8 मई 2026
आरबीआई ने ‘बैंकों के जोखिम भारित आस्ति की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) की गणना हेतु
सामान्य इक्विटी टियर 1 (सीईटी 1) पूंजी में त्रैमासिक लाभों के समावेशन से संबंधित
दिशानिर्देशों की समीक्षा’ संबंधी संशोधन निदेश जारी किए
रिज़र्व बैंक ने 8 अप्रैल 2026 को ‘बैंकों के जोखिम भारित आस्ति की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) की गणना हेतु सामान्य इक्विटी टियर 1 (सीईटी 1) पूंजी में त्रैमासिक लाभों के समावेशन से संबंधित दिशानिर्देशों की समीक्षा' पर तीन संशोधन निदेशों के मसौदे जारी किए थे, जिन पर उसने हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी। वर्तमान में, वाणिज्यिक बैंक (स्थानीय क्षेत्र बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) वर्तमान वित्तीय वर्ष के लाभों को सीआरएआर गणना के लिए तिमाही आधार पर मान सकते हैं, बशर्ते पिछले वित्तीय वर्ष की चार तिमाहियों में से किसी भी तिमाही के अंत में अनर्जक आस्तियों (एनपीए) के लिए किए गए वृद्धिशील प्रावधानों में, चार तिमाहियों के औसत से 25 प्रतिशत से अधिक विचलन न हो। निदेशों के मसौदे का उद्देश्य एनपीए के लिए वृद्धिशील प्रावधानों की पात्रता संबंधी शर्त को हटाना था।
मसौदों पर प्राप्त प्रतिक्रिया की जाँच की गई है और संशोधन निदेशों को अंतिम रूप देते समय उस पर विचार किया गया है। मसौदों पर प्राप्त प्रतिक्रिया से संबंधित एक विवरण अनुबंध में दिया गया है।
तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज ‘बैंकों के जोखिम भारित आस्ति की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) की गणना हेतु सामान्य इक्विटी टियर 1 (सीईटी 1) पूंजी में त्रैमासिक लाभों के समावेशन से संबंधित दिशानिर्देशों की समीक्षा' संबंधी निम्नलिखित तीन संशोधन निदेश जारी किए हैं:
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भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) पांचवां संशोधन निदेश, 2026
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भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) चौथा संशोधन निदेश, 2026.
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भारतीय रिज़र्व बैंक (भुगतान बैंक – पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/227
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