20 फरवरी 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने यूको बैंक पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 16 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा यूको बैंक (बैंक) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ‘बचत जमाराशियों पर ब्याज के भुगतान की अवधि', 'लॉकर का किराया' और 'स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों के संबंध में साख सूचना रिपोर्टिंग’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹38.60 लाख (अड़तीस लाख साठ हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) और 51(1) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) और प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 23(4) के साथ पठित धारा 25(1)(iii) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक का पर्यवेक्षी मूल्यांकन हेतु सांविधिक निरीक्षण (आईएसई 2025) किया गया। भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और इससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि आरबीआई निदेशों के उक्त प्रावधानों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर बैंक के उत्तर और इसके द्वारा किए गए अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने अन्य बातों के साथ-साथ यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
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बैंक ने कतिपय बचत बैंक जमा खातों पर कोई ब्याज नहीं दिया;
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बैंक ने साख सूचना कंपनियों को ऋण संबंधी स्वयं-सहायता समूह सदस्य स्तरीय आंकड़ों की रिपोर्टिंग नहीं की; और
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बैंक ने कतिपय ग्राहकों द्वारा लॉकर के समय से पूर्व सरेंडर के मामले में एकत्र किए गए अग्रिम लॉकर किराए की आनुपातिक राशि को वापस नहीं किया।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2148 |