर्गत कुल बीमाकृत जमाराशि के 88.21 करोड़ का भुगतान पहले ही कर दिया है।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/479


2026
2025
2024
2023
2022
2021
2020
2019
2018
2017
2016
2015
2014
2013
2012
पुरालेख
शीर्ष